पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ रहा है और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास हालात ठीक नहीं हैं। ऐसे में भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सतर्क हो गया है। भारतीय नौसेना ने फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के इलाके में अपने कई युद्धपोत तैनात कर दिए हैं। एलपीजी संकट को देखते हुए ये जहाज भारत आने वाले व्यापारिक जहाजों की मदद के लिए तैयार हैं।
भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का बड़ा हिस्सा कतर, सऊदी अरब जैसे खाड़ी देशों से लाता है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम एनर्जी रास्तों में से एक है, जहां से बहुत सारा तेल और गैस गुजरता है। अभी घरेलू रसोई गैस की कमी चल रही है, और क्षेत्र में समुद्री हमलों या ब्लॉकेज की वजह से सप्लाई प्रभावित हो रही है। इसलिए नौसेना का यह कदम समय पर उठाया गया है।
दो भारतीय एलपीजी टैंकरों को मिली सुरक्षित राह
शनिवार को ईरानी अधिकारियों ने दो भारतीय ध्वज वाले एलपीजी टैंकरों—शिवालिक और नंदा देवी—को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने की इजाजत दी। दोनों जहाज कतर के रास लफ्फान से लोड होकर भारत आ रहे थे। शिवालिक, जो शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया का है, शुक्रवार रात को होर्मुज पार कर चुका है और अब ओमान की खाड़ी में है। पोत ट्रैकिंग साइट्स के मुताबिक, यह 21 मार्च तक अपने गंतव्य (शायद मुंद्रा या कांडला पोर्ट) पहुंच सकता है। इस जहाज पर 40,000 मीट्रिक टन से ज्यादा एलपीजी लदी है। नंदा देवी भी इसी तरह पार हो चुका है या जल्द भारत पहुंचने वाला है।
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नौसेना ने एस्कॉर्ट किया
सूत्रों के अनुसार, इन टैंकरों को भारतीय नौसेना के युद्धपोतों ने एस्कॉर्ट किया, जिससे उनकी सुरक्षित निकासी हुई। ईरान ने इसे “दुर्लभ अपवाद” मानते हुए पासेज दिया, शायद भारत और ईरान के बीच हुई कूटनीतिक बातचीत के बाद। यह सब ऑपरेशन संकल्प के तहत हुआ, जो 2019 से चल रहा है और क्षेत्र में भारतीय जहाजों की सुरक्षा के लिए है।
युद्धपोत स्टैंडबाय पर
रविवार को सूत्रों ने पुष्टि की कि कई युद्धपोत फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में तैनात हैं। ये किसी भी व्यापारिक जहाज को जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद देने के लिए अलर्ट पर हैं—चाहे एस्कॉर्ट करनी हो या कोई इमरजेंसी हैंडल करनी हो। सरकार ईरान के साथ बातचीत जारी रखे हुए है ताकि बाकी फंसे जहाज या आने वाली एलपीजी/तेल की खेपें भी सुरक्षित पहुंच सकें।
















