ऑपरेशन हिमसेतु: सिक्किम में सेना ने 1400 से अधिक लोगों को बचाकर पेश की मिसाल
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ऑपरेशन हिमसेतु: सिक्किम में सेना ने 1400 से अधिक लोगों को बचाकर पेश की मिसाल

हाल ही में खराब मौसम के कारण उत्तरी सिक्किम का संपर्क बाकी दुनिया से कट गया था। रास्ते बंद थे, बिजली गुल थी और तापमान लगातार गिर रहा था। ऐसी स्थिति में पूर्वी कमान के मार्गदर्शन में त्रिशक्ति कोर ने मोर्चा संभाला।

Written byजय प्रकाश गुप्ताजय प्रकाश गुप्ता
Apr 9, 2026, 07:06 pm IST
inभारत, सिक्किम
ऑपरेशन हिमसेतु

ऑपरेशन हिमसेतु

सिक्किम की बर्फीली पहाड़ियों और ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर जब प्रकृति का कहर टूटा, तो भारतीय सेना एक बार फिर देवदूत बनकर सामने आई। यहां भारतीय सेना की त्रिशक्ति कोर ने ‘ऑपरेशन हिमसेतु’ के जरिए मानवता और साहस की एक नई इबारत लिखी है। भारी बारिश और विनाशकारी भूस्खलन के बीच फंसे 1,400 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना किसी चमत्कार से कम नहीं था।

क्या है ऑपरेशन हिमसेतु?

‘ऑपरेशन हिमसेतु’ भारतीय सेना द्वारा सिक्किम के दुर्गम इलाकों में चलाया गया एक त्वरित बचाव अभियान (रेस्क्यू ऑपरेशन) है। हाल ही में खराब मौसम के कारण उत्तरी सिक्किम का संपर्क बाकी दुनिया से कट गया था। रास्ते बंद थे, बिजली गुल थी और तापमान लगातार गिर रहा था। ऐसी स्थिति में पूर्वी कमान के मार्गदर्शन में त्रिशक्ति कोर ने मोर्चा संभाला।

सेना के जवानों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए महज 48 घंटों के भीतर 1,321 पर्यटकों को सुरक्षित निकाला और 84 स्थानीय निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।यह ऑपरेशन इसलिए भी विशेष रहा क्योंकि इतनी विकट परिस्थितियों के बावजूद पूरे मिशन के दौरान किसी भी अप्रिय घटना या जान-माल के नुकसान की खबर नहीं आई।

सेना के अनुसार, यह पूरा मिशन नागरिक प्रशासन और सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के साथ बेहतरीन तालमेल का परिणाम था।

सेना ने भोजन और चिकित्सा सहायता भी प्रदान की

जब भूस्खलन के कारण रास्ते बंद हो गए और सड़कें बर्फ से पट गईं, तो प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना था। तब बीआरओ (बीआरओ) की मदद से सेना ने तुरंत एक अस्थायी फुटब्रिज यानी पुल तैयार किया। इसी पुल के जरिए उन इलाकों से लोगों को निकाला गया जहां वाहन नहीं जा सकते थे।

फंसे हुए पर्यटकों के लिए केवल बचाव ही काफी नहीं था। अत्यधिक ठंड और ऑक्सीजन की कमी वाले इन इलाकों में सेना ने भोजन, गर्म कपड़े और चिकित्सा सहायता भी प्रदान की। पूर्वी कमान के मार्गदर्शन में त्रिशक्ति कोर ने यह साबित कर दिया कि वे न केवल सीमाओं की रक्षा करते हैं, बल्कि आपदा के समय देश के नागरिकों के लिए सबसे बड़े रक्षक भी हैं।

उत्तर सिक्किम में बार-बार होती आपदाएं

सिक्किम का उत्तरी हिस्सा अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर है, लेकिन मानसून और भारी बर्फबारी के दौरान यहां भूस्खलन (लैंडस्लाइड) एक बड़ी समस्या बन जाता है। 25 मार्च को भी ऐसी ही एक घटना घटी थी जब लाचेन और चुंगथांग के बीच के रास्ते बंद हो गए थे।

पूर्वी कमान के उपायुक्त (डीसी) अनंत जैन के अनुसार, भारी बारिश के कारण गंगटोक से लाचेन और चुंगथांग से लाचेन को जोड़ने वाले मुख्य मार्गों पर कई जगह भूस्खलन हुआ। इसके चलते लगभग 150 से 200 पर्यटक चुंगथांग में फंस गए थे। पर्यटकों के लिए यह स्थिति काफी डरावनी थी क्योंकि पहाड़ों में संचार और रसद की आपूर्ति अचानक कट जाती है।

‘ऑपरेशन हिमसेतु’ केवल एक बचाव अभियान नहीं था, बल्कि यह भारतीय सेना और नागरिक प्रशासन के बीच के विश्वास का प्रतीक था। सिक्किम जैसे दुर्गम इलाकों में जहां प्रकृति पल-पल अपना रंग बदलती है, वहां हमारी सेना के जवान एक ढाल बनकर खड़े रहते हैं। इस ऑपरेशन के जरिए एक बार फिर भारतीय सेना ने दुनिया के सामने देश की आपदा प्रबंधन क्षमताओं का लोहा भी मनवाया। हमें गर्व होना चाहिए कि हमारी सीमाओं पर ऐसे रक्षक तैनात हैं जो विषम परिस्थितियों में भी देश और उसके नागरिकों की रक्षा करने के लिए एक पैर पर खड़े रहते हैं।

 

Topics: landslidesOperation HimSetuTrishakti CorpsSikkim RescueEastern CommandIndian ArmyBROTourist Safety
जय प्रकाश गुप्ता
जय प्रकाश गुप्ता
लेखक करीब एक दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। अभी स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर गहरी पकड़ है। [Read more]
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