वाराणसी। काशी में नाव पर बैठकर इफ्तार पार्टी करने और चिकन बिरयानी खाकर झूठी हड्डियां पवित्र गंगा नदी में फेंकने के मामले में गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय से फिर झटका लगा है। बुधवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश काेर्ट ने सभी 14 की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश आलोक कुमार के न्यायालय संख्या-6 ने सभी 14 आरोपितों की ओर से दाखिल जमानत अर्जी पर सुनवाई की। बहुचर्चित मामले में न्यायालय ने उभय पक्षाें को सुनने के बाद प्रकरण के तथ्य एवं परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए जमानत का आधार पर्याप्त न होने पर जमानत अर्जी निरस्त कर दिया।
सुनवाई के दाैरान अभियोजन की ओर से एडीसी संतोष तिवारी ने प्रभावी ढंग से बहस की। उनके साथ वादी पक्ष के अधिवक्ताओं- शशांक शेखर त्रिपाठी, राजकुमार तिवारी, राजेश त्रिवेदी, नित्यानंद राय एवं आशुतोष शुक्ला ने भी न्यायालय के समक्ष विस्तृत तर्क रखे।
जान-बूझकर किया गया कृत्य
अभियोजन ने अपने तर्क में कहा कि यह कृत्य जानबूझकर किया गया, जिससे एक विशेष समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचे। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया, जिससे व्यापक जनाक्रोश उत्पन्न हुआ। गंगा नदी हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र मानी जाती है। यह केवल व्यक्तिगत कृत्य नहीं, बल्कि सामाजिक वैमनस्य फैलाने का प्रयास है।
न्यायालय में बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने कहा कि घटना को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। आराेपित निर्दोष हैं और उन्हें झूठा फंसाया गया है।
नाविक को जान से मारने की दी थी धमकी
न्यायालय के इस फैसले से गंगा में नाव पर चिकन बिरयानी की इफ्तार पार्टी करने, अवशेष पवित्र गंगा में फेंकने और नाविक को जान से मारने की धमकी देने के मामले में जेल में बंद 14 आरोपितों की मुश्किलें बढ़ गई है। धमकी देने के आराेप में वादी पक्ष के अधिवक्ता की ओर से सभी के खिलाफ नया मुकदमा भी दर्ज हुआ है।
इन आरोपितों की जमानत अर्जी खारिज
इससे पहले एसीजेएम नवम अमित यादव के न्यायालय ने सभी आरोपिताें आजाद, आमिर, दानिश, मो. अहमद, नेहाल, महफूज, अनस, अव्वल, तहसीम, मो. अहमद, नूर इस्माइल, तौसीफ, फैजान और समीर—की जमानत अर्जी को अपराध की गंभीरता देखते हुए खारिज कर दिया था।
यह है मामला
उल्लेखनीय है कि रमजान में गंगा के बीचो-बीच एक बड़े नाव पर इफ्तार पार्टी का वीडियो वायरल हुआ था। वादी भाजयुमो के वाराणसी महानगर अध्यक्ष रजत जायसवाल ने इसका वीडियो पुलिस को सौंप कर आरोप लगाया था कि गंगा नदी की पवित्र धारा में नाव पर बैठकर इफ्तार पार्टी आयोजित कर चिकन बिरयानी का सेवन किया गया और उसका अवशेष गंगा में फेंका गया। यह कृत्य धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला है।

















