पश्चिम बंगाल : गरिमा से गिरी ‘ममता’
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पश्चिम बंगाल : गरिमा से गिरी ‘ममता’

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू संथाल सम्मेलन के लिए पश्चिम बंगाल गईं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर उनका किया गया अपमान। यहां तक कि उनके लिए तय बाथ रूम में पानी भी नहीं था। कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जानबूझकर उनका अपमान होने दिया

Written byपाञ्चजन्यपाञ्चजन्य
Mar 17, 2026, 12:48 pm IST
inविश्लेषण, पश्चिम बंगाल
कार्यक्रम को संबोधित करतीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू  एवं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लिखा पत्र

कार्यक्रम को संबोधित करतीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू  एवं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लिखा पत्र

बीते 7 मार्च को सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल में नवां अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन आयोजित हुआ। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को उसमें शामिल होना था। इस दौरान राज्य सरकार ने उनके प्रोटोकॉल का भी ध्यान नहीं रखा। तयशुदा कार्यक्रम के अनुसार यह सम्मेलन विधाननगर उपमंडल में होना था, लेकिन पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी और कार्यक्रम को बागडोगरा के गोशाईपुर में स्थानांतरित कर दिया गया। वहां भी लोगों को सम्मेलन में भाग लेने से रोका गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी अपेक्षित सहयोग नहीं किया। इसे देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद का अपमान बताया गया।

इससे खुद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी नाराज हो गईं। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि यदि सम्मेलन पहले से तय स्थान पर आयोजित होता तो बेहतर होता, क्योंकि वह स्थान बड़ा था और वहां अधिक लोग पहुंच सकते थे। उन्होंने कहा कि उन्हें समझ नहीं आया कि प्रशासन के मन में क्या चल रहा था कि सम्मेलन के लिए ऐसी जगह चुनी गई, जहां संथाल समाज के लोग आसानी से नहीं पहुंच सकते थे। उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि कई लोग सम्मेलन में शामिल नहीं हो पाए, क्योंकि कार्यक्रम बहुत दूर आयोजित किया गया था।

राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि संभवतः प्रशासन को उम्मीद रही होगी कि वहां कोई भी नहीं पहुंच पाएगा और कार्यक्रम प्रभावी रूप से नहीं हो सकेगा। उन्होंने कहा कि यदि राष्ट्रपति किसी स्थान पर जाती हैं तो वहां की मुख्यमंत्री और मंत्रियों को भी उपस्थित होना चाहिए, लेकिन मुख्यमंत्री नहीं आईं। उन्होंने कहा, “मैं भी बंगाल की बेटी हूं। ममता दीदी भी मेरी बहन हैं, मेरी छोटी बहन। मुझे नहीं पता कि वह मुझसे नाराज थीं, इसलिए ऐसा हुआ।”

स्वागत को लेकर उठा विवाद

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का स्वागत करने के लिए हवाई अड्डे पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नहीं पहुंचीं। इसे लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तृणमूल कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल का उल्लेख करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल की सरकार ने सारी हदें पार कर दी हैं।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि स्वयं आदिवासी समुदाय से आने वाली राष्ट्रपति द्वारा व्यक्त की गई पीड़ा और दुख ने देश की जनता को भी दुखी किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के इस अपमान के लिए राज्य प्रशासन जिम्मेदार है। उन्होंने यह भी कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पश्चिम बंगाल सरकार संथाल संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विषय को इतनी लापरवाही से ले रही है। राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर है और उसकी गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए।

इसी संदर्भ में अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी एक्स पर प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने लिखा कि देश की पहली जनजातीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा इस पीड़ा को व्यक्त किया जाना न केवल पश्चिम बंगाल बल्कि पूरे देश के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। राष्ट्रपति का पद राजनीति से परे राष्ट्र की सर्वोच्च संवैधानिक गरिमा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि एक आदिवासी महिला राष्ट्रपति का अपमान करना आदिवासी गौरव का अपमान और भारत के संविधान का भी अपमान है।

सरकार के रवैये पर उठे सवाल

अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन के दौरान राज्य सरकार के व्यवहार को कई लोगों ने निंदनीय और अपमानजनक बताया। इस सम्मेलन में भारत के साथ-साथ बांग्लादेश, नेपाल और भूटान से भी बड़ी संख्या में संथाल समुदाय और अन्य जनजातीय समाज के प्रतिनिधि पहुंचे थे।

बताया गया कि सम्मेलन का स्थान अचानक दो दिन पहले बदल दिया गया, जबकि इतने बड़े सम्मेलन और राष्ट्रपति की उपस्थिति को देखते हुए पहले से तय स्थान अधिक उपयुक्त था। नए स्थान के छोटा होने के कारण कई लोगों को असुविधा हुई। आरोप यह भी लगाया गया कि प्रशासन ने आने वाले प्रतिनिधियों की संख्या कम करने के प्रयास किए और उन्हें विभिन्न प्रकार की बाधाओं का सामना करना पड़ा।
राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन पर यह भी आरोप लगाया गया कि राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था और प्रोटोकॉल के पालन में लापरवाही बरती गई। प्रोटोकॉल के अनुसार मुख्यमंत्री या किसी वरिष्ठ मंत्री की अनुपस्थिति को भी अमर्यादित व्यवहार बताया गया।
इस संबंध में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने ममता बनर्जी से इस घटना के लिए माफी मांगने को कहा। अपने पत्र में उन्होंने लिखा कि भारत की लोकतांत्रिक परंपराएं और शिष्टाचार हमेशा से प्रशंसनीय रहे हैं और मतभेद को कभी मनभेद नहीं बनने दिया गया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के साथ हुआ यह व्यवहार इन परंपराओं के विपरीत है।

उन्होंने यह भी कहा कि एक जनजातीय समाज से आने वाली महिला राष्ट्रपति के प्रवास के दौरान न्यूनतम शिष्टाचार का भी पालन नहीं किया गया। जनजातीय समाज द्वारा आयोजित कार्यक्रम का स्थान बदल देना और आवश्यक सुविधाओं का अभाव लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध है।

संपूर्ण जनजाति समाज का अपमान

इस विषय पर अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के अध्यक्ष सतेंद्र सिंह ने भी कहा कि यह घटना न केवल राष्ट्रपति का अपमान है, बल्कि पूरे जनजातीय समाज का भी अपमान है। पश्चिम बंगाल सरकार का व्यवहार निदंनीय और अपमानजनक है।

गृह मंत्रालय ने मांगी रिपोर्ट

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान प्रोटोकॉल में कथित चूक के आरोपों के बाद केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव से यह स्पष्ट करने को कहा था कि राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान सुरक्षा और प्रोटोकॉल से जुड़े “ब्लू बुक” नियमों का पालन क्यों नहीं हुआ। मंत्रालय ने विशेष रूप से यह जानकारी मांगी थी कि राष्ट्रपति के आगमन पर मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक की अनुपस्थिति क्यों रही, कार्यक्रम का स्थान अंतिम समय में क्यों बदला गया और यात्रा मार्ग व व्यवस्थाओं में क्या निर्णय लिए गए। पश्चिम बंगाल सरकार ने अपनी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंप दी है। इसमें बताया गया है कि कार्यक्रम के स्थान में बदलाव प्रशासनिक कारणों से किया गया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि उस समय जो प्रशासनिक निर्णय लिए गए, वे परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किए गए थे। राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति के पीछे निर्धारित कार्यक्रम और अन्य प्रशासनिक कारण थे।

पश्चिम बंगाल सरकार की रिपोर्ट मिलने के बाद अब केन्द्रीय गृह मंत्रालय उसकी जांच और समीक्षा करेगा। मंत्रालय रिपोर्ट में दिए गए तथ्यों, दस्तावेजों और प्रशासनिक फैसलों को देखकर यह तय करेगा कि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल के नियमों का उल्लंघन हुआ था या नहीं। यदि जांच में यह पाया जाता है कि राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल से जुड़ी “ब्लू बुक” के नियमों का पालन नहीं किया गया, तो केंद्र सरकार राज्य सरकार से और स्पष्टीकरण मांग सकती है या संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश कर सकती है।

इधर, राष्ट्रपति के कार्यक्रम को लेकर उठे विवाद के बाद गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी है। मंत्रालय ने कहा है कि राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान प्रोटोकॉल के तहत जो व्यवस्थाएं की जानी चाहिए थीं, उनके बारे में विस्तृत जानकारी दी जाए और बताया जाए कि राज्य प्रशासन ने क्या-क्या इंतजाम किए थे।

Topics: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीराष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मूमुख्यमंत्री ममता बनर्जीशिष्टाचारजनजातीय गौरवपाञ्चजन्य विशेषसिलीगुड़ीसंवैधानिक गरिमासंथाल समाजअभाव कल्याण आश्रमपश्चिम बंगालगृह मंत्रालय की रिपोर्ट
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