गैरसैण: विधानसभा सत्र के दौरान रुद्रपुर के बीजेपी विधायक शिव अरोरा ने राज्य में जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाए जाने की मांग सदन में रखने से राज्य में एक नई बहस ने जन्म ले लिया है।
क्या है पूरा मामला
विधायक शिव अरोरा ने विधान सभा में अपनी बात रखने के दौरान सदन का ध्यान राज्य में बढ़ती हुई वर्ग विशेष ( मुस्लिम) आबादी की ओर दिलाया कि 2011 में उत्तराखंड में मुस्लिम आबादी 14 प्रतिशत थी जोकि अब बढ़ कर 18 फीसदी तक पहुंच गई है। विधायक अरोरा ने यूपी से लगे तराई के जिलों के साथ साथ पहाड़ के कुछ ऐसे क्षेत्रों का भी जिक्र किया जहां मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ रही है।
श्री अरोरा ने विशेष समुदाय के “हम पांच हमारे पच्चीस” के अभियान को देवभूमि उत्तराखंड के लिए खतरनाक बताया और कहा कि हमारे उत्तराखंड के बजट पर इसका सीधा असर पड़ रहा है लिहाजा यहां जनसंख्या नियंत्रण कानून लाया जाए और तीन से अधिक जिनके बच्चे हो उन्हें सरकारी योजनाओं से वंचित किया जाए। उन्होंने कहा गैस, मकान, राशन जैसी सब्सिडी वाली सुविधाएं वर्ग विशेष को मिलने से उत्तराखंड राज्य सरकार का बजट बिगड़ रहा है। बीजेपी विधायक के सदन में स्पष्टता से बोले जाने के बाद उन्हें बाद में अन्य बीजेपी विधायकों का भी समर्थन मिला है।
राज्य में बढ़ी मुस्लिम आबादी
उल्लेखनीय है कि हिमाचल राज्य जब 1971 बना तो उस समय वहां मुस्लिम आबादी 2 प्रतिशत थी और आज भी लगभग उतनी ही है जबकि उत्तराखंड में बीते पच्चीस सालों में मुस्लिम आबादी ने लगभग तीन गुना की वृद्धि कर ली है, इनमें यूपी से लगे हरिद्वार जिले में मुस्लिम आबादी 38 प्रतिशत, उधम सिंह नगर में 34 प्रतिशत, देहरादून जिले में 33 प्रतिशत और नैनीताल जिले में 32 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है। हिमाचल में बाहरी लोगों के भूमि खरीदने पर पाबंदी है। जबकि उत्तराखंड में ऐसा नहीं है।
जनसांख्यकी परिवर्तन सबसे बड़ी समस्या
डेमोग्राफी चेंज की ये समस्या उत्तराखंड में एक बड़ा सामाजिक, राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है, तुष्टिकरण की राजनीति की वजह से कांग्रेस बढ़ती मुस्लिम आबादी को संरक्षण देती आई है। जबकि बीजेपी इसके विरोध में खड़ी हुई है। जनसांख्यिकी असंतुलन से धामी सरकार चिंतित है और इसी लिए सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरु किया गया है। सर्वे रिपोर्ट कहती है कि सरकारी भूमि पर ज्यादातर कब्जे मुस्लिम समुदाय के जोकि यूपी बिहार बंगाल आदि राज्यों से आकर बसते गए है। बीजेपी विधायक शिव अरोरा उधम सिंह नगर जिले से आते हैं उन्होंने अपने जिले की जमीनी हकीकत को सदन में रखा है जहां अवैध बसावट ने क्षेत्र की डेमोग्राफी को प्रभावित किया है। जसपुर,किच्छा, गदरपुर, खटीमा, रुद्रपुर,काशीपुर आदि विधानसभा क्षेत्र में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण एक बड़ी समस्या का रूप ले चुके हैं।
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क्या कहते हैं विधायक शिव अरोरा
जनसंख्या नियंत्रण कानून पर विधायक शिव अरोरा कहते हैं कि हमने भारत के विभाजन का दर्द झेला है। जिस तरह से यूपी से लगते उत्तराखंड में मुस्लिम आबादी बढ़ रही है वो चिंता का विषय है हमारी सरकारी सुविधाएं विशेष वर्ग समुदाय के लोग उठा रहे हैं, जिससे हमारी सरकार के बजट पर भी दूरगामी प्रभाव पड़ रहे हैं इसे आज नहीं रोका गया तो ये विषय देवभूमि उत्तराखंड के भविष्य के लिए घातक होगा।ये लोग धार्मिक एजेंडे पर अपनी आबादी बढ़ा रहे हैं।
कांग्रेस कर रही विरोध
विधानसभा में जनसंख्या नियंत्रण कानून की बीजेपी विधायक की मांग पर कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन ने कहा कि बीजेपी हमेशा एक वर्ग विशेष को टारगेट करती है। उनका कहना है कि बीजेपी विधायक कमजोर मानसिकता के हैं, देश में शायद ही कोई मुस्लिम होगा जिसके पच्चीस बच्चे होंगे।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
जनसंख्या नियंत्रण के विषय में शोध करने वाले मनु गौड़ कहते हैं कि उत्तराखंड ही नहीं पूरे देश में जनसंख्या नियंत्रण कानून की जरूरत है। उत्तराखंड विधानसभा में ये मांग उठी है इस पर आगे बहस और चर्चा तेज होनी चाहिए। इस पर जनमत बनाया जाना चाहिए।
क्या कहते हैं सीएम धामी
उत्तराखंड विधानसभा में बीजेपी विधायक शिव अरोरा ने जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाए जाने की मांग अध्यक्ष के माध्यम से सरकार के समक्ष रखी है, ये उनका निजी विचार और मांग है, अभी इस पर और वैचारिक मंथन की जरूरत है, डेमोग्राफी चेंज उत्तराखंड की समस्या है हमारी सरकार इस पर सजग होकर इसपर काम भी कर रही है,हम उत्तराखंड से देव स्वरूप सांस्कृतिक वातावरण को बनाए रखने के लिए वचनबद्ध है।

















