केंद्रीय वाणिज्य और औद्योगिक मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच हुए ट्रेड डील को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि इस समझौते में हमने कृषि क्षेत्र के हितों को काफी आक्रामक तरीके से आगे बढ़ाने की कोशिश की है। साथ ही डेयरी और कृषि जैसे संवेदनशील मुद्दों की पूरी तरह सुरक्षा भी की गई है।
उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में कहा, “हमारे पास करीब 30 बिलियन डॉलर के आयात हैं, लेकिन महत्वपूर्ण बात ये है कि हमारा फार्म और फिश प्रोडक्शन का एक्सपोर्ट 55 बिलियन डॉलर का है। इसलिए हमें ऑफेंसिव इंटरेस्ट भी रखना चाहिए, और हमने संवेदनशील सेक्टर्स की सुरक्षा के साथ-साथ इसी पर फोकस किया है।”
डील से भारतीय प्रोडक्ट्स को फायदा
इस ट्रेड डील से भारतीय कई प्रोडक्ट्स को अमेरिकी मार्केट में जीरो रेसिप्रोकल टैरिफ पर एंट्री मिल रही है। जैसे चाय, कॉफी, मसाले और फ्रूट्स (केला, नारियल, आम, कीवी, पपीता वगैरह)। सीफूड एक्सपोर्टर्स के लिए भी अच्छी खबर है क्योंकि रेसिप्रोकल टैरिफ घटाकर सिर्फ 18% कर दिया गया है, जिससे कॉम्पिटिशन में बेहतर मुकाबला कर पाएंगे। गोयल ने कहा कि ट्रेड तो कंपैरेटिव एडवांटेज की बात है, और अब हमारे एक्सपोर्टर्स को इस मौके का फायदा उठाना चाहिए।
डेयरी और संवेदनशील सेक्टर्स पूरी तरह सुरक्षित
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कई लोग चिंता कर रहे थे कि क्या अमेरिका से कृषि उत्पादों के आयात से हमारे किसानों को नुकसान होगा। गोयल ने कहा कि ऐसा बिल्कुल नहीं है। डील में डेयरी, मीट, पोल्ट्री, चावल, गेहूं, चीनी, सभी जीएम प्रोडक्ट्स, सोयाबीन, मक्का जैसी हाई प्रोडक्शन वाली चीजों को पूरी तरह बाहर रखा गया है जहां भारत सेल्फ-सफिशिएंट है। उन्होंने कहा, “किसान बॉडीज को भी पता है कि हमने एग्रीकल्चर की संवेदनशीलता पूरी तरह प्रोटेक्ट की है। ऐसा कोई आइटम नहीं जहां किसान को खतरा महसूस हो।”
DDGS इंपोर्ट पर सफाई
एक बड़ा मुद्दा डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स विद सॉल्युबल्स (DDGS) का था, जो एनिमल फीड में इस्तेमाल होता है और अमेरिका से आता है। कुछ लोगों को लगा कि इससे घरेलू किसानों को नुकसान होगा। गोयल ने इसे गलत बताया। भारत में एनिमल फीड की कुल खपत 500 लाख टन है, जबकि अमेरिका को सिर्फ 5 लाख टन का छोटा कोटा दिया गया है। उन्होंने कहा कि लाइवस्टॉक बढ़ रहा है (194 मिलियन गाय, 112 मिलियन भैंस, कुल 878 मिलियन), खेती की जमीन घट रही है, इसलिए फीड की जरूरत बहुत ज्यादा है। इंडस्ट्री ने खुद ये डिमांड की थी। साथ ही सोयाबीन को भी प्रोटेक्ट किया गया है, क्योंकि हम पहले से ही 5 बिलियन डॉलर का सोयाबीन ऑयल इंपोर्ट कर रहे हैं।
नॉन-टैरिफ बैरियर्स और बैलेंस
गोयल ने कहा कि नॉन-टैरिफ बैरियर्स की चिंता बेमानी है क्योंकि दोनों तरफ से ऐसे बैरियर्स नहीं हैं। अगर कहीं कोई दिक्कत आएगी तो दोनों देश मिलकर उसे सुलझाएंगे। ये डील पहला चरण है, बाद में इसे लीगली बाइंडिंग एग्रीमेंट में बदलकर और सेक्टर्स में बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि ट्रेड नेगोशिएशंस में पेशेंस जरूरी है, डेडलाइन नहीं रखनी चाहिए, और दोनों तरफ से कोई अक्रिमोनी नहीं थी। भारत ने अपनी पोजिशन मजबूती से रखी।
इस डील से बढ़ेगा निर्यात
गोयल ने जोर दिया कि डील से एक्सपोर्ट बढ़ेगा, इन्वेस्टमेंट आएगा क्योंकि प्रेडिक्टेबिलिटी और स्टेबिलिटी मिलती है। ये भारत-अमेरिका के रिश्ते को और मजबूत करने वाला कदम है, जहां दोनों तरफ विन-विन का बैलेंस बनाया गया है। किसानों और प्रोड्यूसर्स के हितों को प्राथमिकता दी गई, और ऑफेंसिव तरीके से एक्सपोर्ट मौके तलाशे गए।
















