पाकिस्तान में प्रेस की स्वतंत्रता पर बड़ा हमला हुआ है। न्यूयॉर्क टाइम्स की शिया समुदाय पर आधारित रिपोर्ट ‘Shia Anger in Pakistan’ को प्रकाशित करने से रोका गया, जिसके विरोध में अखबार ने पन्ना खाली छोड़ दिया। जानिए क्या है इस रिपोर्ट में और क्यों डरी हुई है पाक सेना।
भारत का पड़ोसी मुल्क वैसे तो लगातार यह बातें करता है कि भारत में अल्पसंख्यकों के साथ कैसा और क्या व्यवहार हो रहा है और वह इन दिनों अपने आप को विश्व की राजनीति का केंद्र मानकर बैठा हुआ है। मगर एक खबर जो सामने आई है, वह उसकी पानी के बुलबुले की तरह बनी छवि को तोड़ने के लिए पर्याप्त है।
समाचार पत्र में खाली स्थान का मामला
क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि किसी ऐसे मुल्क के समाचार पत्र के मुख्य पन्ने पर खाली स्थान छोड़ दिया जाएगा, जो अपने आप को आजादी का मसीहा कहता है? जो यह कहता है कि उसके यहाँ हर चीज की आजादी है और वह आवाज को दबाने मे यकीन नहीं करता।
मगर उसने अब जो किया है, उसके चलते पूरे विश्व में उसकी थूथू होनी निश्चित है और हो भी रही है। उसने न्यूयॉर्क टाइम्स की पाकिस्तान के शिया समुदाय को लेकर लिखी गई रिपोर्ट को ही प्रकाशित करने से इनकार कर दिया। और फिर जो हुआ है, वह शायद पत्रकारिता के इतिहास में नया ही है।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट और विवाद
न्यूयॉर्क टाइम्स ने पाकिस्तान के शिया समुदाय में बढ़ रही नाराजगी को लेकर एक रिपोर्ट “Shia Anger in Pakistan” के नाम से प्रकाशित की। इस रिपोर्ट में लिखा कि कैसे पश्चिमी एशिया युद्ध के बढ़ने से पाकिस्तान के शिया समुदाय में बेचैनी बढ़ रही है। और इसने उसे अपने मुख्य पृष्ठ पर प्रकाशित किया था।
परंतु पाकिस्तान में इस के वितरण के लिए जिम्मेदार एजेंसी द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने इसे प्रकाशित करने से इनकार कर दिया।
खाली स्थान और नोट का उल्लेख
इस पर न्यूयॉर्क टाइम्स ने उस रिपोर्ट की जगह को खाली छोड़ दिया और नीचे एक नोट लिखा। और वह है कि “यह लेख पाकिस्तान में हमारे प्रकाशन सहयोगी द्वारा प्रिंट से हटा दिया गया था। इसे हटाने में ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ और उसके संपादकीय कर्मचारियों की कोई भूमिका नहीं थी।”
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प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला
पाकिस्तान में प्रेस की स्वतंत्रता पर इतना बड़ा हमला हुआ है। और न्यूयॉर्क टाइम्स ने इसका प्रतिकार भी किया है। परंतु जिस प्रकार से पाकिस्तान में प्रेस पर हुए हमले को लेकर इतनी सहजता है, वह हैरत में डालने वाली है। पाकिस्तान के प्रति वामपंथी मीडिया का रवैया बहुत उदार देखा जाता है और प्रेस की आजादी पर इतने बड़े हमले के बाद भी पश्चिमी मीडिया ने इसे उठाया नहीं है।
पूर्व घटनाएं और मीडिया पर नियंत्रण
ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान में यह पहली बार हो रहा हो। पाकिस्तान में प्रेस की स्वतंत्रता पर लगातार हमले होते ही रहते हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स भी लगातार इसका शिकार होता रहता है। वर्ष 2014 में भी न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट को पाकिस्तान में प्रतिबंधित कर दिया था। उस रिपोर्ट में पाकिस्तान के अलकायदा के साथ संबंधों की बात काही गई थी। और साथ ही ऐसी भी खबरें थीं कि जब यह बात सामने निकलकर आई थी कि पाकिस्तान से चीन में महिलाओं की तस्करी हो रही है तो इस रिपोर्ट को भी अधिकारियों ने दबाने का प्रयास किया था।
पाकिस्तान में प्रेस को अक्सर सरकार और सेना के दबावों का सामना करना पड़ता है और कई कानून अब ऐसे बन गए हैं, जो ऑनलाइन और ऑफलाइन कंटेन्ट को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किये जा रहे हैं। जैसे कि “PEMRA (पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी) और PECA (प्रिवेंशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक क्राइम्स एक्ट) ।
पत्रकारों पर दबाव और खतरे
स्थानीय पत्रकार भी लगातार हिंसा और धमकियों का सामना करते हैं। मगर इस खबर में सबसे अलग बात यह है कि न्यूयॉर्क टाइम्स ने पाकिस्तान की सरकार की इस दादागिरी के आगे सिर न झुकाने का निर्णय लिया और यह भी सुनिश्चित किया कि पाकिस्तान की सच्ची शक्ल सभी को दिखे।
‘पाकिस्तान के शिया समुदाय का दुख’ सामने आने में आपत्ति क्या?
यह और महत्वपूर्ण प्रश्न है कि आखिर पाकिस्तान के शिया समुदाय का दुख सामने याने में आपत्ति क्या हो सकती है? पाकिस्तान की जनसंख्या में लगभग 15% शिया समुदाय के लोग हैं। हालांकि उन्हें अल्पसंख्यक कहा जाता है, परंतु मुस्लिम देश में कोई मुस्लिम समुदाय ही कैसे अल्पसंख्यक हो सकता है, यह और भी अधिक विचारणीय है।
हालांकि पाकिस्तान में शिया समुदाय को लेकर क्या रवैया रहता है, वह इस घटना से समझा जा सकता है कि जब रावलपिंडी के जनरल हेडक्वार्टर में इफ्तार के मौके पर पाकिस्तान की सेना के प्रमुख आसिम मुनीर शिया नेताओं के साथ मौजूद थे, तो उन्होनें इस बात पर आपत्ति दर्ज की थी कि क्यों शिया समुदाय के लोग ईरान के समर्थन मे प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होनें कथित रूप से कहा था कि “अगर ईरान से इतना प्यार है तो वहीं चले जाओ”।
इस बयान के बाद शिया समुदाय ने काफी शोर मचाया था और कहा था कि यह उन्हें धमकाने जैसा है।
रिपोर्ट प्रतिबंध के कारणों पर सवाल
अब यह एक और प्रश्न उठता है कि आखिर इस प्रकार के रिपोर्टिंग प्रतिबंध का कारण क्या हो सकता है? आम तौर पर अधिकारियों द्वारा यह कहा जाता है कि चूंकि ये संवेदनशील मुद्दे हैं और इन रिपोर्ट्स का प्रकाशन होने से कानून एवं व्यवस्था में कमी आएगी।
न्यूयॉर्क टाइम्स के लेख में शिया समुदाय के साथ हो रहे दोयम दर्जे के व्यवहार को लेकर रिपोर्टिंग थी। अब यह प्रश्न उठता है कि आखिर इस रिपोर्ट को प्रतिबंधित क्यों किया गया? क्या पाकिस्तान नहीं चाहता है कि उसके शिया समुदाय की पीड़ा सामने आए और यह दर्द सामने आए कि कैसे उन्हें एक तरह से दोयम दर्जे का नागरिक समझा जाता है?
सोशल मीडिया और वैश्विक प्रतिक्रिया
इस खाली जगह को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चाएं हो रही हैं, मगर पाकिस्तान को आदर्श मानने वाले भारत के कथित प्रगतिशील वर्ग की तरफ से अभी भी चुप्पी है। यह खाली जगह पाकिस्तान की काफी जगह खाली कर जाएगी और उसकी असलियत पूरे विश्व के सामने लेकर आएगी, ऐसा समझा जाना चाहिए।
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