बांग्लादेश से लगी सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए भारत सरकार युद्ध स्तर पर कार्य कर रही है। इसी क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बीते दिन सिलीगुड़ी कॉरिडोर में बीएसएफ के जुमागाछ बॉर्डर आउटपोस्ट पर गए। उन्होंने कहा कि सरकार देश की सीमाओं को और मजबूत बनाने के लिए “स्मार्ट बॉर्डर्स” की योजना पर काम कर रही है। इस पूरे क्वाड्रेंगुलर सिक्योरिटी ग्रिड प्रोजेक्ट को सबसे पहले बंगाल में जमीनी स्तर पर शुरू किया जाएगा।
सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के निर्देश
सिलीगुड़ी में बीएसएफ, एसएसबी और आईटीबीपी के अधिकारियों के साथ कई बैठकें हुईं। शाह ने अधिकारियों को कहा कि लंबित फेंसिंग का काम तेजी से पूरा करें। खासतौर पर संवेदनशील और रणनीतिक इलाकों में तीन लेयर वाली फेंसिंग (ट्रिपल-लेयर फेंसिंग) लगाएं।
जुमागाछ आउटपोस्ट पर उन्होंने देश में बनी आधुनिक तकनीकों का जायजा लिया। इनमें शामिल हैं:
- रेडियो आधारित फेंस ब्रेक डिटेक्शन सिस्टम — जब कोई फेंस को छेड़ता है तो तुरंत पहले से रिकॉर्डेड मैसेज प्रसारित होकर जवानों को अलर्ट कर देता है।
- इन्फ्रारेड अलार्म सिस्टम — नदियों, नालों और फेंसिंग में गैप वाले मुश्किल इलाकों में काम करता है। जब इन्फ्रारेड बीम टूटती है तो पहले से चेतावनी मिल जाती है।
- नया गेट मैनेजमेंट सिस्टम — भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर आम नागरिकों और किसानों की आवाजाही आसान और सुरक्षित बनाने के लिए।
फाउंडेशन स्टोन और फेंसिंग परियोजना
शाह ने तीन बीएसएफ प्रोजेक्ट्स की वर्चुअल नींव रखी, जिनकी कुल लागत 47 करोड़ रुपये है। साथ ही दो नए आउटपोस्ट्स के लिए नई अधिग्रहित जमीन पर 4 किलोमीटर लंबी बॉर्डर फेंसिंग (30 करोड़ रुपये) की नींव भी रखी। इस मौके पर बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी भी उनके साथ थे।
फेंसिंग और जमीन का मुद्दा
उत्तरकन्या में बॉर्डर सुरक्षा बैठक में शाह ने बीएसएफ को निर्देश दिया कि फेंसिंग का काम और तेज करें। जरूरत पड़े तो आधुनिक मशीनरी का इस्तेमाल करें। बंगाल सरकार ने पहले ही 9 जिलों में 172.6 किलोमीटर लंबे पोरोस बॉर्डर के लिए करीब 1,025 एकड़ जमीन बीएसएफ को सौंप दी है। लेकिन चिकन नेक इलाके में इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने के लिए और जमीन की जरूरत है, ऐसा बीएसएफ, एसएसबी और आईटीबीपी ने बताया।
चिकन नेक (सिलीगुड़ी कॉरिडोर): यह 17-22 किलोमीटर चौड़ी संकर पट्टी है जो मुख्य भारत को आठ पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ती है। इसके चारों तरफ नेपाल, बांग्लादेश और भूटान हैं।
समन्वय और अन्य फैसले
बैठक में बंगाल के डीजीपी सिद्धिनाथ गुप्ता, बीएसएफ डीजी प्रवीण कुमार, नॉर्थ बंगाल आईजी सुकेश जैन और अन्य सीनियर अधिकारी मौजूद थे।
- बीएसएफ और पुलिस मिलकर बॉर्डर इलाकों में अवैध कब्जे हटाएंगे और अवैध जमावड़े रोकेंगे।
- लोकल पुलिस बीएसएफ को स्थानीय लोगों से बातचीत करने में मदद करेगी ताकि बॉर्डर क्राइम और तस्करी पर लगाम लगे।
- राज्य प्रशासन सभी केंद्रीय एजेंसियों के साथ नियमित समन्वय और समीक्षा बैठकें करेगा।

















