इस समय पूरे यूरोप में श्वेत लड़कियां निशाने पर हैं। श्वेत लड़कियां सहज होती हैं, खुलेपन से व्यवहार करती हैं और छोटे कपड़े पहनती हैं, और भिन्न सांस्कृतिक मूल्यों का पालन करती हैं, जिसे लेकर यूरोप में बाहर से आने वाले लोगों के दिल में इन लड़कियों के प्रति “उपलब्धता” की भावना का विकास होता है। ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग्स के दौरान यह भाव कई लड़कियों ने बताया कि कैसे उनका शोषण करने वाले पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग के लोग उनके साथ बलात्कार करते हुए यही कहते थे कि “गोरी लड़कियां होती ही इसलिए हैं!” मगर फिर भी उन समूहों के खिलाफ इसलिए कदम नहीं उठाए गए क्योंकि पुलिस और प्रशासन को यह लगता था कि ऐसा करने से उनपर इस्लामोफोबिक का ठप्पा लग जाएगा।
अभी भी वहाँ पर यह सब चर्चा में है और लगातार ही नए मामले सामने आ रहे हैं, मगर अब जर्मनी में भी ऐसा मामला सामने आया है।
मुस्लिमों को बचाने का आरोप
बर्लिन में एक यूथ सेंटर पर यह आरोप है कि उसने स्कूल गर्ल के कथित सामूहिक बलात्कार की रिपोर्ट करने से इसलिए इनकार कर दिया, क्योंकि उन्हें डर था कि यदि वे ऐसा करेंगे तो आरोपियों पर “टिपिकल मुस्लिम्स” होने का ठप्पा लग जाएगा। मीडिया के अनुसार जनवरी में, Neukölln के बहुसांस्कृतिक क्षेत्र में स्थित एक सेंटर के कर्मचारियों ने नौ अरब पुरुषों को 16 वर्षीय पीड़िता के साथ एक पीछे के कमरे में छेड़छाड़ करते हुए पकड़ा; इसके बाद लड़की ने कर्मचारियों को बताया कि नवंबर में केंद्र के बगीचे में उसके साथ सामूहिक बलात्कार हुआ था।
ब्लैकमेल किया
उस लड़की ने कहा कि उस हमले का वीडियो बनाया गया था और उनमें से एक 17 वर्षीय लड़के मेडी ने उसे धमकी दी थी कि वह इस वीडियो को उसके घरवालों के पास भेज देगा, अगर वह हर सोमवार यूथ सेंटर नहीं आई और उसने उससे उसकी चौदह वर्षीय बहन की भी मांग की थी। मगर सेंटर ने उस छात्रा की शिकायत पर कुछ नहीं किया। उन्होंने पुलिस के पास जाना उचित नहीं समझा। उन्होनें लड़की की मदद के नाम पर उस पिछले कमरे का दरवाजा हटा दिया, जिससे ली लड़कियों को सुरक्षित महसूस हो। मगर पुलिस पे पास नहीं गए।
वह लड़की भी तुर्की और कुर्दी मूल की थी। वह खुद ही अपने अभिभावकों के साथ पुलिस के पास गई और फिर जिसके परिणामस्वरूप जांच आरंभ हुई।
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मुस्लिम आक्रमणकारियों को बचाया जा रहा
क्रिश्चियन डेमक्रैटस से बर्लिन यूथ स्टेट सेक्रेटरी फाल्को लीक ने कहा कि यह बहुत ही भयावह है कि मुस्लिम आक्रमणकारियों को केवल इसलिए बचाया जा रहा है कि उन पर धब्बा न लग जाए और पीड़ित को छोड़ दिया जा रहा है और यह रवैया बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। उनका कहना था कि राजनीतिक कारणों से इस मामले को दबाया गया है और इस मामले पर डिस्ट्रिक्ट ऑफिस में भी चर्चा नहीं हुई, न ही यूथ वेल्फेयर ऑफिस और न ही संबंधित सिटी कौंसिलर ने पुलिस के पास कोई रिपोर्ट दर्ज की है। यह एक घोटाला है और इसके परिणाम भी होंगे।
बर्लिन में आधे बलात्कारी विदेशी
इस रिपोर्ट में एक और भी चौंकाने वाली बात सामने आई। इसमें बर्लिन में हो रहे बलात्कारों के विषय में आँकड़े थे। इसमें लिखा था कि “पिछले साल जारी किए गए 2024 के आंकड़ों के अनुसार, बर्लिन में हुए लगभग आधे बलात्कार गैर-जर्मन नागरिकों द्वारा किए गए थे, जिनकी आबादी में हिस्सेदारी लगभग 25% है। ये आंकड़े यह नहीं बताते कि बाकी 50% में से कितने लोग विदेशी मूल या वंश के जर्मन नागरिक थे।“
जर्मनी में भी जिहादी तत्व लगातार ही अपनी उपस्थिति दर्ज कराते जा रहे हैं। इसके साथ ही मीडिया एवं प्रशासन भी कहीं न कहीं इन तत्वों के विरुद्ध बोलने से डरता है। पिछले दिनों जर्मनी में ही मैकडॉनल्ड्स ने रमजान के महीने में दिन भर अपने डिजिटल विज्ञापनों में कुछ भी खाने का नहीं दिखाया था, जबकि सूरज ढलते ही सभी कुछ भर जाता था।
एक और रोचक वाकया जर्मनी में हुआ था। हालांकि वह 2025 के अक्टूबर में हुआ था। जर्मनी में वहाँ की समाजवादी मेयर आइरिस स्टालजेर जो कि सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी की सदस्य थीं, ने एक शरणार्थी लड़की को गोद लेकर अपनी बेटी बनाया था। एक दिन उसकी उसी बेटी ने इमरजेंसी में कॉल किया कि उसे गोद लेने वाली माँ को कुछ लोगों ने चाकू मार दिया है।
मेयर पर भी किया गया था चाकू से हमला
मेयर पर कई बार चाकू से वार किये गए थे और डियोडरेंट स्प्रे से जलने के भी निशान थे, जिसे लाइटर से जलाया गया था। मगर बाद में पता चला था कि मेयर पर जिन चाकुओं से वार किया गया था, उसमें से एक चाकू उस लड़की के भाई के पास मिला था। हालांकि लड़की को इसलिए गिरफ्तार नहीं किया गया था कि लड़की ने इमरजेंसी सेवा को बुलाया था, तो अधिकारियों का यह कहना था कि यह लड़की ही थी, जिसने इमरजेंसी सेवाओं को कॉल करके बुलाया था और इससे यह प्रतीत होता है कि वह उस मेयर को मारना नहीं चाहती थी।
हालांकि इस मामले के बाद जर्मनी में इस बात को लेकर बहस तेज हो गई थी कि क्या बाहरी लोगों के बच्चों को गोद लेना चाहिए?
आप्रवासियों एवं अवैध शरणार्थियों के कारण यूरोप के तमाम देशों में अपराध बढ़ रहे हैं, परंतु मीडिया का इन अपराधों पर ध्यान न देना, कई और प्रश्न खड़े करता है। जैसे कि उस लड़की को न्याय दिलाने के लिए मीडिया में कोई भी बड़ी मुखर आवाज नहीं उठी, जिसका सामूहिक बलात्कार हुआ, मगर बलात्कारियों को यूथ सेंटर ने इसलिए पुलिस के हवाले नहीं किया, क्योंकि उन पर “टिपिकल मुस्लिम्स” होने का ठप्पा लग जाता!

















