अमेरिकी विशेषज्ञ ने कहा-पाकिस्तान को बिचौलिया बना नाक कटवाएगा अमेरिका, यह जिन्ना के देश को आतंक फैलाने की हरी झंडी
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अमेरिकी विशेषज्ञ ने कहा-पाकिस्तान को बिचौलिया बना नाक कटवाएगा अमेरिका, यह जिन्ना के देश को आतंक फैलाने की हरी झंडी

पाकिस्तान दुनिया के सबसे अधिक अमेरिका-विरोधी देशों में से एक है। 2011 में अल कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन को अमेरिकी नेवी सील्स ने मार गिराया था, लेकिन पाकिस्तानी सरकार ने इस पर 'गहन निराशा' जताई थी

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Apr 20, 2026, 02:32 pm IST
in विश्व, विश्लेषण
रूबिन और ट्रंप (File Photo)

रूबिन और ट्रंप (File Photo)

इन दिनों पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और अमेरिका—ईरान ‘युद्धविराम’ के बीच अमेरिका के एक विशेषज्ञ ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके सलाहकारों की पाकिस्तान को बिचौलिया मानने की नीति पर कड़ा एतराज जताया है। इस विशेषज्ञ ने एक विश्व प्रसिद्ध अखबार में अपने लेख में लिखा है कि बदनाम पाकिस्तान को मध्यस्थ बनाने से अमेरिका को जीत के बजाय बेइज्जती का कड़वा घूंट पीना पड़ सकता है, इससे उसकी जगहंसाई हो सकती है। यह दो टूक चेतावनी दी है अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो माइकल रूबिन ने। उन्होंने ‘द संडे गार्जियन’ में एक लेख लिखा है जिसमें उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस नीति की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि यह कदम अमेरिका के लिए कल्पना लोक में जीने से ज्यादा कुछ नहीं है, इससे पाकिस्तान को आतंकवाद फैलाने की हरी झंडी मिल जाएगी।

अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो माइकल रूबिन

कैसे करें भरोसा?

रूबिन ने अपने लेख में पाकिस्तान को बिचौलिया बनाने की तुलना ‘बच्चों के स्कूल में बच्चों का ही शोषण करने वाले को शिक्षक बनाने’ से की है। उन्होंने लिखा है, ”अमेरिका के सबसे संवेदनशील राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों में पाकिस्तान पर भरोसा करना वैसा ही है जैसे किंडरगार्टन में बच्चे का शोषण करने वाले को ही शिक्षक बना देना।” यहां याद रहे कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में इस्राएल को ‘मानवता के लिए अभिशाप’, ‘कैंसर जैसा राज्य’ बताते हुए ‘नरसंहार’ का दोषी ठहराया था। आसिफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस्राएल के खिलाफ इन्हीं शब्दों का इस्तेमाल किया था।

हैरानी बात ​है कि इसके बावजूद, व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलाइन लीविट ने पाकिस्तान की तारीफ करते हुए पाकिस्तान को ‘कमाल का मध्यस्थ’ कहा था और अमेरिका-ईरान संघर्ष में उसकी भूमिका की तारीफ की थी। कुछ ही दिन पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने भी पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ की सराहना की थी। रूबिन इसे ही ‘राजनयिक कल्पना’ बताते हुए इस सबमें पाकिस्तान की भूमिका को ‘शैतानी’ बताते हैं।

हमेशा दिया धोखा

अपने लेख में रूबिन ने इस बात का भी जिक्र किया है कि पाकिस्तानी परमाणु वैज्ञानिक ए.क्यू. खान ने ईरान को परमाणु कार्यक्रम स्थापित करने में मदद की थी। अब वाशिंगटन उसी गड़बड़ी के लिए इस्लामाबाद को इनाम दे रहा है, जो उनके अपने भ्रष्टाचार से उपजी है। रूबिन के अनुसार, पाकिस्तान दुनिया के सबसे अधिक अमेरिका-विरोधी देशों में से एक है। 2011 में अल कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन को अमेरिकी नेवी सील्स ने मार गिराया था, लेकिन पाकिस्तानी सरकार ने इस पर ‘गहन निराशा’ जताई थी।

इस्लामाबाद में अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस के साथ असीम मुनीर और इशाक डार (File Photo)

रूबिन ने आगे लिखा कि तालिबान द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइसेज (आईईडी) में आधे से अधिक कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट मात्र दो पाकिस्तानी फैक्ट्रियों से आते थे। पाकिस्तान का तालिबानी उग्रवाद को समर्थन देने से हजारों अमेरिकियों की मौत हुई है। रूबिन ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान का आसरा लेना न केवल अमेरिका के लिए अपमानजनक होगा, बल्कि इससे इस्लामाबाद में अहंकार बढ़ेगा और उसे लगेगा कि ट्रंप ने उसे आतंकवाद जारी रखने की खुली छूट दे दी है।

रूबिन के ये विचार पश्चिम एशिया संघर्ष के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जहां अमेरिका-ईरान तनाव एक बार फिर चरम पर है। हाल ही में ‘टॉक्स कंटीन्यू व्हाइल ईरान रिटेन्स कंट्रोल ऑफ होर्मुज’ शीर्षक से खबर आई है, जिसके अनुसार स्ट्रेट आफ होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण बना हुआ है। ऐसे में पाकिस्तान को मध्यस्थ बनाना रणनीतिक भूल हो सकती है। कल के संडे गार्जियन में प्रकाशित रुबिन का यह लेख बेशक वर्तमान तनाव की एक झलक देता है।

सब जानते हैं कि पाकिस्तान का अमेरिका के प्रति हमेशा से दोहरा चरित्र रहा है। अफगानिस्तान युद्ध के दौरान भी इस्लामाबाद ने तालिबान को पनाह दी थी, जिससे अमेरिकी हित प्रभावित हुए थे। अब पश्चिम एशिया में भी वही पैटर्न दोहराया जा रहा है। रूबिन साफ कहते हैं कि ट्रंप प्रशासन की यह नीति घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवालों के घेरे में है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अमेरिका की विश्वसनीयता और कम होगी।

इसमें संदेह नहीं है कि विशेषज्ञ रूबिन की बातें अमेरिकी नीति—निर्माताओं के लिए चेतावनी ही हैं। पाकिस्तान की पीठ थपथपाने से क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित हो सकती है। दुनिया भर में आतंकवाद फैलाने का दोषी जिन्ना का देश मध्यस्थ बने, यह बात किसी को हजम नहीं हो रही है और बस ट्रंप की सोच को लेकर शंका व्यक्त कर रहे हैं।

Topics: Iranisraelstrategyपाकिस्तानMiddle EastPakistanforeign affairsईरानपश्चिम एशियाअमेरिकाWest Asia tensionAmericaरूबिनwarmicheal rubintrumpterrorism
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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