महाराष्ट्र के ठाणे जिले में गरीब महिलाओं के अंडाणु निकालकर बेचने वाले रैकेट का भंडाफोड़ तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की आशंका जताई जा रही है। महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने आश्वासन दिया है कि मामले की गहनता से जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने इस घटना को गंभीरता से लिया है। दो से तीन दिनों में शुरुआती रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है। रैकेट में आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं के शारीरिक शोषण की पुष्टि होने पर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और एजेंसियां के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें उन्हें ब्लैकलिस्ट करना और दूसरे कानूनी कदम शामिल होंगे।
तीन महिलाएं गिरफ्तार, बदलापुर से चलाया जा रहा था रैकेट
पुलिस अधिकारियों ने शनिवार (21 फरवरी) को बताया कि इस अवैध कारोबार में लिप्त तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया गया है। यह गिरोह बदलापुर पूर्व के जोवेली इलाके में एक रेजिडेंशियल अपार्टमेंट और एक सोनोग्राफी केंद्र से संचाालित किया जा रहा था। गरीब महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले रैकेट द्वारा उन्हें हर मासिक चक्र के लिए 25 हजार से 30 हजार रुपये तक का लालच दिया जाता था और बार-बार अंडाणु बेचने के लिए उनका इस्तेमाल किया जाता था, जिससे उनका शारीरिक शोषण होता था। पीड़ितों को अंडाणु उत्पादन बढ़ाने के लिए हार्मोनल इंजेक्शन भी दिए जाते थे और उन्हें सोनोग्राफी के लिए जाया जाता था।
मोबाइल से मिले साक्ष्य
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़ितों को आईवीएफ (IVF) सेंटर ले जाया जाता था, जहां सर्जरी करके उनके अंडाणु निकाले जाते थे और बाद में उन्हें लाखों रुपयों में बेच दिया जाता था। बताया जा रहा है कि करीब 20 महिलाएं इस रैकेट का शिकार बनी हैं। एक पीड़िता ने ठाणे की उप-जिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. ज्योत्सना सावंत को इस मामले की सूचना दी, जिसके बाद सुलक्षणा के नैनो सिटी बिल्डिंग स्थित आवास पर छापेमारी की गई। आरोपितों के मोबाइल से पुलिस ने सोनोग्राफी रिपोर्ट, गर्भधारण में इस्तेमाल किए जाने वाले इंजेक्शनों की तस्वीरें, नकली दस्तावेज और वित्तीय लेनदेन के साक्ष्य बरामद किए गए हैं।
रैकेट में कई बड़े नामों के आने की संभावना
उल्हासनगर पुलिस के उपायुक्त सचिन गोरे ने बताया कि 20 से अधिक महिलाओं को शिकार बनाया गया है। आईवीएफ केंद्रों, डॉक्टरों, और अस्पतालों की संलिप्तता की जांच की जा रही है। इस रैकेट में कई बड़े नामों के आने की संभावना है। नेटवर्क का पूरा पता लगाने के लिए आगे की जांच चल रही है। आरोपितों के खिलाफ सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी कानून और भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज किया गया है।
भारत में कौन कर सकता है अंडाणु दान
देश में सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी अधिनियम और सरोगेसी कानून 2021 के नियमों के तहत केवल विवाहित महिला ही अंडाणु दान कर सकती है। अंडाणु दान करने वाली की उम्र 23 से 35 साल के बीच होनी होनी चाहिए। महिला सिर्फ एक बार ही अंडाणु दान कर सकती है। जिन महिलाओं को गर्भधारण करने में समस्या होती है, उन्हें अच्छे अंडाणु की आवश्यकता होती है। ऐसे में इसे निस्वार्थ भाव से जरूरतमंद महिलाओं को दान किया जा सकता है। अंडाणु की बिक्री को इस कानून में अपराध माना गया है।

















