केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह सीमांचल के दौरे पर हैं. सीमांचल लम्बे समय से कांग्रेस पार्टी और इसके सहयागियों के लिए राजनीतिक चरागाह के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा हैं. घुसपैठ इस इलाके का लम्बे समय से ज्वलंत समस्या हैं मगर कांग्रेस पार्टी, राजद और इसके सहयोहियो द्वारा इस समस्या के आंख मूंद लिया गया हैं क्योंकि घुसपैठ उनके राजनीति को मदद करता हैं.
2019 लोकसभा चुनाव और किशनगंज सीट
2019 के लोकसभा के चुनाव में इंडि गठबंधन महज एक सीट जीतने में कामयाब हुई थी. इस गठबंधन की ओर से कांग्रेस पार्टी ने 2019 में केवल किशनगंज लोकसभा की सीट ही जीत सकी थी. कांग्रेस पार्टी ने अब तक किशनगंज लोकसभा की सीट को 10 बार जीत चुकी हैं. 2009 के लोकसभा चुनाव से कांग्रेस पार्टी लगातार इस सीट पर जीत दर्ज़ कर रही हैं.
1989 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की स्थिति
1989 के लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस पार्टी वर्तमान बिहार के 40 सीटों में दो सीट किशनगंज और नालंदा लोकसभा की सीट जीती थी. कांग्रेस पार्टी किशनगंज सीट कठिनतम दौर में भी जितने में सफलता प्राप्त किया हैं.
लालू यादव और सीमांचल की राजनीति
सीमांचल इलाके को कांग्रेस पार्टी की सहयोगी लालू यादव भी अपनी राजनीति को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल करते रहे हैं. 1991 के लोकसभा चुनाव में सीमांचल के कटिहार लोकसभा सीट से लालू यादव की पार्टी जनता दल ने बिहार के तत्कालीन राज्यपाल मोहम्मद यूनुस सलीम को अपना उम्मीदवार बनाया था.ये देश की राजनीति में एक प्रकार का अनोखा मौका था जब कोई राज्यपाल उसी राज्य के सत्तारूढ़ दल से लोकसभा का उम्मीदवार बन जाए. यूनुस सलीम का जन्म उत्तर प्रदेश के लखनऊ जिले के महोना में हुआ था और जनता दल के विश्वनाथ प्रताप सिंह सरकार द्वारा उनको बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया गया था. यूनुस सलीम सांसद बनाने के बाद पार्टी तोड़कर कांग्रेस पार्टी में शम्मिल हो गए थे. यूनुस सलीम के जैसे मिलता जुलता एक राजनीतिक प्रयोग तब देखने को मिला था जब उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल रोमेश भंडारी ने यह बयान जारी किया था की वो समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा सदस्य बन सकते हैं.
1996 लोकसभा चुनाव और मुफ़्ती मोहम्मद सईद
1996 के लोकसभा के चुनाव में लालू यादव की तत्कालीन पार्टी जनता दल ने देश के पूर्व गृह मंत्री वो जम्मू कश्मीर के नेता मुफ़्ती मोहम्मद सईद को पार्टी का उम्मीदवार बनाया था. मगर सईद चुनाव हार गए थे.विदित हो की सईद 1989 ओर 1991 का लोकसभा चुनाव उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर सीट से लड़े थे. 1989 में जीतकर देश के गृह मंत्री बने थे वही 1991 में इस सीट से चुनाव हार गए थे. मगर कटिहार से 1996 में हारने के बाद सईद कभी भी जम्मू कश्मीर के बाहर से चुनाव नहीं लड़े.
राहुल गांधी और किशनगंज सीट
2019 में राहुल गांधी अपने संसदीय लोकसभा सीट अमेठी के अलावे एक अन्य सीट की तलाश कर रहे थे उस समय भी किशनगंज लोकसभा की सीट उनके सूचि में वायनाड के बाद दूसरे नंबर पर था.
ओवैसी और सीमांचल की नई राजनीतिक चुनौती
कांग्रेस और राजद की राजनीति चरागाह को अब असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन भी इस इलाके ने अपना हाथ आजमाना शुरू कर दिया हैं. असम में बदरुद्दीन अजमल जिस प्रकार की राजनीति निचले असम इलाके में करते हैं उसी तौर पर ओवैसी भी सीमांचल में अपनी राजनीति को धार देना चाह रहे हैं. ओवैसी की राजनीति को कुंद करने के लिए सीमांचल में कांग्रेस पार्टी केरल के अपने सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को इस्तेमाल करने पर विचार कर रही हैं.
















