क्या खटाई में भी पड़ सकता है भारत-अमरीका व्यापार समझौता?
August 3, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम विश्व

क्या खटाई में भी पड़ सकता है भारत-अमरीका व्यापार समझौता?

अमरीकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए विवादित टैरिफ को रद्द कर दिया है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक नीति की आलोचना की है।

Written byडॉ. अश्विनी महाजनडॉ. अश्विनी महाजन — edited by Lalit Fulara
Feb 25, 2026, 06:00 pm IST
in विश्व

अमरीकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए विवादित टैरिफ को रद्द कर दिया है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक नीति की आलोचना की है। कोर्ट ने कहा कि कानून आपातकालीन प्रावधानों के तहत राष्ट्रपति को असीमित टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता है। कोर्ट ने यह फैसला 6-3 के बहुमत से सुनाया। साफ है कि इस फैसले ने डोनाल्ड ट्रंप के दूरगामी टैरिफ एजेंडे पर काफ़ी हद तक विराम लगा दिया है।

ट्रंप द्वारा लगाए गए ऊंचे टैरिफ के मद्देनजर भारत सरकार ने अमरीका के साथ एक अंतरिम समझौता करने हेतु कदम बढ़ाया था, उसके लिए एक मसौदे हेतु सहमति दी थी। अमरीकी प्रशासन उस मसौदे से इतर भी कई बातों के बारे में बयानबाजी कर रहा था, जिसके कारण एक ओर भ्रम फैल रहा था और भारत सरकार की भी आलोचना हो रही थी। अब चूँकि सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के अधिकतर टैरिफ को ख़ारिज कर दिया है, उसके साथ ही भारत द्वारा इस मसौदे के अनुसार अंतरिम समझौते हेतु बातचीत को टाल दिया गया है। माना जा रहा है कि भारत के नीतिकार और व्यापार वार्ताकार परिस्थिति पर नज़र रखे हुए हैं।

जब से राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी दूसरी पारी शुरू की है, दुनिया भर में आर्थिक उथल-पुथल मची हुई है। अमरीका समेत पूरी दुनिया राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ के नखरे झेल रही है। न सिर्फ उनके विरोधी, बल्कि उनके समर्थक भी राष्ट्रपति ट्रंप की पॉलिसी की आलोचना करते दिख रहे हैं। टैरिफ नीति को राष्ट्रपति ट्रंप की सबसे बड़ी गलती बताया जा रहा है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के लगाए गए ज़्यादातर टैरिफ को रद्द कर दिया है, लेकिन यह समझना ज़रूरी है कि अमरीका के लिए दुनिया भर के देशों पर ज़्यादा टैरिफ लगाना सही क्यों नहीं था?

सब जानते हैं कि अमरीका एक उच्च लागत वाली अर्थव्यवस्था रही है। एक समय था जब अमरीका में उद्योग काफ़ी उन्नत और बड़ी संख्या में थे, और फल-फूल रहे थे। कारें, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल सामान, टेक्सटाइल और केमिकल्स जैसे कई उत्पाद अमरीका में बनते थे। उन दिनों, अमरीका में आयात शुल्क काफी ज़्यादा थे, जिससे उसके उद्योग काफ़ी सुरक्षित रहते थे और सरकार को अच्छा-खासा राजस्व भी मिलता था। लेकिन, अपने लोगों को सस्ता सामान देने के लिए, अमरीका ने आयात शुल्क को कम करना शुरू कर दिया। लेकिन, धीरे-धीरे अमरीका की दूसरे देशों पर निर्भरता बढ़ती गई, और अमरीका के ज़्यादातर उद्योग बंद हो गए। 1995 से, जब विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ) बना, तो कम टैरिफ अब स्थाई हो गए। कम टैरिफ वाले आयातों से आखिरकार जनता को बाकी दुनिया से कम कीमत का सामान तो मिला, लेकिन उसके साथ ही अमरीका के उद्योग भी नष्ट हो गए। उत्पादन की ज़्यादा लागत के कारण, यह माना जाता था कि अमरीका में मैन्युफैक्चरिंग बिज़नेस अब लाभकारी नहीं रहा।

शायद इसीलिए राष्ट्रपति ट्रंप को लगता था कि जब टैरिफ ज़्यादा थे, तब अमरीका की अर्थव्यवस्था मज़बूत थी और तेज़ी से बढ़ रही थी। लेकिन, यह समझना होगा कि जब अमरीका बाद में औद्योगिक सामान के उत्पादन में पीछे रह गया, तो उसी समय, उसने टेक्नोलॉजी उत्पाद, महंगी फार्मास्यूटिकल्स, बौद्धिक संपदा अधिकारों और विशेषज्ञता पूर्ण सेवाओं में भी महारत हासिल की, और दुनिया भर में काम करने वाली अमरीकी कंपनियों से अच्छा-खासा टैक्स और दूसरा राजस्व कमाना जारी रखा। वस्तु उद्योग में गिरावट के बावजूद, अमरीका ने प्रतिरक्षा, हाई टेक्नोलॉजी, बौद्धिक संपदा अधिकार, अंतरिक्ष इत्यादि में अपना वैश्विक दबदबा बनाए रखा। दुनिया भर के देशों को अमरीका की आर्थिक सामरिक और तकनीकी ताकत पर भरोसा बना रहा। 1999 में यूरो के आने के बाद भी, अमेरिकी डॉलर डॉलर ने दुनिया की रिज़र्व करेंसी के तौर पर अपना दबदबा बनाए रखा, और वैश्विक रिज़र्व करेंसी में डॉलर का हिस्सा लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा के आसपास बना रहा। हालांकि, औद्योगिक गिरावट के कारण अमरीका का औद्योगिक रोज़गार कम हो गया था, लेकिन इस गिरावट की भरपाई नई कम आमदानिओं वाली नौकरियों से हो तो गई लेकिन अमरीका की आर्थिक ताकत की वजह से, कोई खास पब्लिक गुस्सा नहीं हुआ, क्योंकि सरकार ने कम आय वाले लोगों के नुक़सान की भरपाई आर्थिक मदद से कर दी।

राष्ट्रपति ट्रंप के दुनिया भर के देशों पर ज़्यादा टैरिफ लगाने से उन देशों के निर्यातों पर कई तरह से असर पड़ा। हालांकि, असल में, इसका असली खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ा, क्योंकि ज़्यादा टैरिफ ने सामान को महंगा कर दिया और इसलिए, आम लोगों की खरीदने की ताकत कम होने लगी। इसके अलावा, जैसे-जैसे महंगाई बढ़ रही है, नीतिगत ब्याज दर में बढ़ोतरी का खतरा भी मंडरा रहा है, जिससे अर्थव्यवस्था में मंदी आ सकती है।

राजस्व का भ्रम
टैरिफ में बढ़ोतरी के साथ, कैलेंडर साल 2025 के दौरान, कुल टैरिफ राजस्व लगभग 287 अरब अमरीकी डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले सालों के 70-80 अरब अमरीकी डॉलर से ज़्यादा है। लेकिन, अगर हम कुल केंद्रीय (फ़ेडरल) राजस्व में टैरिफ के योगदान पर विचार करें, तो यह अभी भी लगभग 4 से 5 प्रतिशत ही है, जबकि पिछले दशकों में यह आम तौर पर 2 प्रतिशत था। अमरीकी राजस्व का बड़ा हिस्सा व्यक्तिक आय कर, कॉर्पोरेट आय कर और सामाजिक सुरक्षा योगदान वगैरह से आता है। हालांकि टैरिफ की वजह से कुल राजस्व थोड़ा बढ़ा है, लेकिन इन टैरिफ की कुल सामाजिक लागत बहुत ज़्यादा और अहम है, क्योंकि अमेरिकी मार्केट में उपभोक्ताओं को ज़रूरी चीज़ों के लिए ज़्यादा पैसे देने पड़ रहे हैं, जिससे समाज के कमज़ोर तबके के लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं और सरकारी खजाने पर नुकसान की भरपाई करने का दबाव पड़ सकता है।

वैश्विक गुस्सा और उसके नतीजे
यह ध्यान देने वाली बात है कि जब अमरीका में टैरिफ कम थे और अलग-अलग देश अमरीका को कई तरह का सामान निर्यात करते थे, तो उनका अमरीका की तरफ झुकना स्वाभाविक था। इससे अमरीकी कंपनियों को दुनिया भर के अलग-अलग देशों में अपना बिज़नेस बढ़ाने के लिए काफी सद्भावना और मौका मिला। इन कंपनियों ने न सिर्फ वैश्विक स्तर पर लाभ कमाया, बल्कि अपनी बौद्धिक संपदा से अच्छी-खासी रॉयल्टी और अन्य प्रकार से कमाई की। इससे अमेरिका में कॉर्पोरेट इनकम टैक्स राजस्व में काफी बढ़ोतरी हुई। आज, यह वैश्विक समर्थन खत्म होने के कगार पर है क्योंकि अमरीका उन देशों को ज़्यादा टैरिफ लगाकर सज़ा दे रहा है। ये देश न सिर्फ दूसरे बाज़ार ढूंढ रहे हैं, बल्कि अपना रुख़ अमरीका से हटकर दूसरे देशों की ओर कर रहे हैं। अमरीका की वैश्विक सद्भावना खोने के नतीजे में, लंबे समय में अमेरिका की अर्थव्यवस्था को नुकसान हो सकता है। दुनिया भर के देश अब डॉलर के बजाय अपनी स्थानीय करेंसी में अंतरराष्ट्रीय भुगतान कर रहे हैं। ब्रिक्स जैसे समूह ज़्यादा अहम होते जा रहे हैं, जिससे अमेरिका का भू राजनीतिक असर कम हो रहा है।

हालांकि ट्रंप कानून में बदलाव करके सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने की कोशिश कर सकते हैं, और वे ऐसा कानून पास करने की कोशिश कर सकते हैं जिससे राष्ट्रपति को ऐसे टैरिफ लगाने का पूरा अधिकार मिल जाए, क्योंकि कांग्रेस के दोनों सदनों में रिपब्लिकन का बहुमत है, भले ही बहुत कम अंतर से। लेकिन शायद यह मुमकिन न हो, क्योंकि अभी सभी रिपब्लिकन टैरिफ के मुद्दे पर उनका साथ नहीं दे रहे हैं। इसलिए, राष्ट्रपति ट्रंप के पास टैरिफ फिर से लगाने के लिए दूसरे तरीके इस्तेमाल करने का ही विकल्प है।

अब भारत को नहीं रहेगा उतना फ़ायदा
कोर्ट के फैसले के बाद, राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले 10 प्रतिशत (150 दिनों के लिए) का अस्थाई टैरिफ लगाने का आदेश दिया। लेकिन अगले दिन ही उसे बदल कर 15 प्रतिशत कर दिया। इसका मतलब है कि राष्ट्रपति ट्रंप से पहले भारत और दुनिया पर लगाई गई 3.3 परसेंट एमएफएन ड्यूटी में 15 परसेंट अस्थाई टैरिफ जोड़कर, अमरीका अब दुनिया भर से आने वाले सामान पर 18.3 परसेंट टैरिफ लगाएगा। व्हाइट हाउस ने साफ किया है कि धारा 122 के तहत नया वैश्विक टैरिफ, पहले के टैरिफ ऑर्डर की जगह लेगा। ज़ाहिर है, यह 15 प्रतिशत अस्थाई टैरिफ और 3.3 प्रतिशत एमएफएन टैरिफ जो अभी के 25 प्रतिशत टैरिफ से तो कम है ही और ये भारत अमरीका अंतरिम समझौते में प्रस्तावित 18 प्रतिशत टैरिफ के भी लगभग बराबर है।

लेकिन यह समझना ज़रूरी है कि इस स्थिति में, सभी देशों के लिए आयात शुल्क एक जैसे हो जाएँगे। अंतरिम समझौते में भारत को जो फायदा मिल रहे था, वो अब खत्म हो जाएगा । विशेषज्ञों का यह भी मानना ​​है कि सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर के बाद पैदा हुई परिस्थिति को देखते हुए हमें अमरीका और भारत के बीच अंतरिम व्यापार समझौते के मसौदे पर फिर से सोचना चाहिए। हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि राष्ट्रपति ट्रम्प के पास टैरिफ लगाने के और भी कई प्रावधान हैं। आखिर में यह देखना बाकी है कि ट्रंप ने शनिवार को जो ग्लोबल 15 प्रतिशत टैरिफ की घोषणा की है, उसके अलावा कई अन्य किस्म के टैरिफ संबंधी हथकंडे उनके पिटारे में मौजूद हैं। इसीलिए राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उनके पास एक वैकल्पिक योजना भी है।

ऐसा लगता है कि राष्ट्रपति ट्रंप, सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर के बाद भी, किसी भी तरह से टैरिफ लगाने की अपनी ज़िद छोड़ने को तैयार नहीं हैं। लेकिन, यह भी सच है कि राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ की वजह से अमरीकी उद्योगों और उपभोक्ता दोनों को बहुत नुकसान हो रहा है। राष्ट्रपति पर टैरिफ कम करने का दबाव भी बढ़ रहा है। यह पक्का नहीं है कि राष्ट्रपति ट्रंप को यह समझने में कितना समय लगेगा कि टैरिफ लगाना किसी के फायदे में नहीं है। इसलिए, यह साफ नहीं है कि पुराने दिन कितनी जल्दी लौटेंगे।
लेकिन यह भी स्पष्ट है कि भारत के पास भी सभी विकल्प खुले हैं ऐसा लगता है कि राष्ट्रपति ट्रंप विभिन्न देशों के बीच भेदकारी टैरिफ नहीं लगा पाएंगे ऐसे में भारत ने अमरीका को कृषि संबंधी और अन्य प्रकार के अमेरिकी उत्पाद ख़रीदने हेतु जो मंशा की ओर संकेत किया था अब उस सब को वापस लिया है। इस असमंजस के चलते ही भारत ने 23 फ़रवरी को शुरू होने वाली व्यापार वार्ता को आगे टाल दिया है। यानी कुल मिलाकर कह सकते हैं कि अमेरिका और भारत के बीच अंतरिम समझौता अब खटाई में पड़ सकता है।

Topics: donald trumpUS Supreme CourtIndia US trade deal
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

समुद्र की खौफनाक लहरों में बह रहा था मासूम, बहादुर लाइफगार्ड ने ऐसे बचाई बच्चे की जान; आप भी देखें Viral Video

ईरानी विदेश मंत्रालय का दावा: डींगें मारता है अमेरिका, बातचीत का नहीं किया अनुरोध; बंद है होर्मुज

डोनाल्ड ट्रम्प और बाघेर गालिबाफ

अमेरिका को ईरान की दो टूक चेतावनी, कहा- ‘हमारा तेल रुका तो किसी का भी नहीं बिकेगा’

Donald trump gulf War

ट्रंप का बड़ा दावा, चीन ने चुराया 22 करोड़ अमेरिकी वोटरों का डेटा

डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिका के राष्ट्रपति

US-Iran War: ट्रंप ने कहा-होर्मुज को अपने कंट्रोल में लेगा अमेरिका, जहाजों से वसूलेगा 20 फीसदी शुल्क

डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिका के राष्ट्रपति

Explainer: क्या टूट गया US- ईरान समझौता? ट्रंप ने कहा- तेहरान के साथ बातचीत समय की बर्बादी

Load More

ताज़ा समाचार

Sheikh Hasina Press Conference Delhi

“5 अगस्त को पहली बार मीडिया के सामने आएंगी शेख हसीना”: दिल्ली में बांग्लादेश वापसी की रणनीति पर होंगे बड़े ऐलान!

Bangladesh Army New Cantonment Naikhongchhari Silkhali Base India Mizoram Border General Waker Uz Zaman Turkey Drone Panchjanya

भारत सीमा पर बांग्लादेश की बड़ी सैन्य घेराबंदी: नाइखोंगछारी में बना रहा छावनी, तैनात किए तुर्की से लिए हथियार!

British Museum 11th Century Maa Saraswati Vagdevi Idol Return Bhojshala Dhar Haryana Saraswati Board Panchjanya

लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम से भारत वापस आएगी 11वीं सदी की मां सरस्वती की प्रतिमा, भोजशाला से जुड़ा है इतिहास!

CM Pushkar Singh Dhami Mahendra Bhatt Dehradun Dayitvdhari Meeting Panchjanya

देहरादून में बोले CM धामी- ‘दायित्वधारी सरकार और जनता के बीच सेतु’, समस्याओं के समाधान में निभाएं सक्रिय भूमिका!

VHP International Joint General Secretary Dr Surendra Jain Jodhpur Press Conference Waqf Board Scam Panchjanya

“सीमांत अतिक्रमण हटाना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी”: VHP ने की राजस्थान वक्फ बोर्ड CEO को हटाने की मांग, जानिए कारण

Ratnagiri Silent March Gen Z Samvidhan Samman Manch Maruti Mandir Ambedkar Statue

सनातन और सेना के अपमान पर भड़का आक्रोश: रत्नागिरी में Gen Z युवाओं ने निकाली विशाल ‘राष्ट्र रक्षा मौन पदयात्रा’!

Dattatreya Hosabale RSS General Secretary NSE Mumbai Viksit Bharat Education Seminar Panchjanya

हम कोई फैक्ट्री नहीं, सभ्यता बना रहे हैं: मुंबई में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने दिया विकसित भारत पर बड़ा संदेश

3 अगस्त का पंचांग

3 अगस्त का पंचांग: जानें ग्रह स्थिति, तिथि, नक्षत्र और शुभ समय

विचार के नाम पर खाली, होठों पर बस गाली

विश्व मैत्री दिवस का मायाजाल और श्री रामचरितमानस में निहित मित्रधर्म का सन्देश

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies