हर वक्त चौधराहट दिखाने वाला चीन अचानक से हिंदी चीनी भाई-भाई वाली बात करने लगा! आखिर क्यों? क्या उसे मिडिल ईस्ट संघर्ष से खौफ महसूस होने लगा है या फिर ऊर्जा सप्लाई बाधित होने से सांसे गले में अटक गई हैं? ये सारे सवाल इसलिए, क्योंकि चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने आज बीजिंग में भारत के साथ रिश्तों को सुधारने की बात कह दी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे को दुश्मन या खतरा नहीं, बल्कि साथी और मौका मानना चाहिए।
क्या कहा वांग यी ने
वांग यी ने कहा, “चीन और भारत महत्वपूर्ण पड़ोसी हैं। दोनों ग्लोबल साउथ के बड़े देश हैं, हमारी संस्कृतियां गहरी जुड़ी हुई हैं और कई साझे हित हैं। दोनों देशों के बीच भरोसा और सहयोग से आम विकास होगा, जबकि अलगाव या टकराव एशिया के उत्थान के लिए ठीक नहीं है।” उन्होंने जोर दिया कि रिश्ते अब सामान्य ट्रैक पर लौट आए हैं और दोनों तरफ से सहयोग बढ़ाने की कोशिश हो रही है।
भारत को लेकर यी का कहना था कि दोनों देशों को एक-दूसरे को सहयोगी मानना चाहिए, प्रतिद्वंद्वी नहीं। सीमा क्षेत्र में शांति और स्थिरता, विकास और एशिया के पुनरुत्थान के लिए आपसी भरोसे की दलील भी चीनी विदेश मंत्री ने दी। वो अलग बात है कि हर बार भरोसे का खून खुद चीन ने ही किया है।
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मिडिल ईस्ट संकट क्यों बन रहा वजह
चीन की ये बातें ऐसे समय में आई हैं जब पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में संघर्ष तेज चल रहा है। चीन वहां अमेरिकी दबाव को काउंटर करने के लिए भारत और रूस जैसे देशों से रिश्ते मजबूत करना चाहता है। हाल के दिनों में अमेरिका-इजरायल की तरफ से ईरान पर हमले और वहां के सुप्रीम लीडर की मौत जैसी घटनाओं ने स्थिति को और गंभीर बनाया है। चीन ने कई देशों के विदेश मंत्रियों से फोन पर बात की और तुरंत सैन्य कार्रवाई रोकने, बातचीत शुरू करने की अपील की है।
SCO बैठक में करीब आए थे भारत-चीन
अगर दोनों देशों के हालिया संपर्कों पर बात करें तो अगस्त 2025 में दोनों देशों के बीच आधिकारिक बात हुई थी। वांग यी ने तियानजिन में पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात का जिक्र किया, जो कजान समिट के बाद हुई थी। इसके साथ ही यी ने BRICS पर जोर दिया। इस साल (2026) भारत BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और अगले साल चीन करेगा।

















