इसे बेशर्मी से अधिक कुछ और नहीं कहा जा सकता है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जिस चीन ने पाकिस्तान का साथ दिया, अब वही ये भी दावा कर रहा है कि उसने भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाने में मध्यस्थता की। इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने भी ऐसी ही बात कही थी। जबकि, भारत सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध समाप्ति में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी।
लेकिन अब चीन भी अपनी चालाकी दिखा रहा है। उसके विदेश मंत्री वांग यी ने बीजिंग में एक संगोष्ठी में कहा कि इस साल चीन ने कई गर्मागर्म मुद्दों पर मध्यस्थता की, जिसमें भारत और पाकिस्तान के बीच का तनाव भी शामिल है। उनका कहना था कि चीन ने “स्थानीय युद्धों और सीमा विवादों” को सुलझाने के लिए अपनी नीति अपनाई और कई जगहों पर सफलता मिली।
क्या था ऑपरेशन सिंदूर?
ये सब मई 2025 की बात है। 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक भयानक आतंकी हमला हुआ था। हमलावरों ने लोगों से धर्म पूछा और 26 निर्दोष नागरिकों की हत्या कर दी। भारत ने इसे पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद माना। इसके जवाब में 7 मई को भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। इस ऑपरेशन में पाकिस्तान और PojK में आतंकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए। शुरुआत में नौ जगहों को निशाना बनाया गया। बाद में पाकिस्तान ने चीन और तुर्किए से मिले हथियारों के जरिए पलटवार की कोशिश की। इसके बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों को भी तबाह कर दिया।
इसे भी पढ़ें: ईरान में खामनेई के खिलाफ प्रदर्शन: “तानाशाह मुर्दाबाद” के नारे, महंगाई और हिजाब से तंग लोग सड़कों पर
चीन की भूमिका पर सवाल क्यों?
चीन ने हमेशा से पाकिस्तान का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर रहा है। पाकिस्तान का 81 फीसदी से ज्यादा मिलिट्री इक्विपमेंट चीन से आता है। ऑपरेशन के दौरान भी चीन पर पाकिस्तान को खुफिया जानकारी, सैटेलाइट सपोर्ट और हथियार देने का आरोप लगा। अमेरिकी रिपोर्ट्स ने कहा कि चीन ने इस संघर्ष को “लाइव लैब” की तरह इस्तेमाल किया ताकि अपने हथियारों का टेस्ट कर सके। 7 मई को ही चीन ने बयान दिया था कि भारत के हमले “खेदजनक” हैं और दोनों पक्ष संयम बरतें। लेकिन अब वांग यी कह रहे हैं कि चीन ने तनाव कम कराने में मदद की।
भारत का साफ रुख
भारत ने शुरू से ही किसी तीसरे देश की मध्यस्थता को नकारा है। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि 10 मई को दोनों देशों के डीजीएमओ (डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस) के बीच फोन पर बात हुई और सीजफायर हुआ। पाकिस्तान की तरफ से अनुरोध पर ये बातचीत हुई, लेकिन पूरी तरह द्विपक्षीय थी। भारत बार-बार दोहराता है कि भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत में कोई तीसरा पक्ष नहीं चाहिए।
वांग यी ने क्या-क्या और कहा?
वांग यी ने अपनी स्पीच में कई मुद्दों का जिक्र किया – उत्तरी म्यांमार, ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम, फिलिस्तीन-इजरायल, कंबोडिया-थाईलैंड का हालिया विवाद। उनका दावा है कि चीन ने इन सबमें “हॉटस्पॉट” सुलझाए। ये दावा ट्रंप के उन बयानों के बाद आया है, जिनमें उन्होंने भी क्रेडिट लेने की कोशिश की थी। लेकिन भारत ने दोनों ही दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।

















