न मां, न माटी, न मानुष “मां, माटी, मानुष” ममता बनर्जी की राजनीतिक विचारधारा का सार-वाक्य है, जिसे उन्होंने 2011 के चुनावी अभियान में वाममोर्चा की ‘वर्ग संघर्ष’ की राजनीति के विकल्प के रूप में पेश किया था। लेकिन यह समावेशी नारा व्यवहार में इन्हीं वर्गों- मां यानी मातृशक्ति, माटी यानी बंगाल की संस्कृति और मानुष यानी आम लोगों के लिए दुःस्वप्न साबित हुआ।
















