नई दिल्ली । टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के नासिक कार्यालय से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसने कॉर्पोरेट कार्यस्थल की सुरक्षा और नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक महिला कर्मचारी की शिकायत के आधार पर कई सहकर्मियों के खिलाफ उत्पीड़न, अनुचित व्यवहार और धार्मिक टिप्पणियों के आरोप लगे हैं।
बता दें कि नासिक TCS केस के खुलासे के बाद वर्कप्लेस उत्पीड़न और कॉर्पोरेट जिहाद जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में है।
क्या है पूरा मामला..?
बता दें कि एक पीड़िता की शिकायत पर 2 अप्रैल 2026 को मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में FIR संख्या 168/2026 में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। शिकायत में कई मजहबी सहकर्मियों के नाम शामिल हैं, जिन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जिसके बाद से ही इस मामले को महिला सुरक्षा कानून और BNS केस के तहत जांचा जा रहा है।
कॉर्पोरेट जिहाद: जिहादियों का हिंदुओं, इंसानियत और संविधान को नुकसान पहुंचाने का एक और तरीका
इन पर लगा है आरोप
FIR में मुख्य रूप से शाहरुख शेख, रजा मेमन, आसिफ अंसारी, तौसीफ अत्तार, शफी शेख को नामजद किया गया है।
पीड़ित की आपबीती : ट्रेनिंग से लेकर डेस्क तक हुआ उत्पीड़न
बता दें कि पीड़ित महिला (श्रुति – नाम परिवर्तित) के अनुसार, उन्होंने जून 2025 में कंपनी जॉइन की थी। यह प्रताड़ना उनकी जॉइनिंग के कुछ समय बाद ही शुरू हो गई थी। शुरुआती ट्रेनिंग के दौरान ही कुछ मजहबी सहकर्मी उनके निजी जीवन को लेकर बार-बार सवाल पूछने लगे। धीरे-धीरे ये बातचीत असहज और निजी सीमा से बाहर होती चली गई। पीड़िता ने अपनी शिकायत में कुछ बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए हैं-
शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के आरोप
इसके बाद पीड़िता ने आरोप लगाया कि बाद के महीनों में कुछ सहकर्मियों ने उनके साथ अनुचित शारीरिक संपर्क बनाने की कोशिश की और अश्लील टिप्पणियां कीं। उन्होंने बताया कि कई बार उन्हें बिना वजह छूने, पास बैठने और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ा।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपितों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्क करने की कोशिश की और लगातार मैसेज भेजे। पीड़िता के अनुसार, उन्होंने आरोपितों की इन हरकतों को नजरअंदाज भी किया, लेकिन आरोपितों द्वारा यह व्यवहार जारी रहा।
निजी जीवन में दखल और फब्तियां : महिला की शिकायत के अनुसार ट्रेनिंग के दौरान ही आरोपी रजा मेमन और शाहरुख महिला के निजी जीवन, उनकी शादी और पति की अनुपस्थिति को लेकर भद्दे सवाल पूछते थे। इसके बाद महिला ने बताया कि उन्हें ऑफिस में ‘प्लेयर’ कहकर बुलाया जाने लगा और उनके चरित्र पर सवाल उठाए गए।
शारीरिक उत्पीड़न और अश्लील हरकतें : पीड़ित का आरोप है कि आरोपी आसिफ अंसारी अक्सर उनके करीब बैठने की कोशिश करता और बिना अनुमति उनके शरीर को छूता था। शिकायत के अनुसार, आसिफ ने कई बार महिला को गलत तरीके से छूने की कोशिश की और उनके पहनावे पर अश्लील टिप्पणियां कीं।
नासिक TCS में यौन उत्पीड़न और कन्वर्जन : सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा- मामले की होगी गहन जांच
धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना : पीड़ित महिला ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों ने बार-बार उनकी धार्मिक आस्था का अपमान किया। शिकायत के मुताबिक, आसिफ अंसारी ने सनातन धर्म के आराध्य हिंदू देवी-देवताओं के बारे में अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और पहनावे (बुर्का न पहनने) को लेकर भी विवादित बयान दिए।
हिन्दू त्यौहारों पर निशाना बनाना : पीड़ित महिला ने बताया वह जब भी दिवाली, मकर संक्रांति और गुड़ी पड़वा जैसे भारतीय और सनातनी त्यौहारों पर पारंपरिक परिधान (साड़ी) पहनकर ऑफिस आती थी, तब आरोपी रजा मेमन और तौसीफ अत्तार द्वारा पल्लू खींचने और कपड़ों पर भद्दी टिप्पणी करने जैसी हरकतें की जाती थीं।
पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों ने उनके धार्मिक विश्वासों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं, जिससे उनकी भावनाएं आहत हुईं।
‘ये कॉर्पोरेट जिहाद है’, नासिक की आईटी कंपनी में कन्वर्जन पर बोले नितेश राणे
कार्रवाई : कई FIR और गिरफ्तारियां
बरहाल इस मामले के खुलासे के बाद से कई और भी लड़कियों के उत्पीडन के खुलासे हुए इस मामले में 26 मार्च से 3 अप्रैल के बीच इसी तरह के पैटर्न वाली लगभग 9 FIR दर्ज की जा चुकी हैं। हालाँकि पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है, जबकि कुछ अभी फरार बताए जा रहे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, जो पूरे घटनाक्रम की गहन जांच कर रहा है।
किस-किस की हुई गिरफ्तारियां
बता दें कि पुलिस ने अब तक इस पूरे प्रकरण में शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन, आसिफ अंसारी, तौसीफ अत्तार, शफी शेख और अश्विनी चनानी सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं एक महिला आरोपी निदा खान अभी भी फ़रार हैं।
TCS उत्पीड़न में एक ही पैटर्न, शुरू हुई SIT जांच
वहीं इस मजहबी मंसूबे के तहत एक पैटर्न से हुए इन मामलों की गंभीरता और आरोपियों के ‘ऑर्गेनाइज्ड’ तरीके को देखते हुए प्रशासन ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। फ़िलहाल पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या यह किसी सोची-समझी साजिश का हिस्सा है।
क्योंकि जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें एक पैटर्न की संभावना नजर आ रही है। इसी वजह से इसे व्यापक स्तर पर जांचा जा रहा है ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके। फिलहाल पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और फरार आरोपियों की तलाश जारी है।

















