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संगीत वास्तव में क्या है?

संगीत साधना की जब अनंत यात्रा चलती हैं तब लय और स्वर की धुन ईश्वर की एक साकार प्रतिमा बन जाती है। संगीत शान्त झील सी आराधना है जो मन के प्रवाह से अपनी भावनाओं को स्वरबद्ध कर नाद उत्पन्न करती है।

Written byइली मिश्राइली मिश्रा
Mar 23, 2026, 01:07 pm IST
in कला-साहित्य
संगीत क्या है

संगीत क्या है

हृदय का स्पर्श या देव पूजा की आराधना, जो साधना से ही पूर्ण हो पाती है। स्वरों की अथाह वादियों में गूंजते रहे हैं नाद, ध्वनि में बंधकर। भारतीय संगीत 4,000 साल से अधिक पुरानी समृद्ध परंपरा है जो वेदों, विशेषकर सामवेद से शुरू होकर मंदिरों में आध्यात्मिक और नियमबद्ध रही है।

आज हिन्दुस्तानी (उत्तर भारतीय) संगीत और कर्नाटक (दक्षिण भारतीय) संगीत शैलियों में ये परंपरा विकसित हुई है। इसमें गायन वादन और नृत्य का अनूठा संगम है, जो गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से मौखिक रूप से हस्तांतरित होता रहा है।

संगीत का मूल आधार

संगीत का मूल आधार “स्वर” और “लय” है। संगीत के तत्वों को तीन सामान्य श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है- लय सामंजस्य और धुन। संगीत में सूर्य की तेज किरणें हैं तो शरद ऋतु सी शीतलता, महकते वसंत की खुशबू तो कहीं वर्षाजल की ध्वनि से अभिभूत।

भारतीय संगीत परंपरा के प्रमुख पहलू-

मूल स्रोत और विकास

प्राचीन काल में संगीत को मार्गी अर्थात आध्यात्मिक, नियमबद्ध और देशी अर्थात लोक प्रचलित कहा जाता था। संगीत के कई ग्रंथ हैं परन्तु मुख्य रूप से भरत मुनि का “नाट्यशास्त्र” और शारंगदेव का “संगीता-रत्नाकर” इसके आधारभूत ग्रंथ हैं।

भातखंडे जी : शास्त्रीय संगीत के आधुनिक सूत्रधार

संगीत के पुजारी जिनकी सांसें संगीत की समाधि में रहीं, संगीत और दिल का अद्भुत संगम। संगीत उनके दिल की भाषा थी वो थे प्रसिद्ध संगीतज्ञ विष्णु नारायण भातखंडे। उन्होंने हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत पद्धति की “क्रमिक पुस्तक मालिका” निकाली।

यह हिन्दी और मराठी में लिखित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आधारभूत श्रृंखला है जो भारतीय शास्त्रीय संगीत के रागों और उनके वर्गीकरण को सरल भाषा में प्रस्तुत करती है। संगीत के छात्र छात्राओं को इस पुस्तक से रागों के शास्त्रीय नियमों और थाट-राग पद्धति का विस्तार से वर्णन मिलता है। इन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत को सुव्यवस्थित तरीके से समझाया है। यह पुस्तक श्रृंखला अपनी सरल भाषा और स्वर लिपि प्रणाली के लिए विशेष महत्वपूर्ण है। उन्होंने भातखंडे संगीत शास्त्र और कई अन्य महत्वपूर्ण ग्रंथ भी लिखे हैं। भारतीय शास्त्रीय संगीत में बेहद प्रमुख योगदान है-पुस्तक में प्रयुक्त स्वर लिपि को जानना।

तनाव भरे जीवन में सुकून देता है संगीत

मानसिक तकलीफ़ को संगीत सुकून देता है, स्वयं को ताकतवर बनाता है, कभी बिखरने नहीं देता है बल्कि मुस्कान और खुशियों से बना हुआ ये भारतीय शास्त्रीय संगीत स्वर और लय से जुड़ना सिखाता है। संगीत में रिदम-लय, ताल, आवर्तन या गति का नियमित पैटर्न होता है। संगीत जीवन के उतार-चढ़ाव, रिश्तों की गहराई में भी उम्मीद की किरण जगाता है।

शान्त झील सी आराधना है संगीत

मनुष्य की चेतना सीधे निराकार को नहीं पकड़ पाती। संगीत साधना की जब अनंत यात्रा चलती हैं तब लय और स्वर की धुन ईश्वर की एक साकार प्रतिमा बन जाती है। संगीत शान्त झील सी आराधना है जो मन के प्रवाह से अपनी भावनाओं को स्वरबद्ध कर नाद उत्पन्न करती है। जो मन को भटकने से रोकती है। जैसे सूर्य की किरणें पलकों पर आकर बैठ जातीं हैं उसी तरह संगीत के उच्चारण ईश्वर मंत्र बन, भावों की समाधि दर्पण से मुख की अनुभूतियां महकाने लगती हैं।

संगीत में स्वर साधना

संगीत में भावना का केन्द्र स्वर साधना है। जो मन को संगीत ध्यान में स्थिर रखता है। संगीत केवल कानों से नहीं सीधे हृदय से सुना जाता है। इससे तनाव कम होता है। सकारात्मक भाव जागृत होते हैं। वैज्ञानिक शोध मानते हैं कि मधुर संगीत गाने या सुनने से हृदय की गति स्थिर रहती है और रक्तचाप भी संतुलित रहता है। संगीत हृदय की वह भाषा है जो बिना शब्दों के भी सब कह देता है। मेरे भाषा- मार्ग पर शब्द स्वर लय और धुन हैं, जिन्हें अपने दिल की वीथिका में “संगीत” का संसार बना रखा। ये संगीत कला हमेशा ही सकारात्मक ऊर्जा और शक्ति देती है।

हर प्रहर के राग बोलते हैं, कहते हैं-

प्रातः कालीन राग से शान्ति मिलती है, दोपहर के राग से स्थिरता आती है और रात्रि के राग अन्तर्मन को छू जाते हैं। भागती दुनिया में कितनी उलझनें हैं जो इन्हें सुलझाये वही सच्चा राग है। ताल का अनुशासन स्वर की संवेदना और रियाज़ में सफलता का रास्ता छुपा है, जो ठहराव सिखाये वहीं संगीत है। संगीत केवल कला नहीं आत्मा की तपस्या है।

 

Topics: राग और प्रहरभारतीय शास्त्रीय संगीतगुरु-शिष्य परंपरा‘नाट्यशास्त्रपाञ्चजन्य विशेषविष्णु नारायण भातखंडेसामवेद
इली मिश्रा
इली मिश्रा
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