नई दिल्ली (हि.स.) । भारत में नकली और घटिया दवाओं के बढ़ते खतरे पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने नई दिल्ली में एक उच्च स्तरीय ‘ओपन हाउस डिस्कशन’ (ओएचडी) का आयोजन किया। बैठक में विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि यदि इन नियामक चुनौतियों का समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो यह स्थिति एक बड़े ‘मानवीय संकट’ का रूप ले सकती है।
जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार का उल्लंघन
बैठक की अध्यक्षता करते हुए एनएचआरसी सदस्य न्यायमूर्ति (डॉ.) बिद्युत रंजन सारंगी ने कहा कि नकली और मिलावटी दवाएं सीधे तौर पर ‘जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार’ का उल्लंघन हैं। उन्होंने कहा, “भारत जैसे विशाल देश में खंडित नियामक प्रणाली खतरनाक हो सकती है। हमें इस मुद्दे के समाधान के लिए समन्वित और बहुक्षेत्रीय कार्रवाई की आवश्यकता है।”
नकली दवाओं के आपराधिक पहलू पर प्रकाश
आयोग के महासचिव भरत लाल ने बताया कि नकली दवाएं आपराधिक गतिविधियों के तहत बनाई जाती हैं जिनका निर्माता अज्ञात होता है। इन्हें पकड़ने के लिए पुलिस जांच की जरूरत होती है। अधिकृत निर्माताओं द्वारा बनाई गई घटिया दवाएं गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरतीं।
सरकारी नमूनों में 10 प्रतिशत दवाएं घटिया
उन्होंने खुलासा किया कि सरकारी नमूनों में से लगभग 10 प्रतिशत दवाएं घटिया पाई गई हैं, जो एक चिंताजनक आंकड़ा है। उन्होंने अक्टूबर 2025 में दूषित कफ सिरप से हुई बच्चों की मौत का उदाहरण देते हुए बताया कि आयोग ऐसी घटनाओं पर स्वतः संज्ञान लेकर राज्यों को नोटिस जारी कर रहा है।
दवा उद्योग में जवाबदेही तंत्र की मांग
आयोग की सदस्य विजया भारती सयानी ने इस मुद्दे के मानवीय पक्ष को साझा करते हुए बताया कि कैसे उनके परिवार के एक सदस्य को घटिया दवाओं के कारण अपनी दृष्टि गंवानी पड़ी। उन्होंने दवा उद्योग में अटूट जवाबदेही तंत्र स्थापित करने की मांग की।
विशेषज्ञों और अधिकारियों की उपस्थिति
इस मौके पर खाद्य एवं औषधि नियंत्रक प्रशासन (एफडीसीए) के उपायुक्त डॉ. एनआर सैयद, एम्स कल्याणी के अध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) योगेंद्र कुमार गुप्ता, एएसपीए के अध्यक्ष अंकित गुप्ता, एफओपीई के नियामक सलाहकार नरेंद्र आहूजा, पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (बीपीआर एंड डी) के उप निदेशक डॉ. इलियास केपीए सहित राज्य सरकारों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी नियामक कानून प्रवर्तन अधिकारी संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ और दवा क्षेत्र के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

















