नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मामले की सुनवाई करते हुए ‘तार्किक विसंगति’ सूची में शामिल लोगों द्वारा दायर दावों का निपटारा करने के लिए राज्य में न्यायिक अधिकारियों को तैनात करने का आदेश दिया है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस से अनुरोध किया कि वह सेवारत और रिटायर्ड एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज स्तर के न्यायिक अधिकारियों को एसआईआर प्रक्रिया के लिए उपलब्ध कराएं।
उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के कलेक्टर और एसपी को निर्देश दिया कि वे न्यायिक अधिकारियों को हर संभव मदद करें ताकि ये प्रक्रिया पूरी की जा सके। कोर्ट ने राज्य के डीजीपी को निर्देश दिया कि वे एसआईआरके काम में लगे अधिकारियों को मिलने वाली धमकियों पर की गई कार्रवाई के संबंध में हलफनामा दाखिल करें।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि बंगाल में बड़े दुर्भाग्यपूर्ण हालत है जहां दो संवैधानिक संस्थाएं निर्वाचन आयाेग और पश्चिम बंगाल सरकार एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। दोनों के बीच विश्वास की कमी साफ नजर आती है। इसके चलते एसआईआरप्रकिया अटकी हुई है। इस असाधारण हालात के चलते हमारे पास यह फैसला लेने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं रह गया है।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि एसआईआरसे जुड़ी सभी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गयी हैं ऐसे में राज्य में वोटर्स की अंतिम सूची 28 फरवरी तक प्रकाशित करने की अनुमति दी जाती है। कोर्ट ने कहा कि निर्वाचन आयोग 28 फरवरी के बाद भी पूरक वोटर लिस्ट प्रकाशित कर सकती है।
उच्चतम न्यायालय ने 9 फरवरी को राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वो निर्वाचन आयोग के लिए काम कर रहे 8 हजार से ज्यादा कर्मचारियों को जिला निर्वाचन अधिकारी को रिपोर्ट करना सुनिश्चित करें। 4 फरवरी को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद उच्चतम न्यायालय में दलीलें रखीं। ममता बनर्जी ने कहा था कि उन्हें कहीं इंसाफ नहीं मिल रहा है। इंसाफ दम तोड़ रहा है।
ममता ने कहा कि उन्होंने निर्वाचन आयोग को छह पत्र लिखे लेकिन आयोग ने पत्रों के जवाब तक नहीं दिया जिसके बाद उन्हें कोर्ट आना पड़ा, मैं न्याय के लिए कहां जाऊं। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि सिर्फ पश्चिम बंगाल को ही टारगेट क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब असम और अन्य उत्तरी राज्य, जहां चुनाव होने वाले हैं, वहां एसआईआरनहीं कराया जा रहा, तो फिर सिर्फ पश्चिम बंगाल में ही यह प्रक्रिया क्यों अपनाई जा रही है। दूसरे राज्यों में ऐसी शर्ते नहीं रखी जाती।
ममता बनर्जी ने राज्य में एसआईआरप्रक्रिया को चुनौती दी है। इस मामले में निर्वाचन आयोग ने ममता बनर्जी पर एसआईआरकी प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। आयोग ने उच्चतम न्यायालय में दाखिल हलफनामे में कहा है कि ममता बनर्जी ने एसआईआरकी प्रक्रिया को बाधित करने के लिए भड़काऊ भाषण दिया।
हलफनामे में निर्वाचन आयोग ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में एसआईआरसे जुड़े अधिकारियों के खिलाफ हिंसा और धमकियों का माहौल है, जो अन्य राज्यों से अलग है। आयोग ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार, मुख्यमंत्री और प्रशासन चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ काम कर रहे हैं, जिससे इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया को पूरा करना मुश्किल हो रहा है।
















