बस्तर: नक्सलवाद के खात्मे के साथ IED मुक्त ग्राम बनाने का चलेगा अभियान
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बस्तर: नक्सलवाद के खात्मे के साथ IED मुक्त ग्राम बनाने का चलेगा अभियान

वर्ष 2010 आईईडी विस्फोट की घटना के इतिहास का सबसे काला वर्ष रहा, जब 101 जवान बलिदान हुए थे

Written byएजेंसीएजेंसी
Mar 29, 2026, 09:20 pm IST
inछत्तीसगढ़
आईईडी को निष्क्रिय करते सुरक्षाकर्मी

आईईडी को निष्क्रिय करते सुरक्षाकर्मी

जगदलपुर। नक्सलवाद के पूर्ण सफाए के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा तय की गई समय सीमा 31 मार्च बेहद करीब पहुंच गई है। पिछले दो वर्षों में सुरक्षाबलों ने नक्सलियों को उनके सबसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाकों में कैंप स्थापित कर लगभग पूरी तरह से खदेड़ दिया है, लेकिन जमीन के नीचे लगाये गये आईईडी सुरक्षाबलों और आम नागरिकों के लिए आज भी खतरा बने हुए हैं।

आईईडी विस्फोट की घटनाएं

बस्तर के आंकड़ों पर गौर करें तो साल 2001 से 2026 तक आइईडी विस्फोट की 1,277 घटनाएं दर्ज की गईं, जिसमें 443 जवान बलिदान हुए एवं 915 जवान घायल हुए। वहीं 158 आम नागरिकों को भी अपनी चपेट में लिया । वर्ष 2010 आईईडी विस्फोट की घटना के इतिहास का सबसे काला वर्ष रहा, जब 101 जवान बलिदान हुए थे।

असली जीत जमीन की सुरक्षा

प्रदेश के उपमुख्यमंत्री व गृहमंत्री विजय शर्मा का कहना है कि असली जीत केवल बंदूकें शांत करने में नहीं बल्कि जमीन को सुरक्षित करने में है। उन्होंने घोषणा की कि जिस तरह गांवों को ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) बनाया गया था, उसी तर्ज पर अब बस्तर के हर संदेहास्पद रास्ते और पगडंडी को आइईडी मुक्त ग्राम घोषित करने का अभियान चलाया जाएगा।

बस्तर आईजी सुंदरराज पी. ने कहा कि आईईडी हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती रहा है। आईईडी की वजह से बड़ी बड़ी घटना में सुरक्षाबलों का बलिदान हुआ एवं निर्दाेष आम नागरिकों का भी जान का खतरा बना रहा। आईईडी को खत्म करने का अभियान लगातार जारी रहेगा। जंगलों में छिपे आईईडी को हटाने में समय लगेगा, इस चुनौती से निपटने के लिए लगातार हमारी टीम काम कर रही है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली कैडर से भी जो जानकारी मिल रही है, उसके इनपुट और बाकी इनपुट पर भी काम किया जा रहा है। इस चुनाैती का सामना करने के लिए उपलब्ध टेक्नोलॉजी का उपयाेग कर लगातार आईईडी काे निकालने एवं निष्क्रिय करने का काम किया जा रहा है।

ये भी पढ़ें – 31 मार्च 2026 : खत्म हो जाएगा नक्सलवाद! जानिए ‘लाल गलियारे’ के अंत की कहानी 

आईईडी मुक्त ग्राम बनाना लक्ष्य

उन्हाेंने बताया कि आईईडी मुक्त ग्राम बनाने के लिए एक लक्ष्य के साथ काम किया जा रहा है, इसी कड़ी में वर्ष 2025 में सर्वाधिक 900 आईईडी बरामद किया गया है, इससे पहले प्रतिवर्ष 200 से 250 आईईडी बरामद किया जाता रहा है। उन्हाेंने बताया कि बदली हुई रणनीति के तहत सुरक्षाबल तकनीक और खोजी कुत्तों के जरिए खोजो और निष्क्रिय करो के अभियान पर काम कर रही है। उन्हाेंने बताया कि वर्ष 2026 में अब तक आइईडी से एक भी घटना नहीं हुई है, जो सुरक्षाबलों के रणनीति की सफलता को दर्शाता है।

ये भी पढ़ें – छत्तीसगढ़ में 200 नक्सली बने किसान! कृषि आधारित प्रशिक्षण लिया

Topics: छत्तीसगढ़ समाचारनक्सलीआईईडीनक्सलबस्तरविजय शर्मा
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