दुनिया में उथल-पुथल के बीच अंतरराष्ट्रीय राजनीति में परमाणु अस्थिरता और हथियारों की होड़ बढ़ रही है। हाल के दिनों में कई बयान और घटनाओं ने यह संकेत दिए हैं कि परमाणु हथियार कार्यक्रमों को लेकर दुनिया में तनाव बढ़ रहा है और अपनी‑अपनी रणनीति के अनुसार देश कदम उठा रहे हैं। अमेरिका ने हाल ही में चीन पर आरोप लगाया है कि उसने 22 जून, 2020 को चुपके से परमाणु परीक्षण किया।
इसमें उसने गुप्त तकनीक (डिकपलिंग तकनीक) का उपयोग किया, ताकि वह अपनी गतिविधियों को सेमीस्मिक निगरानी से छुपा सके। अमेरिका का कहना है कि इस तकनीक से परीक्षण के दौरान उत्पन्न भूकंपीय संकेत कम महसूस होते हैं। हालांकि, चीन ने इन आरोपों को पूरी तरह से निराधार व झूठा बताया है और कहा है कि वह परमाणु परीक्षण प्रतिबंधों का सम्मान करता है तथा व्यापक परमाणु परीक्षण वर्जन संधि के मूलभूत उद्देश्यों का पालन करता है।
वहीं, ईरान पर हमले के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अन्य देशों के परीक्षण कार्यक्रमों के कारण उन्होंने अमेरिका के युद्ध विभाग को समान आधार पर अपने परमाणु हथियारों का परीक्षण शुरू करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास किसी भी अन्य देश की तुलना में अधिक परमाणु हथियार हैं, रूस दूसरे स्थान पर है और चीन काफी पीछे तीसरे स्थान पर है। अमेरिका ने 1992 के बाद से कोई परमाणु परीक्षण नहीं किया था।
ट्रंप ने दक्षिण कोरिया में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिन से मुलाकात से ठीक पहले सोशल मीडिया पर यह लिखा। उनका यह बयान वैश्विक परमाणु नीति और सामरिक संतुलन को लेकर है। कुछ दिनों पहले ट्रंप ने रूस के नए परमाणु मिसाइल परीक्षण की निंदा की थी, जबकि रूस ने दावा किया कि उसके परीक्षण ‘परमाणु नहीं’ थे। यह सिर्फ अभ्यास था। हालांकि, इस बयान से वैश्विक सुरक्षा रूपरेखा में अस्थिरता बढ़ी है, क्योंकि रूस और अमेरिका के बीच परमाणु नियंत्रण समझौतों का प्रभाव कम होता दिख रहा है।
यूक्रेन‑रूस संघर्ष और वैश्विक तनाव को देखते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि फ्रांस अपने परमाणु हथियारों को विस्तारित करेगा और यूरोपीय सहयोगियों के साथ मिलकर मजबूत परमाणु प्रत्यावर्तन नीति अपनाएगा। मैक्रों के अनुसार, उन्होंने यह कदम रूस और चीन को ध्यान में रखते हुए यूरोप की सुरक्षा के लिए उठाया है। नाटो के जनरल सेक्रेटरी ने इस नीति का समर्थन करते हुए कहा कि यह यूरोपीय सुरक्षा को मजबूत करेगा। हालांकि उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिका की ‘परमाणु छतरी’ अभी भी अनिवार्य सुरक्षा गारंटी है।
इन सभी बयानबाजियों और आरोपों से संकेत मिलता है कि दुनिया में परमाणु हथियारों की होड़ फिर से बढ़ रही है। अमेरिका, रूस, चीन जैसे परमाणु शक्तियों के बीच आरोप‑प्रत्यारोप और परीक्षण‑संबंधित अनिश्चितता से वैश्विक अप्रसार प्रयास और हथियार नियंत्रण समझौतों पर दबाव बढ़ा है। कई सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय तनाव और क्षेत्रीय अस्थिरता भी बढ़ सकती है।
















