अपने सियासी सफर में ममता बनर्जी मुस्लिमों के प्रति विवादास्पद बयानों के लिए चर्चित रही हैं।
2019 के लोकसभा चुनाव परिणामों के बाद 25 मई को कोलकाता में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता ने कहाः “जे गोरू दूध देय, तार लाथी खाओ भालो” (जो गाय दूध देती है, उसकी लात खाना भी अच्छा होता है)।
उन्होंने कहा था कि चूंकि मुस्लिम समुदाय उन्हें वोट देता है, इसलिए वह उनके लिए इफ्तार पार्टियों में 100 बार जाएंगी और उनके नखरे (लात) भी सहेंगी।
चुनाव आयोग द्वारा चलाई जा रही एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ इसी साल मार्च में कोलकाता में धरने पर बैठी ममता ने कहाः “अगर हम (तृणमूल कांग्रेस) नहीं रहे… तो एक सेकंड में एकजुट होने वाला एक समुदाय आपको घेरकर एक सेकंड में पूरी तरह खत्म कर देगा”
स्पष्ट है, एक ओर तो ममता अपने मुस्लिम वोट बैंक का हौसला बढ़ा रही थीं, वहीं, हिन्दुओं को धमका भी रही थीं कि उनकी पार्टी ही है जिसने उन्हें मुस्लिमों से बचा रखा है।
2021 के अप्रैल में हुगली के तारकेश्वर में रैली के दौरान ममता ने कहाः “मैं अल्पसंख्यक भाई-बहनों से हाथ जोड़कर विनती करती हूं कि अपने वोटों को शैतान (भाजपा) की मदद करने के लिए न बंटने दें।” इस बयान के लिए चुनाव आयोग ने उन्हें नोटिस भी जारी किया था।
















