क्यों कहा न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान मामदानी ने “मचाने दो शोर!” और किससे कहा
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क्यों कहा न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान मामदानी ने “मचाने दो शोर!” और किससे कहा

न्यूयॉर्क मेयर जोहरान मामदानी के सिटी हॉल इफ्तार आयोजन पर कट्टरता और 'दावाह' के आरोप लगे। कुछ ने इसे सहिष्णुता का प्रतीक बताया, जबकि अन्य ने अमेरिकी संस्कृति पर खतरे की बात की। मामदानी ने आलोचना को अनदेखा कर समावेशिता पर जोर दिया।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा — edited by कुलदीप सिंह
Mar 15, 2026, 09:51 am IST
inविश्व, विश्लेषण

न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान मामदानी इन दिनों काफी चर्चा में हैं। हालांकि वे बहुधा चर्चा में ही रहते हैं, मगर इन दिनों और भी अधिक चर्चा में हैं। उन पर अपने कार्यालय का इस्लाम के लिए दुरुपयोग करने का आरोप लगता है और वे पिछले दिनों आधिकारिक हैंडल से हिजाब का भी समर्थन करते हुए पोस्ट किया गया था और उसके बाद ट्रम्प द्वारा ईरान पर किये गए हमले को लेकर भी उन्होंने सरकार से इतर अपना रुख रखा था।

मगर अब जो वीडियो सामने आया है, वह कुछ खतरनाक है। वह ऐसा है कि जिसे देखकर लोगों को हैरत नहीं आ रही है, बल्कि गुस्सा आ रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या यही न्यूयॉर्क है और इसके साथ ही न्यूयॉर्क के मेयर अब यह भी खिल्ली उड़ा रहे हैं कि जिसे जितना शोर मचाना हो वह मचा सकता है। क्या एक निर्वाचित मेयर यह कर सकता है?

क्या है मामला?

इन दिनों ट्रम्प की प्रशंसक लौरा लूमर ने भारत में ही एक आयोजन में कहा कि अमेरिका में किसी भी सार्वजनिक पद पर मुस्लिम नहीं होने चाहिए क्योंकि उनकी वफ़ा सबसे पहले अपने मजहब के लिए होती है। लौरा का कहना है कि ऐसा इसलिए क्योंकि मुस्लिम राजनेता इस्लाम को सबसे आगे रखते हैं और उसे ही केंद्र बिन्दु रखते हैं।

यदि पिछले दिनों न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान मामदानी के कामों पर नजर डाली जाए तो कहीं न कहीं लौरा का यह कथन सत्य ही प्रतीत होता है। जोहरान मामदानी ने पिछले दिनों न्यूयॉर्क के सिटी हाल में रमजान के इफ्तार का आयोजन किया। और उस आयोजन में लोगों ने सिटी हॉल में नमाज पढ़ी। वह वीडियो वायरल है और लोग यह कह रहे हैं कि यह बहुत खतरनाक है। यह जोहरान मामदानी के अंतर्गत न्यूयॉर्क सिटी हॉल है। मुस्लिम नमाज अदा कर रहे हैं। संवेदनशीलता और सहिष्णुता पश्चिमी सभ्यता को समाप्त कर देगी। और यह भी लिखा कि यूके बनने से पहले इस्लाम को वापस भेजना होगा।

https://Twitter.com/WallStreetApes/status/2031939628748718169?

इस्लाम की कट्टरता के विषय में लगातार लिखने वाली स्वतंत्र पत्रकार एमी मेल मे भी एक्स पर इस वीडियो को साझा किया और उन्होंने अमेरिका को चेताया भी। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान मामदानी ने सिटी हॉल में इफ्तार में दावा दी है, जो जिहाद से पहले जरूरी रूप से बुलाई जाती है। वह आगे लिखती हैं कि जोहरान मामदानी ने दावाह के लिए उचित रूप से स्टेज सजाया। कुछ मुट्ठी भर इंफ्लुएंसर्स को बुलाया और उन्हें फर्श पर बैठा कर नमाज के बाद रमादान का इफ्तार फ़ोटो ओप किया।

इस्लामी दवाह को बनाया हथियार

एमी ने इसे इस्लामी दावाह बताया है। इसका अर्थ होता है जिहाद से पहले गैर मुस्लिमों को एक बार प्यार से इस्लाम में याने की दावत देना। दावत शब्द दावाह से ही आया है। उनका कहना है कि मामदानी ने अपने कार्यालय को पूरे देश में इस्लाम का प्रचार-प्रसार करने का केंद्र बना लिया है और समवेशीकरण के नाम पर शरिया के कानूनों को सामान्यीकृत बनाया जा रहा है।

एमी लिखती हैं कि इस्लाम ऐसे ही आदेश देता है। पहले दावाह कि इस्लाम में याने की दावत या फिर इस्लामिक शासन स्वीकारने की दावत और फिर यदि इसे स्वीकार नहीं किया गया तो आक्रमण! उन्होनें चेतावनी देते हुए लिखा कि इससे पहले कि देर हो जाए, न्यूयॉर्क वासियों जाग जाओ!

ऐसे ही तमाम यूजर्स ने जोहरान मामदानी के विषय में लिखा। जोहरान मामदानी ने इन तमाम पोस्ट्स और आलोचना को हवा में उड़ाते हुए एक्स पर लिखा

“वाशिंगटन में राजनेताओं को जितना हो सके शोर मचाने देना चाहिए, जहां बच्चे भूखे रहते हैं तो वहीं मैं इस समय न्यूयॉर्क वासियों के साथ ब्रेड तोड़ रहा हूँ!”

Let there be as much outrage from politicians in Washington when kids go hungry as there is when I break bread with New Yorkers. https://t.co/IibwxE1SDr

— Mayor Zohran Kwame Mamdani (@NYCMayor) March 12, 2026

कट्टरता को बढ़ावा दे रहा मामदानी

लोगों ने इस पोस्ट पर भी जोहरान मामदानी की आलोचना की। एक यूजर ने मामदानी के इस पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए लिखा कि “ममदानी “भूखे बच्चों” को लेकर पश्चिमी देशों के बेतुके अपराध-बोध का खुलेआम फ़ायदा उठाते हैं, ताकि सिटी हॉल को मस्जिद में बदलने के अपने कदम को सही ठहरा सकें। ज़ाहिर है, इन दोनों बातों का आपस में कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन उन्हें इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता। पश्चिमी देशों का यह अपराध-बोध उनके इस्लामी एजेंडे को आगे बढ़ाने का एक बेहतरीन ज़रिया है।

दरअसल यह केवल जोहरान मामदानी का ही नहीं बल्कि हर उस कट्टरपंथी का रास्ता है जो पश्चिम के इस अपराध बोध को जानता है और जो इस अपराधबोध का फायदा भी उठाना जानता है। क्योंकि जहां अमेरिका अपने आप को सुपरपावर कहता है, और यह कहता है कि गरीबी नहीं है, उस देश में यह कोई कहे कि वाशिंगटन में भूखे बच्चे हैं तो कुछ हजम नहीं होता है। लोगों का यह भी कहना है कि मेयर के इस आयोजन में हमास के समर्थक भी थे।

लोगों का कहना है कि मामदानी जैसे लोगों को शब्दों का खेल बहुत अचही तरह से आटा है और उन्हें यह भी भली तरह से आता है कि कब कट्टरपंथ के विरोध को इस्लामोफोबिया में बदल देना है!

 

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