क्यों असफल रहा Araghchi का दूसरा पाकिस्तान दौरा? Putin से क्या सलाह करेंगे ईरानी विदेश मंत्री!
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क्यों असफल रहा Araghchi का दूसरा पाकिस्तान दौरा? Putin से क्या सलाह करेंगे ईरानी विदेश मंत्री!

अराघची आज रूस में हैं और पुतिन से ताजा हालात पर 'सलाह' करने वाले हैं। साथ ही उनके, रूस के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करने की उम्मीद है, ताकि अमेरिका के साथ रुकी हुई बातचीत के बीच मध्य-पूर्व संघर्ष पर चर्चा की दिशा तय की जा सके

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Apr 27, 2026, 03:16 pm IST
in विश्व, विश्लेषण
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप (File Photo)

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप (File Photo)

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ ‘करीबी तालमेल’ बनाने के लिए पाकिस्तान, ओमान होते हुए अब मॉस्को में हैं। यहां रूस के वरिष्ठ राजनयिकों से भेंट के अलावा वे राष्ट्रपति पुतिन से भी अलग से ताजा हालात पर सलाह करने वाले हैं। आखिर शनिवार को अमेरिकी दूतों के न आने की पक्की खबर मिलने के बाद भी अराघची दोबारा इस्लामाबाद में कुछ घंटों के लिए रुके और पूर्व कार्यक्रम के अनुसार ओमान की राजधानी मस्कट के लिए रवाना हो गए थे, जहां से वे अब रूस पहुंच चुके हैं। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से आए दो महत्वपूर्ण बयानों पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है जिससे उनकी आगे की सोच का कुछ खुलासा जरूर होता है।

एक बयान में ट्रंप ने भारत और चीन को एक ही पलड़े में रखते हुए ‘नरक का द्वार’ कहा था, जबकि दूसरे बयान में अमेरिकी दूतों के दोबारा चर्चा के लिए इस्लामाबाद न जाने को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब उन्होंने फील्ड मार्शन असीम मुनीर और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ की तारीफ से शुरू किया। ट्रंप इधर मुनीर की कुछ ज्यादा ही प्रशंसा करते दिखे हैं। हालांकि पिछले दिनों उन्होंने चुटकी ली थी कि उन्हें कमजोर और पस्त लोगों को अपने आसपास देखना अच्छा लगता है। लेकिन ईरान के संदर्भ में ट्रंप पाकिस्तान को भी इस क्षेत्र में साधे रखना चाहते हैं क्योंकि पहले की जिन्ना का देश अमेरिका की कठपुतली बनकर गौरव महूसस करता है खासकर ऐसे में जब आज भारत अमेरिका की किसी थानेदारी को नहीं मानता है। इसलिए ट्रंप मुनीर को तारीफों के झांसे में रखकर कई समीकरण साधने की जुगत में हैं।

रूसी राष्ट्रपति पुतिन और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (File Photo)

अमेरिका का खोखला दांव!
लेकिन ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध खत्म कराने का सेहरा अपने सिर पर बांधने को बेताब जिन्ना का देश दुनिया में अपने नाम पर और बट्टा ही लगवा रहा है। उधर कुछ कूटनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप जिन्ना के देश से कुछ ज्यादा ही उम्मीदें बांधे हुए हैं जबकि उस देश के नेता हर वक्त सिर फुटौव्वल में ही लगे रहते हैं, उनकी आपस में तो किसी बात पर सहमति नहीं बनती, दो देशों के बीच सहमति में वे क्या ही मदद कर पाएंगे!

अराघची आज रूस में हैं और पुतिन से ताजा हालात पर ‘सलाह’ करने वाले हैं। साथ ही उनके, रूस के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करने की उम्मीद है, ताकि अमेरिका के साथ रुकी हुई बातचीत के बीच मध्य-पूर्व संघर्ष पर चर्चा की दिशा तय की जा सके।

मॉस्को की सलाह
ईरानी प्रतिनिधिमंडल के सेंट पीटर्सबर्ग में होने को लेकर अमेरिका की नजरें भी वहीं जमी हुई हैं। रूस में ईरान के राजदूत काज़ेम जलाली ने कहा कि अराघची अमेरिकी और इस्राएली अधिकारियों के साथ ‘बातचीत की मौजूदा स्थिति, संघर्ष-विराम, और संघर्ष से जुड़े घटनाक्रमों’ पर रूसी अधिकारियों के साथ परामर्श करेंगे।

जैसा पहले बताया, यह यात्रा अराघची के क्षेत्रीय दौरे का अंतिम चरण है, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान, ओमान और रूस का दौरा किया है। उन्होंने इस दौरे को वाशिंगटन और पश्चिमी यरुशलम के साथ चल रहे गतिरोध के बीच ईरान के सहयोगियों के साथ ‘करीबी तालमेल’ बनाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

बताते हैं, अराघची ने पाकिस्तान में ‘ईरान पर युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए एक व्यावहारिक रूपरेखा’ पर तेहरान का पक्ष साझा किया है। वहां उन्होंने यह भी कहा कि यह देखना बाकी है कि क्या अमेरिका ‘कूटनीति को लेकर वास्तव में गंभीर है।’

ओमान में अपनी वार्ता के बारे में अराघची का कहना है कि वहां चर्चा द्विपक्षीय मामलों और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर केंद्रित रही। इसमें होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के तरीके भी शामिल थे, जिसे उन्होंने तटीय राज्यों, क्षेत्रीय पड़ोसियों और व्यापक विश्व की दिलचस्पी का विषय बताया।

रिपोर्ट है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत, स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर संभावित बातचीत के लिए पाकिस्तान जाने को तैयार तो थे; लेकिन अराघची के दौरे के दौरान तेहरान ने अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ सीधी बातचीत से इनकार कर दिया था। इसलिए ट्रंप ने उन्हें रवाना ही नहीं होने दिया।

हालांकि, बताया गया है कि अराघची ने पाकिस्तान को, जो मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, एक दस्तावेज सौंपा है। इस दस्तावेज़ में ईरान की ‘रेड लाइन्स’ की रूपरेखा दी गई है, जिसमें होर्मुज और ईरान के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम से संबंधित मुद्दे शामिल हैं।

नाकेबंदी से बढ़ा तनाव
वॉशिंगटन ने इस हफ्ते की शुरुआत में ईरान के साथ संघर्ष-विराम को अनिश्चित काल के लिए बढ़ाते हुए तेहरान से एक ‘समग्र’ प्रस्ताव की उम्मीद की थी, जबकि ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी जारी रखी गई थी। होर्मुज के आसपास तनाव ने वैश्विक बाजारों को हिला कर रखा हुआ है, जिससे ब्रेंट क्रूड की क़ीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई है। वहीं ट्रंप ने यह साफ कर दिया है कि युद्ध समाप्त करने के लिए कोई निश्चित समय-सीमा नहीं है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह कहकर स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है कि उन्होंने अमेरिकी नौसेना को आदेश दे दिया है कि यदि कोई ईरानी बोट जलमार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाते हुए पाई जाती है, तो उसे ‘सीधे गोली मारी जाए’। तेहरान इस नाकेबंदी को संघर्ष-विराम का सीधा उल्लंघन मानता है, उसका तर्क है कि जब तक यह नाकेबंदी जारी रहती है और इस्राएल लेबनान पर अपने हमले जारी रखता है, तब तक किसी भी बातचीत का कोई मतलब नहीं है।

Topics: संघर्ष विरामAbbas Araghchiamerica iran warHormuzईरानअमेरिकाrussiaputintrumpceasefireट्रंप
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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