छत्तीसगढ़ में बिलासपुर हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न मामले में एक स्कूल के पादरी जोसेफ धन्ना स्वामी को उम्र कैद की सजा सुनाई है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 (जैसा कि 2015 में लागू है) के तहत 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। घटना को दबाने और पीड़िता को प्रताड़ित करने वाली दो अन्य महिला कर्मचारियों को सात साल की जेल और प्रत्येक को 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है।
यह मामला कोरिया जिले के ज्योति मिशन स्कूल से जुड़ा है, जहां स्कूल के पादरी पर वर्ष 2015 में चौथी कक्षा की छात्रा ने दुष्कर्म का आरोप लगाया था। निचली अदालत ने साक्ष्यों में संदेह बताते हुए जोसेफ समेत तीनों दोषियों को बरी कर दिया था, लेकिन हाईकोर्ट ने फास्ट ट्रैक कोर्ट बैकुंठपुर के फैसले को पलट दिया।
क्या था मामला?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जोसेफ धन्ना स्वामी पर कोरिया के सरभोका स्थित ज्योति मिशन स्कूल के छात्रावास में रहने वाली कक्षा चार (नौ वर्षीय) की छात्रा ने 9 सितंबर, 2015 को दुष्कर्म का आरोप लगाया था। पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में बताया था कि वह रात में बाथरूम गई थी, जहां नशीला पाउडर छिड़का हुआ था, जिससे उसे चक्कर आने लगा। इसके बाद वह अपने कमरे में जाकर सो गई, तभी पादरी ने सोते समय उसके साथ दुष्कर्म किया। सुबह इसकी शिकायत जब उसने स्कूल की सिस्टर फिलोमिना और किसमरिया से की, तो उन्होंने मदद करने के बजाय छड़ी से उसकी पिटाई की और इस संबंध में किसी को कुछ न बताने की धमकी दी। लड़की के परिवार की शिकायत के बाद पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
बताया जा रहा है कि 9 जनवरी, 2017 को बैकुंठपुर फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने तीनों दोषियों को बरी कर दिया था। लेकिन राज्य सरकार ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलट दिया। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट ने पीड़िता के ठोस बयानों और मेडिकल साक्ष्यों को तकनीकी आधार पर खारिज कर गलत फैसला सुनाया था। अपने फैसले में हाईकोर्ट ने डॉक्टर की मेडिकल रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें पीड़िता के निजी अंगों पर गंभीर चोटों और सूजन की पुष्टि हुई थी। फोरेंसिक रिपोर्ट में पीड़िता के कपड़ों पर स्पर्म पाए गए थे, जो अपराध की पुष्टि करते हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि दुष्कर्म पीड़िता की गवाही अपने आप में पूर्ण है और उसे किसी अन्य स्वतंत्र गवाह के समर्थन की आवश्यकता नहीं है। हाईकोर्ट ने तीनों दोषियों को दो सप्ताह के भीतर फास्ट ट्रैक कोर्ट में सरेंडर करने का आदेश दिया है। ऐसा नहीं करने पर पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजेगी।

















