भारत की छवि बीते कुछ वर्षों में विश्व भर में तेजी से बदली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के प्रति दुनियाभर के देशों में विश्वास पैदा हुआ है। इसे इस तरह से समझा जा सकता है कि ईरान-इजरायल के युद्ध के चलते पूरा मिडिल ईस्ट ईरानी गुस्से का शिकार हो रहा है। ऐसे में भारत में यूएई के पहले राजदूत रहे हुसैन हसन मिर्जा ने भारतीय नेतृत्व के प्रति भरोसा जताते हुए कहा है कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहें तो उनका इजरायल और ईरान को किया गया एक फोन इस युद्ध को रुकवा सकता है।
इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में हुसैन ने भारत की मजबूत साख की पुष्टि की और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दोनों ही देशों से अच्छे रिश्ते हैं। मिर्ज़ा साहब ने कहा, “भारत एक महान देश है। भारत की प्रोफाइल इतनी मजबूत है कि मोदी जी का एक टेलीफोन कॉल इज़रायल और ईरान दोनों को जाए और रुकने को कहे, तो यह रुक जाएगा। एक फोन कॉल।”
उन्होंने आगे कहा, “मोदी जी 10 दिन पहले इज़रायल में थे। उनका ईरान के साथ भी बहुत अच्छा रिश्ता है। भारत ईरान का सबसे बड़ा तेल खरीदार है। ऐसे में सीधी सी बात है कि मोदी जी का एक फोन कॉल समस्या सॉल्व कर देगा।”
प्रधानमंत्री की साख पर भरोसा
पूर्व राजदूत को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मजबूत साख पर भरोसा है। मिर्ज़ा का मानना है कि पीएम मोदी का दोनों तरफ सम्मान है। इज़रायल के साथ मोदी जी के हाल के दौरे और ईरान के साथ भारत के पुराने रिश्ते की वजह से उनकी बात दोनों सुन सकते हैं। उन्होंने कहा कि वो भारतीय लीडरशिप पर बहुत भरोसा करते हैं।
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इसके साथ ही उन्होंने भारतीयों की तारीफ भी की। यूएई में 35 लाख से ज्यादा भारतीय रहते हैं। मिर्ज़ा ने कहा कि ये लोग पिछले 70-80 साल से वहां इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रेड और बिजनेस में मदद कर रहे हैं। वो चाहते हैं कि भारत की लीडरशिप इस युद्ध को रोककर अपने लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करे।
खुद न्यूट्रल रहेगा यूएई
हालांकि मिर्जा का स्पष्ट कहना है कि यूएई इस युद्ध में नहीं फंसना चाहता। उन्होंने बताया कि यूएई ने न तो इज़रायल को और न ही ईरान को अपनी ज़मीन से हमले करने की इजाज़त दी है। उनका कहना था, “हमने अपनी तरफ से ईरान के खिलाफ कोई एक्टिविटी नहीं होने दी। यह पक्का है।” कुवैत और कतर जैसे दूसरे गल्फ देशों ने भी ऐसा ही किया है। उनका ये भी कहना है कि यूएई ईरान का पड़ोसी है और अब्राहम एकॉर्ड्स के तहत इज़रायल का सहयोगी भी है। इसलिए वो दोनों के बीच बातचीत कराने में मदद कर सकता है, लेकिन खुद युद्ध में शामिल नहीं होना चाहता।

















