भारत-अमेरिका के बीच हाल ही में हुए ट्रेड डील में एक बड़ा सवाल ये है कि भारत अगले पांच सालों में अमेरिका से $500 बिलियन (करीब 42 लाख करोड़ रुपये) के सामान कैसे इंपोर्ट करेगा। ये कमिटमेंट काफी बड़ी है, क्योंकि अभी भारत का अमेरिका से सालाना इंपोर्ट बहुत कम है।
पिछले आंकड़े क्या कहते हैं
पिछले साल भारत ने अमेरिका से $45.5 बिलियन का सामान इंपोर्ट किया था। इस वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में ये आंकड़ा करीब $40 बिलियन पहुंच गया है। इसमें से एक बड़ा हिस्सा, यानी करीब एक पांचवां हिस्सा (लगभग $11 बिलियन), अमेरिकी क्रूड ऑयल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का था। ऑयल इंपोर्ट पिछले साल की तुलना में 35% ज्यादा हुआ। इसके अलावा $2.7 बिलियन का कोल और कोक भी आया।
सरकारी अधिकारी बताते हैं कि शुरुआत में इंपोर्ट बढ़ोतरी इन ही सेक्टर्स में होगी। भारत कुछ देशों (शायद रूस सहित) से ऑयल इंपोर्ट कम करके अमेरिकी ऑयल ले सकता है। इंडियन ऑयल कंपनियों ने पहले ही ज्यादा LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) लेने के लिए अमेरिका के साथ एग्रीमेंट साइन कर लिया है। इसी तरह इंडोनेशिया से आने वाला कोकिंग कोल अमेरिकी कोल से रिप्लेस हो सकता है, क्योंकि वो सस्ता भी है और क्वालिटी में बेहतर भी।
एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक, इंपोर्ट को $100 बिलियन सालाना तक ले जाना पहले साल में मुश्किल है, लेकिन धीरे-धीरे उस दिशा में बढ़ेगा।
हाई-टेक प्रोडक्ट्स पर फोकस
कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्टर पियूष गोयल ने कहा कि कौन से प्रोडक्ट्स से इंपोर्ट बढ़ेगा, ये इंडियन इंपोर्टर्स और अमेरिकी सेलर्स को मिलकर तय करना है। उन्होंने कहा, “अमेरिकी कंपनियों को ऐसे ऑफर देने होंगे जो इंडियन बायर्स ठुकरा न सकें।” हाई-टेक चीजें जैसे चिप्स, सेमीकंडक्टर्स, एयरप्लेन्स और उनके कंपोनेंट्स से लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी।
चुनौतियां भी हैं
लेकिन यहां कुछ बड़ी दिक्कतें हैं। Boeing जैसी कंपनियों के पास पहले से बहुत बड़े ऑर्डर पेंडिंग हैं, तो वो जल्दी कितना एक्सपोर्ट कर पाएंगी। इसी तरह चिप्स की ग्लोबल डिमांड बहुत ज्यादा है, तो इंडियन बायर्स को भी लंबी कतार में लगना पड़ेगा। कुल मिलाकर ये $500 बिलियन का टारगेट एनर्जी (ऑयल, LNG, कोल), एविएशन, टेक्नोलॉजी और हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स पर टिका है।
















