पश्चिम बंगाल चुनाव-2026 : संदेशखाली का संदेश
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पश्चिम बंगाल चुनाव-2026 : संदेशखाली का संदेश

संदेशखाली में बड़ी तादाद में महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार का नंगा नाच इंसानियत को शर्मसार करने वाला था

Written byPanchjanyaPanchjanya
Apr 16, 2026, 08:10 am IST
inविश्लेषण, पश्चिम बंगाल

सरकारी आंकड़ों से परे पश्चिम बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक स्थिति कैसी है, इसका अंदाजा जिन चंद घटनाक्रमों से लगता है, उनमें एक है संदेशखाली। इसने यह सिद्ध कर दिया कि जब अपराधी को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त हो, तो ‘कानून का शासन’ केवल कागजों तक सीमित रह जाता है। यह प्रकरण केवल कुछ व्यक्तियों का अपराध नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी ‘संस्थानिक यौन दासता’ का वीभत्स उदाहरण था, जिसे सत्ता की ओट में वर्षों तक पाला-पोसा गया।

उत्तर 24 परगना जिले का संदेशखाली क्षेत्र सुंदरवन के मुहाने पर स्थित है। यहां की भौगोलिक जटिलता का लाभ उठाकर शेख शाहजहां नाम के तृणमूल कांग्रेस नेता ने अपना एक अभेद्य किला तैयार किया। जिला स्तर के इस नेता ने न केवल सियासी ताकत हासिल की, बल्कि पुलिस और प्रशासन में भी उसका अच्छा दबदबा था और इसी का इस्तेमाल उसने महिलाओं के व्यवस्थित दमन के लिए किया।

रोंगटे खड़े करने वाली गवाही

फरवरी 2024 में जब संदेशखाली की महिलाओं ने अपने हाथों में लाठियां और झाड़ू लेकर प्रदर्शन शुरू किया, तो सालों से दबा वह राज बाहर आ गया जिसने सभ्य समाज को शर्मसार कर दिया। कलकत्ता हाईकोर्ट और राष्ट्रीय महिला आयोग के समक्ष पीड़ितों ने जो बयान दिए, वे गहरे षड्यंत्र की ओर इशारा करते थे।
अदालत के रिकॉर्ड में दर्ज एक पीड़िता की गवाही इस प्रकार है:

“वे (शाहजहां के गुर्गे) शाम होते ही हमारे घरों में आते और जवान बहु-बेटियों को चुनते। हमें कहा जाता कि पार्टी ऑफिस में रात की मीटिंग है, चलो। यदि मना करते, तो वे हमारे पतियों को मारने या हमारी फसल में खारा पानी डालने की धमकी देते थे। वहां हमें कई-कई रातों तक बंधक बनाकर रखा जाता और बारी-बारी से हमारा शोषण किया जाता था। जब तक उनका मन नहीं भरता, वे हमें नहीं छोड़ते थे।”

एक अन्य पीड़िता ने कोर्ट को बताया:

“पुलिस के पास जाना व्यर्थ था। जब हम शिकायत करने जाते, तो दरोगा कहता था- ‘शाहजहां भाई’ से बात कर लो, मामला सुलझ जाएगा। पुलिस ने हमें सुरक्षा देने के बजाय आरोपियों को खबर कर दी, जिसके बाद हमारे घरों पर हमले हुए। हमें कहा गया कि अगर जुबान खोली, तो नदी में फेंक दिया जाएगा।”
ये गवाहियां स्पष्ट करती हैं कि बलात्कार यहां केवल एक अपराध नहीं, बल्कि ‘राजनीतिक संरक्षण’ में चल रहा एक सिंडिकेट बन चुका था।

कोर्ट का सख्त रुख

इन आपबीतियों को सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश टी.एस. शिवगणनम की अध्यक्षता में कलकत्ता हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जो कहा, वह इस कांड की गंभीरता को स्पष्ट करता है। अदालत ने साफ कहा कि नागरिकों की सुरक्षा में विफलता के लिए सत्ताधारी दल और प्रशासन ही उत्तरदायी है:
“संदेशखाली में जो कुछ भी हुआ है, वह बेहद शर्मनाक है। यदि नागरिकों की सुरक्षा खतरे में है, तो इसकी 100 प्रतिशत जिम्मेदारी सत्तारूढ़ दल की है। पूरे जिला प्रशासन और शासन को इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए।”

वकीलों द्वारा पेश किए गए सैकड़ों शपथपत्रों को देखकर अदालत ने इस बात पर हैरानी जताई कि एक तो इन लोगों की जमीनें हड़प ली गईं और इन्हें सिविल सूट फाइल करने को कहा गया? “ये गरीब लोग सिविल सूट कैसे लड़ेंगे? यदि वे विरोध करते हैं, तो उन्हें प्रताड़ित किया जाता है और उनके साथ बलात्कार किया जाता है। यहां तक कि पुलिस भी इसमें शामिल है।”

जब राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने एनसीआरबी के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि उनकी सरकार महिला सुरक्षा के प्रति संवेदनशील है तो खंडपीठ ने सख्त लहजे में कहाः
“यदि इन आरोपों (यौन उत्पीड़न और भूमि हड़पने) में 1 प्रतिशत भी सच्चाई है, तो यह अत्यधिक शर्मनाक है। पश्चिम बंगाल खुद को महिलाओं के लिए सुरक्षित राज्य बताने वाले एनसीआरबी के आंकड़ों का गर्व करता है, लेकिन यदि एक भी हलफनामा सही साबित होता है, तो वह सांख्यिकी गिर जाएगी, जनता की राय गिर जाएगी और राज्य की छवि धूमिल हो जाएगी।”

जब शाहजहां के वकील ने दलीलें पेश करनी चाहीं, तो कोर्ट ने दो टूक कहाः
“इस अदालत की शेख शाहजहां के प्रति कोई सहानुभूति नहीं है। आप एक ऐसे आरोपी की ओर से पेश हो रहे हैं जो जांच के घेरे में है। पहले अपने आसपास के साये को साफ करें, फिर अपनी शिकायत दर्ज करें।”

षड्यंत्र का ताना-बना

संदेशखाली का यह ‘मॉडल’ तीन स्तंभों पर टिका था: यौन शोषण, भूमि अधिग्रहण और चुनावी हेरफेर।
शाहजहां और उसके सहयोगियों (शिबू हाजरा और उत्तम सरदार) ने गरीबों की उपजाऊ जमीन पर अवैध कब्जा किया। उन खेतों में समुद्र का खारा पानी भर दिया गया ताकि वे कृषि के अयोग्य हो जाएं और वहां ‘भेरी’ (मछली पालन) शुरू की जा सके। यह आर्थिक रूप से ग्रामीणों को पंगु बनाने का षड्यंत्र था ताकि वे पूरी तरह शाहजहां पर निर्भर हो जाएं।

सीबीआई ने अपनी जांच में पाया कि संदेशखाली में समानांतर अदालतें चलती थीं, जहां शाहजहां ही जज होता और वही जल्लाद। लोगों में उसका ऐसा खौफ था कि एक बार शाहजहां जो फैसला कर देता, उसकी कोई अनदेखी नहीं कर सकता था। सीबीआई ने पाया कि महिलाओं के शोषण के लिए बाकायदा एक ‘नेटवर्क’ काम करता था, जो ह सुनिश्चित करता था कि कोई भी महिला गांव से बाहर जाकर शिकायत न करे।

संदेशखाली का पूरा प्रकरण बताता है कि वहां बलात्कार ‘आतंक’ स्थापित करने का एक राजनीतिक हथियार था और इसकी शिकार महिलाओं को दबाने में पूरा तंत्र शामिल था।

केस की ताजा स्थितिः शेख शाहजहां अभी जेल में है। 19 मार्च 2026 को कलकत्ता हाईकोर्ट में उसकी जमानत याचिका पर विचार हुआ। न्यायमूर्ति शुभ्रा घोष की एकल पीठ ने जमानत देने से मना करते हुए कहा कि वह इलाके का “अत्यधिक प्रभावशाली और खूंखार व्यक्ति” है। अदालत ने अभियोजन पक्ष की इस दलील को माना कि यदि उसे छोड़ा गया, तो वह गवाहों को डरा सकता है और सबूतों को मिटा सकता है।

सीबीआई ने कोर्ट में यह भी दलील दी कि जेल के अंदर रहने के बावजूद शाहजहां के प्रभाव के कारण गवाह डरे हुए हैं और हाल ही में गवाहों को डराने-धमकाने की कुछ घटनाएं सामने आई भी हैं। मामले की सुनवाई कलकत्ता हाईकोर्ट और बशीरहाट की विशेष अदालत में चल रही है।

सीबीआई ने कोर्ट को सूचित किया है कि वह बहुत जल्द एक ‘पूरक चार्जशीट’ दाखिल करने वाली है, जिसमें यौन उत्पीड़न और विदेशी हथियारों की बरामदगी से जुड़े नए तथ्यों को शामिल किया गया है। इसके बाद सीबीआई द्वारा पेश किए गए 88 गवाहों के बयानों पर जिरह शुरू होगी।

Topics: उत्तर 24 परगनाशेख शाहजहांपाञ्चजन्य विशेषसंदेशखाली प्रकरणपश्चिम बंगाल संदेशखालीसंदेशखाली आंदोलनबंगाल चुनाव 2026राजनीतिक संरक्षणबंगाल चुनावी मुद्दे
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