राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर जी ने कहा कि “देश के आर्थिक विकास में समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता होनी चाहिए। इसके लिए आय और स्वरोजगार के साधन केवल महानगरों तक सीमित न रहकर गांव-कंदराओं और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचने अनिवार्य हैं। देश की आर्थिक प्रगति को गति देने के लिए उच्च तकनीकी शिक्षा देने वाले ‘आईआईटी’ (IIT) संस्थानों की ही भांति, जमीनी स्तर पर कुशल कार्यबल का निर्माण करने वाले ‘आईटीआई’ (ITI) संस्थानों को भी सशक्त बनाना होगा। समय की मांग के अनुरूप इनका आधुनिकीकरण भी अत्यंत आवश्यक है”।
सोलापुर जिला अंतर्गत करमाळा स्थित शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) का नामकरण संघ के पूर्व सह सरकार्यवाह श्रद्धेय मदनदास जी देवी की पावन स्मृति में ‘स्व. मदनदास देवी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान’ किया गया है। मंगलवार (30 जून) को यह गरिमामयी नामकरण समारोह संपन्न हुआ। समारोह में मुख्य वक्ता सुनील आंबेकर जी रहे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जी ने वीडियो संदेश के माध्यम से शुभकामनाएं प्रेषित कीं, जबकि महाराष्ट्र के कौशल विकास मंत्री मंगलप्रभात लोढा कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए।
‘नेपथ्य में रहकर राष्ट्र का पुनर्निर्माण करने वाले मनीषी थे मदनदास जी’
सुनील आंबेकर जी ने कहा, “मदनदास जी संघ की तपःपूत भट्टी में गढ़े गए सार्वजनिक जीवन के एक आदर्श और अप्रतिम कार्यकर्ता थे। स्वयं सदैव नेपथ्य (पर्दे के पीछे) में रहकर संगठन और राष्ट्रकार्य को कैसे गति दी जाए – यही उनका जीवनव्रत था, जिसे उन्होंने अंतिम सांस तक पूर्ण निष्ठा से निभाया। देश की वास्तविक प्रगति के लिए युवा शक्ति को योग्य दिशा मिलना आवश्यक है, इसी दृढ़ विश्वास के साथ उन्होंने देशभर में विद्यार्थियों का एक विशाल और रचनात्मक आंदोलन खड़ा किया। वैश्विक व्यापार के पटल पर सक्रिय रहते हुए भी भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा कैसे की जानी चाहिए, यह ‘स्वदेशी’ का मंत्र उन्होंने युवा पीढ़ी के मन-मस्तिष्क में रोपित किया।”
सुनील जी ने कहा, “केवल महानगरों को बड़ा और चकाचौंध से युक्त बनाकर राष्ट्र समृद्ध नहीं हो सकता। हमें आर्थिक समृद्धि के साधनों को गांवों तक ले जाना होगा और ग्रामीण अंचलों में उद्योगों का एक सुदृढ़ तंत्र (नेटवर्क) खड़ा करना होगा। आज विश्व के कई विकसित देशों में अगाध भौतिक और आर्थिक संपन्नता तो है, परंतु वहां मानवीय सुख, शांति और पारिवारिक संस्थाएं छिन्न-भिन्न हो चुकी हैं। इसलिए भारत को प्रगति पथ पर बढ़ते समय केवल तकनीकी विकास पर ही निर्भर नहीं रहना है, बल्कि तकनीक के साथ-साथ ‘मनुष्य और चरित्र निर्माण’ के सनातन कार्य को प्राथमिकता देनी होगी।” बदलते समय की पदचाप को पहचान कर आईटीआई जैसे संस्थानों में भी युगानुकूल सुधार होने चाहिए – इसी दूरगामी सोच के साथ मदनदास जी ने 1989-90 में नागपुर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के माध्यम से ऐतिहासिक ‘राष्ट्रीय आईटीआई सम्मेलन’ आयोजित करवाया था। आज करमाळा आईटीआई का नामकरण उनके उन्हीं वैचारिक संकल्पों की सार्थक परिणति है।
‘विद्यार्थियों में राष्ट्रीय एकात्मता का भाव जगाया’ – मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्व. मदनदास जी की पावन स्मृतियों को नमन करते हुए कहा, “युवाओं में राष्ट्र निर्माण की चेतना और राष्ट्रीय एकात्मता का ध्येय जागृत करने में मदनदास जी का अवदान अतुलनीय है। विशेष रूप से पूर्वोत्तर के विद्यार्थियों को राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उन्होंने जीवनपर्यंत भगीरथ प्रयास किए।” आज के युग में आईटीआई केवल तकनीकी प्रशिक्षण का केंद्र नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र के लिए कुशल, सक्षम और राष्ट्रभक्त मानव संसाधन का निर्माण करने वाला ऊर्जा केंद्र है। विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि में इन संस्थानों का महत्व अद्वितीय है।
कौशल विकास मंत्री मंगलप्रभात लोढा ने कहा “मदनदास जी सदैव भारत के आर्थिक विकास (जीडीपी) को बढ़ाने और युवाओं को स्वावलंबी बनाने के प्रबल पक्षधर थे। उनके इसी चिंतन को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार प्रदेश के आईटीआई संस्थानों के व्यापक आधुनिकीकरण के लिए ₹5,700 करोड़ का विशाल कोष खर्च कर रही है।” आईटीआई में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इलेक्ट्रिकल कोर्सेज जैसे आधुनिक एवं रोजगारपरक पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जा चुके हैं तथा आगामी वर्ष में पांच नए उन्नत पाठ्यक्रम भी जोड़े जाएंगे। इस अंचल में कौशल विकास को अधिक गति देने के लिए करमाळा आईटीआई में ‘टाटा इंस्टीट्यूट’ (Tata Institute) की एक स्वतंत्र शाखा शीघ्र ही प्रारंभ की जाएगी।

















