नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच केंद्र सरकार ने कहा है कि देश में एलपीजी सिलेंडर की कोई कमी नहीं है। लोगों को एलपीजी की पैनिक बुकिंग से बचना चाहिए।
स्टॉक खत्म नहीं हुआ है
नेशनल मीडिया सेंटर में शनिवार को पत्रकार वार्ता में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव (मार्केटिंग और ऑयल रिफाइनरी) सुजाता शर्मा ने कहा कि भौगोलिक हालात को देखते हुए यह हमारे लिए चिंता की बात बनी हुई है। हालांकि अभी तक स्टॉक खत्म होने की कोई खबर नहीं है। उन्होंने कहा कि एलपीजी पैनिक बुकिंग के मामले बहुत ज्यादा हैं। शुक्रवार को जो आंकड़ा शेयर किया था उसमें लगभग 76 लाख बुकिंग-अब बढ़कर लगभग 88 लाख हो गई है।
लाइन में खड़े होने की जरूरत नहीं
उन्होंने कहा कि एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग के लिए लोगों को लाइन में खड़े होनी की आवश्यकता नहीं है। इस संबंध में उपभोक्ताओं को जागरुक करने के लिए तेल कंपनी को आदेश दिया गया है कि वे लोगों को डिजिटल बुकिंग के लिए प्रेरित करें। देश में सिलेंडर की कोई कमी नही है। सरकार द्वारा तय दिनों के अंदर लोगों को गैस सिलेंडर उपलब्ध होगा। डीलर उपभोक्ताओं को घरों में सिलेंडर पहुंचाएंगे।
कालाबाजारी रोकने को हो रही छापामारी
उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक एलपीजी उपभोक्ता को भी कुछ राहत देने के लिए उन्हें पीएनजी कनेक्शन देने का फैसला किया गया है। इसके साथ शुक्रवार को दिल्ली एनसीआर में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने एनसीआर, जिसमें दिल्ली भी शामिल है, के उद्योगों, होटलों, रेस्तरां और अन्य प्रतिष्ठानों को एक महीने के लिए कोयला, लकड़ी जलाने के इस्तेमाल की अनुमति दे दी है। उन्होंने कहा कि सरकार कालाबाजारी रोकने के लिए लगातार छापेमारी और सरप्राइज निरीक्षण कर रही है।
PNG कनेक्शन है तो एलपीजी सिलेंडर नहीं रख सकते
मंत्रालय ने शनिवार को एक अहम फैसला लिया। मंत्रालय की ओर से बयान में कहा गया है कि जिनके पास PNG कनेक्शन है वे एलपीजी सिलेंडर नहीं रख सकते। इस तरह के उपभोक्ता सिलेंडर भी नहीं भरवा सकेंगे। सरकारी तेल कंपनियों को इस तरह के उपभोक्ताओं को एलपीजी कनेक्शन देने से मना किया गया है।
अगले दो दिनों में 92 हजार टन गैस लेकर दो जहाज पहुंचेंगे भारत
देश में घरेलू रसोई गैस आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए दो भारतीय जहाज जल्द ही गुजरात के बंदरगाहों पर पहुंचने वाले हैं। इनमें कुल 92,000 मीट्रिक टन लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) लदी हुई है और ये 16-17 मार्च को गुजरात के प्रमुख पोर्ट्स पर डॉक करेंगे। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार इन जहाजों को प्राथमिकता के आधार पर बंदरगाह पर लगाने की व्यवस्था की गई है ताकि गैस आपूर्ति प्रभावित न हो। इससे रसोई गैस की उपलब्धता बनाए रखने और संभावित संकट को कम करने में मदद मिलेगी।
मंत्रालय के अधिकारी राजेश कुमार सिन्हा ने पत्रकार वार्ता में बताया कि महानिदेशालय नौवहन भारतीय ध्वज वाले जहाजों और उन पर तैनात भारतीय नाविकों की स्थिति पर लगातार नज़र रखे हुए है। इसके लिए जहाज मालिकों, आरपीएसएन एजेंसियों और भारतीय राजनयिक मिशनों के साथ समन्वय किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि पिछले 24 घंटों में पोत परिवहन के कंट्रोल रूप में पिछले 24 घंटों में 312 फोन कॉल और 460 ई-मेल प्राप्त हुए हैं। ये संदेश नाविकों, उनके परिजनों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े हैं। सभी कॉल और इमेल के जवाब दिए गए है। कुल मिलाकर अब तक 5000 कॉल और 5000 ई-मेल के जवाब दिए गए हैं।
भारतीय नाविक सुरक्षित
सिन्हा ने बताया कि फ़ारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और पिछले 24 घंटों में उनके साथ किसी भी तरह की अप्रिय घटना की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में 24 भारतीय-ध्वज वाले जहाज़ मौजूद थे। इनमें से दो जहाज़— शिवालिक और नंदा देवी जो दोनों एलपीजी कैरियर है, आज तड़के सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं और अब भारत की ओर बढ़ रहे हैं।
फारस की खाड़ी में 22 भारतीय-ध्वज वाले जहाज़ शेष
इन जहाज़ों में लगभग 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी लदी हुई है। शिवालिक के मुंद्रा पोर्ट पर 16 मार्च को पहुंचने की संभावना है और नंदा देवी जहाज के कांडला बंदरगाह पर 17 मार्च को पहुंचने की उम्मीद है। अब फारस की खाड़ी में 22 भारतीय-ध्वज वाले जहाज़ शेष हैं, जिन पर कुल 611 भारतीय नाविक सवार हैं।
















