शारदा चिटफंड घोटाला केवल पैसों का हेरफेर नहीं था, बल्कि यह लाखों परिवारों की तबाही की कहानी थी। सरकारी रिकॉर्ड और पुलिस डायरी में ऐसे रोंगटे खड़े कर देने वाले उदाहरण भरे हुए हैं। ऐसी ही एक दर्दनाक कहानी है स्वपन कुमार बिस्वास की।
36 साल के स्वप्न कुमार बिस्वास पुरुलिया के बलरामपुर के रहने वाले थे। उन्होंने शारदा समूह के वादों पर भरोसा किया और न केवल अपनी पूरी जमा-पूंजी (लगभग 4 लाख रुपये) इसमें निवेश की, बल्कि गांव के गरीब लोगों से भी पैसे कंपनी में जमा कराए। अप्रैल 2013 में जब शारदा समूह के मालिक सुदीप्त सेन के फरार होने की खबर आई, तो स्वप्न के पैरों तले जमीन खिसक गई।
उन पर दोहरी मार पड़ी। एक तो उनकी अपनी जीवन भर की कमाई डूब चुकी थी। दूसरी, उनके भरोसे पैसे लगाने वाले गांव के लोग उनके घर के चक्कर काटने लगे।
अत्यधिक तनाव और “धोखेबाज” कहलाने के डर से स्वप्न टूट गए। 27 अप्रैल 2013 को उन्होंने छत से लटककर आत्महत्या कर ली। उनके परिजनों के अनुसार वह बार-बार एक ही बात कहते थे- “मैं उन्हें क्या जवाब दूंगा जिनके पैसे मैंने डुबो दिए?















