नई दिल्ली (हि.स.) । केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के एक कार्यक्रम में कहा कि साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी मुद्दा नहीं रह गया है बल्कि यह देश की आंतरिक सुरक्षा से सीधे तौर पर जुड़ चुका है। देश के डेटा को हर हाल में सुरक्षित करना होगा।
सीबीआई के राष्ट्रीय साइबर सम्मेलन का आयोजन
सीबीआई ने आयोजित साइबर सक्षम धोखाधड़ी से निपटने और उसके पूरे तंत्र को ध्वस्त करने के विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। सम्मेलन यहां 10 और 11 फरवरी तक चलेगा। इस अवसर पर गृह मंत्री ने सीबीआई के नए साइबर अपराध प्रकोष्ठ का उद्घाटन किया। साथ ही भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) के अंतर्गत स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (एस4सी) डैशबोर्ड की भी शुरुआत की।
साइबर अपराध से निपटने के लिए एकीकृत प्रयास जरूरी
इस मौके पर गृह मंत्री ने कहा कि यह दोनों ऐसी इकाइयां हैं, जिसमें अलग-अलग विभाग और एजेंसियां एक ही प्लेटफॉर्म पर साइबर अपराध से निपटने के लिए काम कर रही हैं। जब सभी प्रयास एक दिशा में होते हैं, तभी अपेक्षित परिणाम मिलते हैं। पिछले 11 वर्षों की भारत की डिजिटल यात्रा में साइबर सुरक्षा सबसे अहम विषय बनकर उभरी है।
डिजिटल इंडिया और बढ़ती साइबर चुनौतियां
अमित शाह ने कहा कि पहले देश में डिजिटल सेवाओं के करीब 25 करोड़ उपयोगकर्ता थे, जो अब 100 करोड़ के आंकड़े को पार कर चुके हैं। एक जीबी डेटा की कीमत में करीब 97 प्रतिशत की कमी आई है। दुनिया के हर दूसरे डिजिटल लेन-देन भारत में हो रहे हैं। 97 करोड़ से अधिक जनधन खातों और देश के संगठनों के संवेदनशील डेटा की सुरक्षा अब बड़ी चुनौती है।
बैंक फ्रॉड और साइबर अपराध पर सीबीआई की कार्रवाई
गृह मंत्री ने बताया कि हाल के वर्षों में सीबीआई ने 20 हजार करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड मामलों की जांच की है, जिनमें से 8 हजार करोड़ रुपये की राशि को फ्रीज किया गया है। इसके अलावा 12 लाख सिम कार्ड रद्द करवाए गए हैं। वर्ष 2025 तक 20 हजार 853 साइबर अपराधियों को पकड़ा गया है।
साइबर शिकायतों और फ्रॉड मामलों का आंकड़ा
उन्होंने कहा कि 30 नवंबर 2025 तक देशभर से 23 लाख 61 हजार साइबर शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें एक मामला अकेले 20 हजार करोड़ रुपये के फ्रॉड से जुड़ा था, जिसमें 8 हजार करोड़ रुपये फ्रीज किए गए। दिसंबर 2025 तक 12 लाख सिम कार्ड ब्लॉक किए जा चुके हैं।
म्यूल अकाउंट पर चिंता, हंटर ऐप तैयार
अमित शाह ने म्यूल अकाउंट (धोखाधड़ी के उद्येश्य से बनाये गए फर्जी खाते) की समस्या पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज म्यूल खाते सर्विस की तरह खरीदे और बेचे जा रहे हैं। रिजर्व बैंक और गृह मंत्रालय ने मिलकर म्यूल अकाउंट हंटर ऐप तैयार किया है, जिसे सभी सरकारी और निजी बैंकों को अपनाना चाहिए।
1930 हेल्पलाइन की प्रभावशीलता पर जोर
उन्होंने कहा कि 1930 हेल्पलाइन को और अधिक प्रभावी बनाना होगा। रिस्पांस टाइम बेहद कम होना चाहिए। यदि कोई पीड़ित समय पर कॉल करता है और कॉल रिसीव नहीं होती तथा उसका पैसा निकल जाता है, तो इससे 1930 की साख प्रभावित होती है। हर घंटे करीब 100 लोग साइबर अपराध के शिकार हो रहे हैं और जांच की गति को लगातार तेज किया जा रहा है।
आई4सी से जुड़े संस्थान और भविष्य की चेतावनी
गृह मंत्री ने बताया कि अब तक आई4सी से 795 संस्थान जुड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि सभी संस्थानों को मिलकर काम करना होगा। यदि पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए, तो साइबर अपराध भविष्य में साइबर संकट का रूप ले सकता है। उन्होंने बैंकों से अपील की कि एनपीए घटाने के साथ-साथ ग्राहक सेवा पर भी उतना ही ध्यान दिया जाए।
साइबर फ्रॉड पर सख्त कार्रवाई
अमित शाह ने कहा कि अब तक साइबर फ्रॉड से जुड़े मामलों में 8 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि बरामद की जा चुकी है। 20 हजार से अधिक साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। म्यूल खाते की खरीद-फरोख्त अब अकेले अपराधियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह संगठित अपराध का रूप ले चुकी है।
सम्मेलन में साइबर धोखाधड़ी के नए स्वरूपों पर चर्चा
सम्मेलन में साइबर धोखाधड़ी के बदलते स्वरूप, वित्तीय, दूरसंचार और मानव स्तंभ से जुड़े खतरों पर विस्तार से चर्चा की गई। साइबर अपराध की रोकथाम, जांच प्रक्रिया को मजबूत करने और पीड़ित केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया गया।
एआई, डेटा एनालिटिक्स और तकनीकी समाधान
कार्यक्रम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डेटा एनालिटिक्स के उपयोग, रियल टाइम फंड ट्रैकिंग, तेज रिपोर्टिंग और साक्ष्य संरक्षण जैसे विषयों पर भी मंथन किया गया। सम्मेलन में केंद्र और राज्य की कानून प्रवर्तन एजेंसियों, दूरसंचार विभाग, वित्तीय सेवा विभाग, भारतीय रिजर्व बैंक, बैंक, फिनटेक कंपनियों, भुगतान प्लेटफार्म और तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया।

















