Age of Consent: पॉक्सो कानून के तहत सहमति की उम्र 18 से घटाकर 16 वर्ष करने का कड़ा विरोध; SC में हस्तक्षेप याचिका दायर
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Age of Consent: पॉक्सो कानून के तहत सहमति की उम्र 18 से घटाकर 16 वर्ष करने का कड़ा विरोध; SC में हस्तक्षेप याचिका दायर

देश में बच्चों को यौन अपराधों से बचाने वाले सख्त कानून पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत सहमति की कानूनी उम्र को 18 वर्ष से घटाकर 16 वर्ष करने की मांगों और सुझावों का सुप्रीम कोर्ट में पुरजोर विरोध किया जा रहा है।

Written byMahak SinghMahak Singh
Jul 17, 2026, 03:35 pm IST
inभारत

नई दिल्ली: देश में बच्चों को यौन अपराधों से बचाने वाले सख्त कानून पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत सहमति की कानूनी उम्र को 18 वर्ष से घटाकर 16 वर्ष करने की मांगों और सुझावों का सुप्रीम कोर्ट में पुरजोर विरोध किया जा रहा है। सामाजिक और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिकाएं दायर की हैं। सुप्रीम कोर्ट इस पर आज सुनवाई करेगा।

याचिकाकर्ताओं ने ‘नेटवर्क फॉर एक्सेस टू जस्टिस एंड मल्टीडिसिप्लिनरी आउटरीच फाउंडेशन’ द्वारा तैयार विस्तृत रिपोर्ट “इन्ट्रूज़न ऑन सिविलाइजेशन: लोअरिंग द एज ऑफ कंसेंट – एनालाइजिंग इट्स इम्पैक्ट” को रिकॉर्ड पर रखते हुए सहमति की उम्र घटाने के प्रस्ताव के खिलाफ कई तर्क दिए हैं। अपराधियों को मिलेगा कानूनी सुरक्षा कवच: याचिका में कहा गया है कि सहमति की उम्र 18 से घटाकर 16 वर्ष करने से पॉक्सो कानून का मूल उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा। इससे बाल यौन शोषण, ग्रूमिंग (बहलाना-फुसलाना), जबरन कन्वर्जन और जबरन विवाह करने वाले अपराधियों को एक आसान कानूनी ढाल मिल जाएगी, जो अपने घिनौने अपराध को “सहमति से बने रिश्ते” का रूप देकर कानून से बच निकलेंगे।

कम उम्र में शादी और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ने की आशंका

संविधान के बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन: यह कदम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 21 (जीने और गरिमा का अधिकार) और अनुच्छेद 39(f) (बच्चों को शोषण से बचाने का राज्य का कर्तव्य) के सीधे खिलाफ होगा। भारतीय सामाजिक ताना-बाना और बाल विवाह का खतरा: भारत में अभी भी बाल विवाह (NFHS-5 के अनुसार 20-24 वर्ष की 23% महिलाओं की शादी 18 वर्ष से पहले हुई) और लैंगिक असमानता एक बड़ी चुनौती है। ऐसी स्थिति में सहमति की उम्र घटाने से कम उम्र में गर्भधारण (Teenage Pregnancy), मातृ मृत्यु दर और नवजात कुपोषण का खतरा अत्यधिक बढ़ जाएगा।

यूरोपीय देशों का नकारात्मक उदाहरण: याचिका में रोमानिया और बुल्गारिया जैसे यूरोपीय देशों का हवाला दिया गया है, जहां सहमति की उम्र कम होने के कारण किशोरियों में गर्भधारण और गर्भपात की दर पूरे यूरोप में सबसे अधिक है। भारत के पास ऐसे संकट से निपटने के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचा और अनाथालय नहीं हैं। न्यूरोसाइंस (मस्तिष्क विज्ञान) का तर्क: विकासात्मक न्यूरोसाइंस के शोध बताते हैं कि मानव मस्तिष्क में निर्णय लेने और परिणामों को समझने की क्षमता 16 वर्ष की आयु के बाद तक पूरी तरह विकसित नहीं होती है।

याचिका में किए ये मुख्य आग्रह

सुप्रीम कोर्ट इस हस्तक्षेप याचिका को स्वीकार करे और याचिकाकर्ता को इस मामले में अपनी बात रखने की अनुमति दे। इस स्वतः संज्ञान याचिका (Suo Motu Petition) को पहले से लंबित एक अन्य महत्वपूर्ण मामले “निपुण सक्सेना बनाम भारत संघ” (Writ Petition Civil No. 565 of 2012) के साथ जोड़कर सुना जाए, क्योंकि दोनों में सहमति की उम्र से जुड़े समान कानूनी प्रश्न शामिल हैं।

सरकार और कोर्ट के पूर्व फैसलों का उल्लेख

याचिका में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि भारत सरकार ने खुद संसद में बार-बार यह स्पष्ट किया है कि पॉक्सो अधिनियम में सहमति की उम्र को घटाने का उनका कोई इरादा नहीं है। इसके अलावा, ‘गुलाम दीन बनाम पंजाब व हरियाणा राज्य’ मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि पर्सनल लॉ की आड़ में पॉक्सो और बाल विवाह निषेध अधिनियम (PCMA) जैसी धर्मनिरपेक्ष और केंद्रीय संहिताओं को कमजोर नहीं किया जा सकता।

ये हैं याचिकाकर्ता

स्वाति गोयल ने एडवोकेट जयदीप पति के माध्यम से, निधि शर्मा ने एडवोकेट अबैध पारिख के माध्यम से याचिक दाखिल की है। एक याचिका एडवोकेट अनुराग पी सहाय के माध्यम से दाखिल की गई है।

Topics: POCSO ActChild Marriage Prohibition Actchild sexual abusePOCSO LawAge of Consent in IndiaPOCSO Act AmendmentPrevention of Child Sexual AbuseMenace of Child MarriageTeenage PregnancyMaternal MortalityChild Rights ProtectionSupreme CourtSupreme Court POCSO Case
Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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