गत जनवरी को जम्मू स्थित जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के परिसर में ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ : एक संवाद’ कार्यक्रम आयोजित हुआ। संघ के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत आयोजित हुए इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि ‘राष्ट्र’ भारत का शब्द है। अंग्रेजी के शब्द ‘नेशन’ और ‘राष्ट्र’ में अंतर है। ‘नेशन’ शब्द पाश्चात्य देशों से भारत में आया है और इस शब्द की उत्पत्ति जर्मन से हुई है।
इसी आधार पर चलने वाले सोवियत संघ आदि देश टूटे, लेकिन भारत में ऐसा नहीं था, क्योंकि भारत के व्यवहार में समग्रता है। इसका आधार है भारत का अध्यात्म। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान भौगोलिक और सांस्कृतिक है। अतिथि देवो भव भी भारत का ही सूत्र है। बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा ने भी इसका वर्णन भारत में आने पर किया था। उन्होंने कहा कि हिंदू कोई धर्म नहीं है, हिंदुत्व बहते हुए पानी की तरह है और इसमें कोई पूर्ण विराम नहीं है। डॉ. हेडगेवार ने कहा था कि देश के सुख में सुख मानने वाले, देश के दुख में दुखी होने वाले और देश की जय में जय करने वाले सब हिंदू हैं।
उन्होंने समविचारी संगठनों का उल्लेख करते हुए विद्या भारती का उदाहरण दिया, जिसके लगभग 14 हजार विद्यालय देशभर में चल रहे हैं। इनके माध्यम से शिक्षा के साथ समाज में देश-भक्ति भाव कैसे रखें, यह सिखाया जा रहा है। देश के वर्तमान सेना प्रमुख भी शिशु मंदिर से पढ़कर निकले हैं। डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि शताब्दी वर्ष पर संघ ने 5 कार्यों का संकल्प लिया है। इनमें सामाजिक समरसता, स्व का बोध, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्य शामिल हैं। अधिवक्ताओं की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि संघ का स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान रहा था।
पहले सरसंघचालक डॉ. हेडगेवार दो बार जेल भी गए थे। संघ के कार्यकर्ता सत्याग्रह के समय भी जेल गए थे। संघ सीधे किसी भी आंदोलन में नहीं जाता, परंतु स्वयंसेवक राष्ट्रहित में किसी भी आंदोलन में जाने को स्वतंत्र होते हैं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और सेवानिवृत्त जिला सत्र न्यायाधीश विरेंद्र सिंह भाउ ने कहा कि संघ निस्वार्थ भाव से राष्ट्रहित और समाज हित में कार्य रहा है और इसी का परिणाम है कि आज संघ 100 वर्ष का अपना सफर पूरा कर चुका है।
इस अवसर पर प्रांत संघचालक डॉ. गौतम मैंगी के अलावा बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित थे।

















