ममता बनर्जी के पश्चिम बंगाल की राजनीति में धुरी मुस्लिम मतदाता रहे हैं। वर्तमान में केंद्रशासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर के बाद सबसे अधिक मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका पश्चिम बंगाल में ही है। असम में मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका पूर्व में भी इतनी ही महत्वपूर्ण था, मगर 2023 में असम में हुए परिसीमन के बाद राज्य के राजनीतिक स्थिति में काफी बदलाव देखा जा रहा है। असम में मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका कमजोर होने के बाद कांग्रेस पार्टी ने असम में मुस्लिमों से दूरी बनानी शुरू कर दी है। अब असम में मुस्लिम कांग्रेस पार्टी के प्राथमिकता सूची में नहीं रह गए हैं। 2024 लोकसभा चुनाव में बरपेटा संसदीय सीट पर हमेशा से मुस्लिम को उम्मीदवार बनाने वाले कांग्रेस पार्टी ने इस बार अपने मुस्लिम सांसद का टिकट कारकर दीप बयान को दिया था।
2011 के जनगणना के अनुसार, पश्चिम बंगाल में 27 प्रतिशत मुस्लिम जनसंख्या थी। अनुमानों के अनुसार, वर्तमान में राज्य में मुस्लिमों की आबादी 30 से अधिक और यहाँ तक की एक तिहाई के आंकड़े को भी छू लिया हो। 1977 से पूर्व राज्य में मुस्लिम मतदाता कांग्रेस पार्टी को बड़े पैमाने पर मतदान करते थे। कांग्रेस पार्टी के राज्य के आखिरी मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर राय मालदा से विधायक रहते हुए इस पद पर थे। मुस्लिम मतदाताओं ने 1977 से 2006 तक वाम दलों को और उसके बाद 2016 तक बड़े पैमाने पर ममता बनर्जी के तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया था। मगर 2019 के बाद लगातार दो लोकसभा और एक विधानसभा चुनावों में मुस्लिम मतदाताओं का रुझान तृणमूल कांग्रेस पार्टी के पक्ष में एकतरफा है। क्योंकि अब भाजपा इस राज्य में तृणमूल कांग्रेस पार्टी की मुख्य विरोधी है। अतएव कहा जा सकता है कि मुस्लिम मतदाताओं का पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी दल के साथ जुड़कर मतदान करने की लम्बी परम्परा है।
राज्य में सीटवार मुस्लिम मतदाता मुस्लिम जनसंख्या % सीट

पश्चिम बंगाल की 154 सीटों पर 20 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम मतदाता हैं
प्रतिशत के लिहाज से देखे तो पश्चिम बंगाल विधानसभा में 154 सीटों पर 20 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम मतदाता है। 43 सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या आधे से अधिक यानी 50 प्रतिशत से अधिक। इन सीटों पर भाजपा से सीधा मुकाबला होने की स्थिति में ये मतदाता तृणमूल कांग्रेस पार्टी के लिए एकतरफा मतदान करते है। 63 सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 40 प्रतिशत से अधिक है।
कांग्रेस सहित इन तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दलों का मुस्लिम तुष्टिकरण का लम्बा और सतत इतिहास रहा है। ये दल इस समुदाय का कल्याण करने या इनके शशक्तिकरण के बदले इनका तुष्टीकरण करके अपनी राजनीति की दुकान सजाते रहते हैं। कांग्रेस पार्टी के रकीबुल हुसैन ने 2024 के लोकसभा के चुनाव में असम के बहुब्री लोकसभा सीट से देश में सर्वाधिक 1012476 मतों से जीत दर्ज़ की थी। उन्होंने लगातार तीन बार के सांसद और आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के सर्वेसर्वा बदरुद्दीन अजमल को करारी शिकस्त दी थी।
रकीबुल हुसैन सांसद बनने से पूर्व असम विधानसभा में पार्टी के उपनेता थे। वे लगातार 2001 से पांच बार सामगुरी विधानसभा सीट से निर्वाचित हो रहे थे। 2011 के विधानसभा चुनाव में असम में दो बार के लोकतान्त्रिक प्रक्रिया से चुने गए मुख्यमंत्री प्रफ्फुल कुमार महंत को उन्होंने बड़े मतों के अंतर से हराया था। इसके बावजूद भी कांग्रेस पार्टी ने रकीबुल हुसैन का कद छोटा रखने के लिए उनको संसद में पार्टी का कोई भी पद जैसे नेता या उपनेता का नहीं नवाजा था। यह दिखाता है कि कांग्रेस पार्टी सहित तमाम ऐसे दल की नज़र किसी भी प्रकार से मुस्लिम मतदाताओं को भाजपा का भय दिखाकर और तुष्टीकरण करके अपने पाले में बनाये रखने का है।

















