प. बंगाल में राष्ट्रपति का अपमान : वनवासी कल्याण आश्रम ने की घोर निंदा
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प. बंगाल में राष्ट्रपति का अपमान : वनवासी कल्याण आश्रम ने की घोर निंदा

Droupadi Murmu की मौजूदगी में Darjeeling में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संथाल सम्मेलन के दौरान राज्य सरकार के व्यवहार पर Akhil Bharatiya Vanvasi Kalyan Ashram ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे जनजातीय समाज का अपमान बताया।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Mar 10, 2026, 03:27 pm IST
inभारत, दिल्ली, पश्चिम बंगाल

7 मार्च को पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग (सिलीगुड़ी) में आयोजित International Santhal Conference Darjeeling के दौरान राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के रवैये को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम ने आरोप लगाया है कि कार्यक्रम के दौरान प्रशासन का व्यवहार निंदनीय और अपमानजनक रहा।

सम्मेलन में भारत के साथ-साथ बांग्लादेश, नेपाल और भूटान से भी बड़ी संख्या में संथाल समाज और अन्य जनजातीय समुदाय के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बताते हुए कहा गया कि इसमें देश-विदेश से आए लोगों की उपस्थिति काफी महत्वपूर्ण थी।

अचानक बदला गया सम्मेलन का स्थान

वनवासी कल्याण आश्रम के अनुसार Santhal Conference venue change controversy उस समय शुरू हुआ जब सम्मेलन का स्थान कार्यक्रम से मात्र दो दिन पहले बदल दिया गया। बताया गया कि नया स्थान इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम और राष्ट्रपति की उपस्थिति के हिसाब से काफी छोटा था।

आरोप लगाया गया कि इस बदलाव के कारण कई प्रतिनिधियों को असुविधा का सामना करना पड़ा और कार्यक्रम की व्यवस्था भी प्रभावित हुई।

प्रतिनिधियों के सामने पैदा की गईं प्रशासनिक बाधाएं

आयोजकों का कहना है कि प्रशासन की ओर से कई ऐसे कदम उठाए गए जिनसे सम्मेलन में आने वाले लोगों की संख्या कम करने का प्रयास किया गया।

वनवासी कल्याण आश्रम का आरोप है कि Santhal tribal community conference issues के दौरान कई प्रतिनिधियों को अनावश्यक बाधाओं का सामना करना पड़ा। इससे सम्मेलन में शामिल होने आए लोगों के बीच असंतोष भी देखने को मिला।

राष्ट्रपति की सुरक्षा और प्रोटोकॉल पर भी सवाल

वनवासी कल्याण आश्रम ने बयान जारी कर कहा कि President Droupadi Murmu Darjeeling visit controversy के दौरान राज्य सरकार की ओर से सुरक्षा और प्रोटोकॉल को लेकर भी गंभीर लापरवाही बरती गई।

संगठन का कहना है कि प्रोटोकॉल के अनुसार मुख्यमंत्री या राज्य सरकार के किसी वरिष्ठ मंत्री की मौजूदगी अपेक्षित थी, लेकिन कार्यक्रम में उनकी अनुपस्थिति देखी गई। इसके अलावा राष्ट्रपति के साथ सहयोग और सम्मानजनक व्यवहार भी अपेक्षित स्तर पर नहीं था।

वनवासी कल्याण आश्रम ने की कड़ी निंदा

अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम ने इस पूरे घटनाक्रम की कड़ी निंदा की है। संगठन का कहना है कि Vanvasi Kalyan Ashram statement on Santhal conference के अनुसार यह केवल राष्ट्रपति पद का अपमान नहीं है, बल्कि पूरे जनजातीय समाज के सम्मान से जुड़ा मामला है।

संस्था ने कहा कि यह घटना देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद और संथाल समाज दोनों के लिए असम्मानजनक है।

जनजातीय समाज के सम्मान से जुड़ा मामला

संगठन ने कहा कि यह घटना केवल एक कार्यक्रम से जुड़ा विवाद नहीं है, बल्कि इससे Santhal language and tribal community respect का सवाल भी जुड़ा हुआ है।

वनवासी कल्याण आश्रम के अनुसार संथाल समाज और उनकी भाषा को लेकर इस तरह का व्यवहार पूरे जनजातीय समुदाय के सम्मान के खिलाफ है।

राजनीति से ऊपर उठने की जरूरत

संगठन ने अपने बयान में यह भी कहा कि आज देश Azadi Ka Amrit Mahotsav मना रहा है और ऐसे समय में सर्वोच्च संवैधानिक पदों को राजनीतिक विवादों से दूर रखना चाहिए।

उनका कहना है कि राष्ट्रपति और अन्य उच्च संवैधानिक पदों का सम्मान पूरे देश की जिम्मेदारी है और उन्हें तुच्छ राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए।

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Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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