'हमारी पहचान 'भारत' से है, न कि ‘इंडिया’ से'
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‘हमारी पहचान ‘भारत’ से है, न कि ‘इंडिया’ से’

पुणे में ‘संघ शताब्दी मंथन’ आयोजित हुआ। इस असर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल के सदस्य डॉ. मनमोहन वैद्य ने कहा कि हमारा देश प्राचीन काल से उद्योग प्रधान था।

Written byPanchjanyaPanchjanya
Apr 24, 2026, 07:44 pm IST
inमहाराष्ट्र
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. मनमोहन वैद्य। साथ में हैं अन्य वक्ता

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. मनमोहन वैद्य। साथ में हैं अन्य वक्ता

गत 19 अप्रैल को पुणे में ‘संघ शताब्दी मंथन’ आयोजित हुआ। इस असर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल के सदस्य डॉ. मनमोहन वैद्य ने कहा कि हमारा देश प्राचीन काल से उद्योग प्रधान था।

वस्त्र, धातु और रसायन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में वैश्विक बाजार में भारत का वर्चस्व था। एक देश के दो नाम होना विश्व में कहीं भी नहीं होता है। इसलिए ‘इंडिया’ नहीं, बल्कि ‘भारत’ ही हमारी सच्ची और गौरवशाली पहचान है।

इसी ‘स्व-बोध’ और सेवाभाव के द्वारा भारत आगामी समय में विश्व का दीपस्तंभ बनेगा। उन्होंने कहा कि भारत का औद्योगिक वैभव कितना बड़ा था, इसका उल्लेख डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी ने सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन के समय किया था।

हमारी संस्कृति एक है, लेकिन उत्सव विभिन्न हैं। कोरोना संकट के दौरान संपूर्ण विश्व ने भारत की आध्यात्मिक शक्ति का अनुभव किया। अपने प्राणों की परवाह किए बिना सामान्य नागरिक जिस तरह से सेवा कार्य के लिए बाहर निकले, वह राष्ट्र के जीवंत होने का प्रत्यक्ष उदाहरण है।

श्री संजय कुलकर्णी ने कहा कि समय की मांग है कि भारत को अपने पारिवारिक मूल्यों का जतन करना चाहिए। झाड़ू को भी नमन कर कृतज्ञता व्यक्त करने वाली हमारी महान संस्कृति है। उन्होंने पर्यावरण की रक्षा के लिए पानी की बचत और प्लास्टिक का उपयोग टालने का आह्वान किया।

साथ ही सामाजिक समरसता को बढ़ाने हेतु घरेलू कामगारों से सम्मान से बर्ताव करना तथा सामाजिक नैतिकता के रूप में यातायात के नियमों का कठोरता से पालन करना आवश्यक है। कार्यक्रम में अनेक गणमान्यजन उपस्थित थे।

Topics: स्व-बोध और सेवाभावपारिवारिक मूल्य और संस्कृतिRSSऔद्योगिक वैभवसंजय कुलकर्णीसामाजिक समरसताडॉ. मनमोहन वैद्यपर्यावरण रक्षाआध्यात्मिक शक्तिसंघ शताब्दी मंथनभारत बनाम इंडियाप्राचीन भारतीय उद्योग
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