डॉ. हेडगेवार जयंती : राष्ट्रीय चेतना के वाहक
October 2, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम संघ @100 संघ को जानें

डॉ. हेडगेवार जयंती : राष्ट्रीय चेतना के वाहक

डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की जयंती केवल एक महान व्यक्तित्व का स्मरण नहीं, बल्कि राष्ट्र चेतना के उस बीज को याद करने का अवसर है, जिसने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे विशाल संगठन का निर्माण किया।

Written byPanchjanyaPanchjanya
Mar 21, 2026, 09:53 am IST
inसंघ को जानें, संघ @100

डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की जयंती केवल एक महान व्यक्तित्व का स्मरण नहीं, बल्कि राष्ट्र चेतना के उस बीज को याद करने का अवसर है, जिसने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे विशाल संगठन का निर्माण किया। डॉ. हेडगेवार ने अपने जीवन को राष्ट्र सेवा, अनुशासन और संगठन निर्माण के लिए समर्पित किया। उनका विश्वास था कि संगठित समाज ही सशक्त राष्ट्र का आधार बन सकता है। इसी विचार को मूर्त रूप देते हुए उन्होंने संघ की स्थापना की, जो आज सेवा, संस्कार और समर्पण का प्रतीक बनकर समाज जीवन के विविध क्षेत्रों में सक्रिय होकर निरंतर राष्ट्र निर्माण की दिशा में कार्य कर रहा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का जन्म 1 अप्रैल, 1889 को नागपुर में वर्ष प्रतिपदा के दिन हुआ था। वर्ष प्रतिपदा को महाराष्ट्र में गुड़ीपड़वा के नाम से जाना जाता है। यह दिन हिंदू मन, हृदय और विवेक को भारत के इतिहास के घटनाचक्र, राष्ट्र की अस्मिता, सांस्कृतिक परंपराओं एवं वीर तथा वैभवशाली पूर्वजों की विरासत का यशस्वी बोध कराता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहन भागवत जी के अनुसार, “उनको हम जन्मजात देशभक्त कह सकते हैं, क्योंकि बाल्यकाल से ही देश के लिए जीने मरने की चिंगारी उनके मन में थी। वह स्वयं बचपन में ही अनाथ हो गए थे। दरिद्रता में ही उनका प्रारंभिक जीवन कटा। किंतु देश के लिए चलने वाले कामों में भाग लेना उन्होंने कभी नहीं छोड़ा।

जब वे चौथी कक्षा में थे, उस समय (1905 में) इंग्लैंड की रानी विक्टोरिया के राज्यारोहण की हीरक जयंती (60 साल) मनाई जा रही थी। अंग्रेजी साम्राज्य जहां-जहां था, भारत में भी सभी सरकारी संस्थानों और विद्यालयों में समारोह हुए। नागपुर के उनके स्कूल में भी हुआ और छात्रों में मिठाइयां बांटी गईं। बालक हेडगेवार ने वह मिठाई के डिब्बे उठाकर बाहर कूड़े में फेंक दिए। अध्यापक ने पूछा, “मिठाई क्यों फेंक दी? बच्चे हो, मिठाई नहीं खाते?” बालक ने उत्तर दिया, “यह मिठाई नहीं, जहर है। जो विदेशियों ने हमारा राज्य छीनकर अपना झंडा गाड़ा है, उनकी रानी का राज्यारोहण हमारे लिए उत्सव का दिन नहीं, शोक का दिन है। उसके उपलक्ष्य में आई यह मिठाई हमारे लिए ज़हर के समान है!” उनकी राष्ट्रभावना बचपन से ऐसी थी।

डॉ. हेडगेवार जी के विषय में श्रीगुरुजी कहते हैं, “डाक्टर हेडगेवार जी का हृदय जितना उदार था, उतना ही स्नेहमय भी था। हिमालय की उत्तुंगता, परम पवित्रता और उदारता का त्रिवेणी-संगम उनमें हुआ था। उनके विषय में जितना कहा जाए, उतना थोड़ा ही है। मैं केवल यही कहूंगा कि वे एक विभूति थे। सूर्य की प्रखरता और चंद्रमा की शीतलता दोनों से ईश्वर ने उनका अंतः करण बनाया था। वे बीसवीं शताब्दी के अजातशत्रु युधिष्ठिर थे। लोकमान्य तिलक, महात्मा गांधी, वीर सावरकर, सुभाष बाबू, भगत सिंह, राजगुरु, मदन मोहन मालवीय इन सभी से हेडगेवार जी की भेंट-चर्चा होती थी।

कोलकाता के क्रांतिकारियों से संपर्क

कलकत्ता देश के क्रांतिकारियों के लिए काशी के समान माना जाता था। केशव के मन में भी कलकत्ता जाकर क्रांतिकारी आंदोलन से जुड़ने की अभिलाषा थी। उन पर सी.आई.डी. एवं पुलिस की निरंतर निगरानी थी। अतः अध्ययन की आड़ में ही वह जाते। सौभाग्य से माध्यमिक परीक्षा में वह अपेक्षित अंक प्राप्त करके द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण हुए। पढ़ाई में उनकी रुचि विज्ञान के क्षेत्र में थी। माध्यमिक परीक्षा के बाद केशव ने एक प्राइवेट स्कूल में शिक्षक का काम करके धनोपार्जन अवश्य किया था परंतु कलकत्ता जैसे महंगे शहर में रहने के लिए इससे कहीं अधिक धन की आवश्यकता थी। उनकी निष्ठा एवं श्रेष्ठता ने प्रांत के तिलकवादी नेताओं का दिल जीत लिया था। वे सब उनके भविष्य के बारे में विचार मंथन में स्वतः ही लग गए थे। केशव ने बचपन में अब तक अपनी इच्छा, कठिनाई अथवा कष्ट के बारे में कभी किसी के आगे जिक्र भी नहीं किया था।

रामलाल वाजपेयी ने अपने जीवन चरित्र में इस घटना का उल्लेख करते हुए लिखा है कि उनको कलकत्ता भेजने का असली मकसद क्रांतिकारी संगठन संबंधी जानकारी प्राप्त करना एवं मध्यप्रांत और बंगाल के बीच सेतु का काम करना था। उन्होंने लिखा है कि डॉ. हेडगेवार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक को श्री दाजी साहब बुटी की कुछ आर्थिक मदद दिलाकर शिक्षा की अपेक्षा पुलिन बिहारी दास के हाथ के नीचे क्रांति एवं संगठन के लिए भेजा गया था। उनके रहने की व्यवस्था कलकत्ता के प्रेम गुजराल मार्ग पर स्थित शांतिनिकेतन में की गई थी। नेशनल मेडिकल कॉलेज में देशभर से छात्र आते थे और इसका अखिल भारतीय चरित्र था।

केशव के साथ अनेक मराठा छात्र वहां पढ़ने गए थे। नारायणराव सावरकर और आठवले आदि केशव जी के मित्रों में से थे। श्यामसुंदर चक्रवर्ती का डॉक्टर साहब के प्रति अगाध प्रेम था। डॉक्टर हेडगेवार का उनके घर आना जाना अक्सर लगा रहता था। अन्य क्रांतिकारियों की तरह ही चक्रवर्ती जी की आर्थिक हालात दयनीय थी। उनकी पुत्री के विवाह में उत्पन्न आर्थिक संकट को दूर करने में डॉ. हेडगेवार ने काफी तत्परता दिखाई थी। उन्होंने धन संग्रह करके उन्हें अर्पित किया था। दूसरे प्रमुख राष्ट्रभावी मौलवी लियाकत हुसैन द्वारा आयोजित सभाओं, प्रभात फेरियों में डॉ हेडगेवार अवश्य जाते थे।

दोनों के बीच प्रगाढ़ता का ही परिणाम था कि डॉ हेडगेवार के निवेदन पर हुसैन ने ‘फैज कैप’ पहनना बंद करके गांधी टोपी पहनाना शुरू कर दिया था। हेडगेवार जी, मोतीलाल घोष, डॉ. आशुतोष मुखर्जी जैसे लोगों के निकट रहे और रासबिहारी बोस तथा विपिनचंद्र पाल से भी उनका गहरा परिचय हुआ। हरदास ने उनके चरित्र पर प्रकाश डालते हुए लिखा है-डॉ. हेडगेवार ने अपने सात्विक चरित्र, प्रतिबद्धता और साधारण संगठन कौशल से नौजवान क्रांतिकारियों का दिल जीत लिया था और उनके प्रति भक्ति भाव रखने वाले देशभक्तों की एक बड़ी संख्या थी।

अनुशीलन समिति

डॉक्टर साहब जब कलकत्ता पहुंचे थे तो उस दौरान क्रांतिकारियों पर अंग्रेजी दमन का दौर चल रहा था। सरकार राष्ट्रद्रोही सभा अधिनियम, 1907, आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम, 1908 और इंडियन प्रेस एक्ट, 1910 के द्वारा क्रांतिकारी पत्रों, संगठनों एवं व्यक्तियों को दंडित करने, प्रतिबंधिति करने एवं उन पर मुकदमा चलाने का कार्य कर रही थी। क्रांतिकारी संगठनों को जिनमें बांधव बर्ती, अनुशीलन साधना समिति, आत्मोन्नति समिति प्रमुख थे, को गैर कानूनी घोषित करके सरकार उनके संचालकों एवं कार्यकर्ताओं की धर-पकड़ करने में लगी हुई थी। ऐसे प्रतिबंधित संगठनों की संख्या लगभग 50 थी। अनुशीलन समिति जिसकी स्थापना 1901 में की गई थी, पूरे बंगाल में सर्वाधिक लोकप्रिय एवं संगठित क्रांतिकारी संस्था मानी जाती थी। इसके संस्थापक पी. मित्रा थे। बंगाल के सभी प्रसिद्ध क्रांतिकारी इससे जुड़े हुए थे। इसमें अरविंद घोष, विपिन चंद्र पाल, त्रैलोक्यनाथ चक्रवर्ती, नलिनीकिशोर गुह, प्रतुल गांगुली, जोगेश चंद्र चटर्जी आदि नाम उल्लेखनीय हैं।

पूरे देश में क्रांतिकारी गतिविधियों का समन्वय अनुशीलन समिति के माध्यम से होता था। नागपुर के राष्ट्रभावीजन चाहते थे कि डॉक्टर हेडगेवार पढ़ाई के साथ-साथ कोलकाता के क्रांतिकारियों से संपर्क जोड़ें और लौटकर पश्चिम भारत में क्रांतिकारी आंदोलन को संगठित करें। कोलकाता आकर डॉक्टर हेडगेवार ने ये दोनों काम बखूबी किए। अपनी डॉक्टरी की पढ़ाई भी पूरी की और साथ ही महाराष्ट्र समेत देश के पश्चिमी क्षेत्रों में क्रांतिकारी गतिविधियों के सूत्र स्थापित कर दिए। डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टर हेडगेवार ने अनुशीलन समिति में जो विधिवत क्रांतिकारी प्रत्यय (शपथ) ली थी, काली माता की मूर्ति के सामने उसका पालन करने हेतु उन्होंने निश्चय किया कि “इस जन्म में मेरा जीवन देश के काम के लिए ही होगा।

अपना करियर आदि सब अगली दुनिया (पुनर्जन्म) के लिए छोड़ दिया। पढ़ाई पूरी होने पर उन्हें बर्मा (म्यांमार) में 3000 रुपये मासिक की बहुत बड़ी नौकरी का प्रस्ताव मिला था। लेकिन उन्होंने अपने कॉलेज प्रिंसिपल से स्पष्ट कह दिया–“मुझे पैसा नहीं कमाना, मुझे देश का काम करना है।” शिक्षा पूर्ण करके जब वे नागपुर वापस पहुँचे तो चाचा जी ने विवाह का पूछा; उन्होंने साफ़ कह दिया–“मेरा यह विचार नहीं है। मैं देश के लिए ही काम करूँगा। मेरा रास्ता कठिन है। न जाने क्या-क्या कष्ट सहने पड़ेंगे, वह मैं सहूंगा। और किसी को साथ लेकर नहीं करूंगा, इसलिए अविवाहित ही रहना है।” उन्होंने डॉक्टरी की प्रैक्टिस भी नहीं की, विवाह भी नहीं किया, अपना जीवन पूर्ण समर्पित कर दिया।

वंदे मातरम् आंदोलन

सन 1907 के मध्य में विद्यालय निरीक्षक प्रतिवर्ष की भांति स्कूल का निरीक्षण करने नील सिटी स्कूल आए थे। जैसे ही निरीक्षक केशव की कक्षा में गए, सभी छात्रों ने उठकर एक साथ ‘वंदे मातरम्’ की जोरदार घोषणा से उनका स्वागत किया और प्रत्येक कक्षा में इसकी पुनरावृत्ति होती रही। केशव के सहपाठी गोविंद गणेश आवदे ने इस घटना का वर्णन करते हुए लिखा- ‘गुस्से से लाल-पीले होकर विद्यालय निरीक्षक प्रधानाध्यापक जनार्दन विनायक ओक के कमरे में आ गए और बिना बात किए सीधे चले गए। इसके तुरंत बाद उन्होंने विद्यालय प्रबंध समिति के चेयरमैन सर विपिन कृष्ण बोस को पत्र लिखकर दोषी छात्रों को ‘अनुशासनहीनता’ के लिए अविलंब सजा देने की मांग की।’

स्कूल के अधिकारियों को इसका तनिक भी भान नहीं था कि छात्रों के बीच जबर्दस्त राजनीतिक ध्रुवीकरण हो चुका है। केशव ने आरंभ से अंत तक की योजना अत्यंत ही गोपनीय तरीके से बना रखी थी। विद्यालय प्रबंध समिति के निर्णय के विरुद्ध स्कूल के सभी दो हजार छात्र अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। हड़ताल दो महीने तक चलती रही। इस हड़ताल में नागपुर का मारिस कालेज भी शामिल हो गया। केशव के नेतृत्व में जुलूस, प्रभात फेरी इत्यादि आम बात बन गई। अंततः अच्युतराव कोल्हटकर की मध्यस्थता से स्कूल खुला।

छात्रों ने समझाने-बुझाने तथा अपने माता-पिता एवं शिक्षकों के दबाव में माफी माग ली। परंतु अकेले केशव ने ऐसा करने से साफ इंकार कर दिया। उन्होंने भरी सभा में कहा : “अगर मातृभूमि की आराधना अपराध है तो मैं यह अपराध एक नहीं, अनगिनत बार करूंगा और इसके लिए मिलने वाली सजा को भी सहर्ष स्वीकार करूंगा।’ फलतः सितंबर माह में केशव को विद्यालय से निष्कासित कर दिया गया। केशव ने इसे देशभक्ति का प्रसाद समझकर सहर्ष स्वीकार कर लिया। नागपुर में वह लोकप्रिय युवा नेता के रूप में प्रतिष्ठित हुए।

असहयोग आन्दोलन

इस आंदोलन में डॉ. हेडगेवार का योगदान महत्वपूर्ण है। उन्होंने गांव-गांव जाकर भाषण दिया और लोगों को जागृत किया। इस पर अंग्रेज सरकार ने उन पर राजद्रोह (sedition) का मुकदमा चलाया। तब आंदोलन के नियम अनुसार, आमतौर पर नेता लोग कोई बचाव नहीं करते थे, सजा भुगतना ही अपना बयान होता था। लेकिन डॉक्टर हेडगेवार ने तय किया कि मैं कोर्ट में डिफ़ेन्स दूंगा, क्योंकि वह भी मेरा एक भाषण ही होगा।” उस समय अदालत में जनता और पत्रकार मौजूद रहते थे, तो उन्हें अपना संदेश फैलाने का एक और अवसर मिलना था। अपने मुकदमे में उन्होंने न्यायाधीश से सीधे पूछा था, “न्यायाधीश महोदय, यह बताइए कि किस क़ानून के तहत अंग्रेज लोग यहां आकर भारत पर राज्य कर रहे हैं?

स्वतंत्रता प्रत्येक मनुष्य का जन्मसिद्ध अधिकार है – यह सारी दुनिया मानती है। तो क्या कोई क़ानून है जिसके आधार पर अंग्रेज हम पर राज कर रहे हैं? नहीं है! इसलिए अंग्रेजों का राज्य ही ग़ैर-क़ानूनी है। आपका कोर्ट भी ग़ैर-क़ानूनी है। आप तो गैरकानूनी जज हैं –मैं आपके अधिकार को मानता ही नहीं!” उन्होंने कहा –“मैंने केवल देशवासियों को यही बताया कि स्वतंत्र होना हमारा अधिकार है। और स्वतंत्र कैसे होना है, यह भी समझाया। मैंने कोई अपराध नहीं किया। और अगर आपने इसे अपराध माना भी, तो आपमें मुझे सज़ा देने का अधिकार नहीं है क्योंकि मैं आपकी अदालत को मान्यता नहीं देता।” इस पर उन्हें एक साल के सश्रम कारावास की सज़ा हुई। सज़ा सुनाते हुए मैजिस्ट्रेट ने रिमार्क (टिप्पणी) लिखी-अंग्रेज़ी में जिसे “obiter dicta” कहते हैं – कि “जिन भड़काऊ भाषणों के कारण इन पर अभियोग लगाया गया, उनसे अधिक विद्रोहपूर्ण तो इनका बचाव में दिया गया भाषण है।”

साइमन कमिशन का विरोध

1928 में साइमन विरोधी आंदोलन, असहयोग आंदोलन के बाद एक महत्वपूर्ण साम्राज्यवाद विरोधी कार्यक्रम था। साइमन विरोधी आंदोलन के लिए प्रचार करने एवं लोगों को जाग्रत करने का कार्य डा. हेडगेवार को सौंपा गया था। उस वक्त तक नागपुर एवं उसके आस-पास के क्षेत्रों में संघ की अठारह शाखाएं थीं। नागपुर में कांग्रेस ने साइमन कमीशन के विरोध में सभा करने प्रस्ताव पारित किया। प्रस्ताव में कहा गया था कि ‘देश के हिंदुओं एवं मुस्लिमों को एकताबद्ध होकर साम्राज्यवादी ताकत को उचित जवाब देना चाहिए। जब साइमन कमीशन मार्च 1929 में मध्यप्रांत एवं बरार आया तब अलग-अलग राजनीतिक दृष्टिकोणों के बावजूद हिंदू नेताओं ने कमीशन के साथ सहयोग करने से इंकार किया जबकि मुस्लिमों ने कमीशन का स्वागत किया।’ साइमन कमीशन विरोधी आंदोलन में संघ की भागीदारी थी। डा. हेडगेवार ने संघ के स्वयंसेवकों को कांग्रेस की मार्फत कार्य करने का निर्देश दिया था। उन पर कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी थी।

सविनय अवज्ञा आन्दोलन

सविनय अवज्ञा आंदोलन का प्रभाव एवं गांधीजी के नेतृत्व में आंदोलन में भाग लेने की मानसिक स्थिति संघ में पूरी तरह से बन चुकी थी। आंदोलन के आरंभ से संघ के स्वयंसेवकों ने सत्याग्रह में भाग लेना शुरू कर दिया। डा. हेडगेवार ने स्वयंसेवकों के साथ सत्याग्रह में भाग लेने का निर्णय लिया। देश की बदलती राजनीतिक परिस्थिति में संघ की भूमिका निश्चित करने के लिए नागपुर में सभी संघचालकों की एक बैठक नवंबर 1929 में बुलाई गई थी। तीन दिनों तक चली बैठक में सामूहिक रूप से यह तय किया गया कि संघ कांग्रेस द्वारा घोषित आंदोलन का पूर्ण एवं बिना शर्त समर्थन करेगा। अतः संघ द्वारा आंदोलन का समर्थन करने का निर्णय अचानक अथवा किसी भी दबाव में नहीं किया गया। डा. हेडगेवार संघ की योजनाओं को महीनों पूर्व निर्धारित करते थे, जो संगठन की परंपरा बन गई। आंदोलन के प्रति संघ का दृष्टिकोण एवं इसका मूल्यांकन डा. हेडगेवार के भाषण के इस अंश से स्पष्ट हो जाता है-

‘इस भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि वर्तमान आंदोलन स्वतंत्रता प्राप्ति की अंतिम लड़ाई है। इस आंदोलन के बाद निर्णायक लड़ाई होगी और हमें सर्वस्व त्यागकर उसमें कूदने के लिए तैयार रहना चाहिए।’ प्रतिबंधित साहित्य पढ़ना भी सविनय अवज्ञा आंदोलन में शामिल किया गया था। नागपुर में संघ के कार्यकर्ताओं ने सार्वजनिक सभाओं में ऐसे साहित्य को पढ़कर गिरफ्तारियां दी थीं। इसमें संघ के सरकार्यवाह जी.एम. हुद्दार भी शामिल थे। उन्होंने एक सार्वजनिक सभा में मैजिनी एवं विनायक दामोदर सावरकर की प्रतिबंधित पुस्तकों को पढ़कर खुल्लमखुल्ला पुलिस एवं प्रशासन को ललकारा और गिरफ्तारी दी थी। नागपुर के संघचालक आप्पासाहब हलदे ने संघचालक के दायित्व से मुक्त होकर वार कौंसिल के डिक्टेटर की भूमिका निभाई और बाद में ‘जंगल सत्याग्रह’ करके जेल गए। उसी प्रकार सिरपुर के संघचालक बाबूराव वैद्य ने भी गिरफ्तारी दी थी।

संपूर्ण हिंदू समाज का संगठन

संघ किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं निकला है। संघ किसी से प्रतिस्पर्धा में नहीं चला है, न किसी परिस्थिति की प्रतिक्रिया में शुरू हुआ। संघ किसी के विरोध को मन में लेकर भी खड़ा नहीं हुआ है। संघ तो हिंदू समाज के संगठन, उन्नति और संरक्षण के लिए चला है।
आजकल सार्वजनिक जीवन में कोई भी कार्य होता है तो लोग पहले सोचते हैं, “क्यों कर रहा है? ज़रूर कुछ पाना चाहता होगा, किसी से स्पर्धा कर रहा होगा,” वगैरह। लेकिन संघ के जन्म के पीछे ऐसा कोई कारण नहीं था। बस डॉक्टर हेडगेवार के हृदय में देश की दुरावस्था को लेकर जो पीड़ा थी, वही संघ के रूप में फूट पड़ी।

“डॉक्टर जी के हृदय की व्यथा संघ के रूप में प्रस्फुटित हुई।” डॉक्टर हेडगेवार ने अपने अनुभव के आधार पर निश्चय किया कि “संपूर्ण हिंदू समाज का संगठन करना है।” हिंदू समाज संघटित होना चाहिए ऐसे अनेक नेता उत्कटता से कहा करते थे, परंतु समाज संघटित करना यानी निश्चित रूप से क्या करना, यह किसी की समझ में आ नहीं रहा था। अनेक स्थानों पर विभित्र प्रयास किये गये, परंतु उनमें से प्रत्यक्ष में कुछ भी निष्पन्न नहीं हुआ। डॉक्टरजी की विशेषता यह है कि, इस हिंदू समाज का अस्तित्व बना रहना हो, तो वह संघटित होना चाहिए यह मंत्र उन्होंने दिया, उसे संघटित करने का तंत्र प्रदान किया, और शाखा में आनेवाले युवा स्वयंसेवकों पर देशभक्ति का संस्कार किस प्रकार करें इसका मार्ग प्रदर्शित किया। संघटन यह वैसे तो एक अमूर्त कल्पना। डॉक्टरजी ने उसे प्रत्यक्ष में साकार कर दिया।

Topics: स्वयंसेवकअसहयोग आंदोलनडॉ. केशव बलिराम हेडगेवारसविनय अवज्ञा आंदोलनहीरक जयंतीसाइमन कमीशन का विरोधहिंदू राष्ट्रदेशभक्तिसंगठनसांस्कृतिक राष्ट्रवादहिंदू समाज का संगठनRSSवर्ष प्रतिपदावंदे मातरम् आंदोलन
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

RSS Sunil Ambekar Praises Captain Smit Machhar Flydubai Flight Saved Panchjanya

“पूरे देश को गर्व है”: कैप्टन स्मित मछार के साहस पर बोले संघ प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर- वे वास्तव में एक सच्चे वीर हैं

‘कन्वर्जन हिंसा है, हम इसे सहन नहीं करेंगे; प्रेम, करुणा, तपस्या और शुचिता है- हिंदुत्व’

Pandit Deendayal Upadhyaya Jayanti: एक विचार, एक दर्शन, एक अमर साधना

संघ@100: सेवा संकल्प, जीवन का स्वभाव

सेवा भाव जीवन का स्वभाव

आज का इतिहास

27 सितंबर का इतिहास: जानें इस दिन की बड़ी घटनाएं

Load More

ताज़ा समाचार

कैप्टन स्मित मछार

कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी पर दुनिया कर रही सलाम, फिर भारत का लेफ्ट-लिबरल इकोसिस्टम चुप क्यों ?

लाल बहादुर शास्त्री जयंती: सत्ता के शिखर पर सादगी की मिसाल

आज का श्लोक : नेतृत्व और टीम भावना का सूत्र, श्लोक में छिपी है सफलता की 3 मुख्य शर्तें

MP Weather Today

दिल्ली से MP तक 5 राज्यों में कैसा रहेगा 2 अक्टूबर का मौसम? बारिश होगी या नहीं! IMD का अलर्ट 

आज का राशिफल

आज का राशिफल: किसकी खुलेगी किस्मत और किसे रहना होगा सावधान? जानें सभी 12 राशियों का हाल

महात्मा गांधी

Mahatma Gandhi Jayanti Special : जब गांधीजी पहुंचे संघ के शिविर में

गुजरात पुलिस और कोस्टगार्ड ने पकड़ी ड्रग्स की बड़ी खेप।

गुजरात एटीएस और कोस्टगार्ड ने 17 दिनों तक समुद्र में रखी निगरानी, 3 हजार करोड़ की ड्रग्स और 5 पाकिस्तानी पकड़े

Asian Games 2026 India Medal Tally Squash Rowing Wrestling Nitesh Panchjanya Sports

Asian Games 2026: एशियन गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन, एक दिन में आए 5 पदक, जानें भारत का मेडल स्कोर!

क्रिकेट विश्वकप में भारतीय टीम शानदार प्रदर्शन कर रही है। (फोटो- साभार -BCCI )

क्रिकेट में लागू हुए खौफनाक नियम: 1 अक्टूबर से समय बर्बाद करने पर 5 रन की पेनल्टी, टेस्ट में पिंक बॉल का भी प्रयोग!

ICC world cup

ICC CWC 2027 Schedule Out: 2027 वनडे विश्व कप का शेड्यूल जारी, जानें कब भिड़ेंगे भारत और पाकिस्तान!

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies