चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में एक अहम एफिडेविट दाखिल किया है, जिसमें पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान अपने अधिकारियों पर हो रही हिंसा और धमकियों को रोकने के लिए तुरंत हस्तक्षेप की मांग की गई है। यह मामला 5 फरवरी 2026 को सामने आया, जब EC ने कोर्ट को बताया कि बंगाल में यह स्थिति सिर्फ SIR प्रक्रिया की वजह से नहीं है, बल्कि राज्य की मशीनरी में कमी और राजनीतिक दखल की वजह से बनी हुई है।
क्या है पूरा मामला
देश के बाकी राज्यों में SIR का काम सुचारू रूप से चल रहा है, लेकिन पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग के कर्मचारियों, खासकर ब्लू लेवल ऑफिसर्स (BLOs) और माइक्रो-ऑब्जर्वर्स पर लगातार निशाना बनाया जा रहा है। EC का कहना है कि यहां हिंसा और धमकियों का एक व्यवस्थित पैटर्न दिख रहा है। उन्होंने इसे “एक खास और चिंताजनक ब्रेकडाउन” बताया है, जिससे चुनावी प्रक्रिया की सत्यनिष्ठा पर असर पड़ रहा है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट से तुरंत कदम उठाने की अपील की गई है ताकि चुनावी कामकाज सुरक्षित रह सके।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप
EC ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कुछ सार्वजनिक बयानों को इस माहौल के लिए जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि CM ने लगातार ऐसे भाषण दिए हैं जो उकसाने वाले हैं और चुनाव अधिकारियों में डर का माहौल पैदा कर रहे हैं। खासतौर पर 14 जनवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में CM ने SIR प्रक्रिया के बारे में गलत और भ्रामक जानकारी दी, लोगों में डर फैलाया और सीधे तौर पर चुनाव अधिकारियों को निशाना बनाया। EC ने आरोप लगाया कि उन्होंने माइक्रो-ऑब्जर्वर हरि दास का नाम लेकर उन्हें पब्लिकली अलग-थलग किया, जिससे उनकी सुरक्षा और निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए। इससे चुनावी कर्मचारियों की स्वतंत्रता, न्यूट्रैलिटी और सुरक्षा गंभीर रूप से प्रभावित हुई है।
शिकायतों पर काम नहीं कर रही पुलिस
EC ने बताया कि बंगाल में पुलिस BLOs की शिकायतों पर FIR दर्ज करने में आनाकानी करती है। कई मामलों में FIR तभी दर्ज हुई जब डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर ने दखल दिया, और गिरफ्तारियां भी देर से हुईं। जबकि दूसरे राज्यों में EC के अधिकारियों की शिकायतों पर पुलिस तुरंत कार्रवाई करती है। इसकी वजह से स्थिति और खराब हो रही है। इतना ही नहीं, बंगाल के CEO को केंद्र सरकार ने Y+ सिक्योरिटी दी है, जो देश के बाकी सभी CEO में से सिर्फ उन्हें मिली है।
हाल के मामले
15 जनवरी को उत्तर दिनाजपुर जिले में SIR का काम चल रहा था, तभी 700 लोगों की भीड़ ने वहां हमला कर दिया।
मुर्शिदाबाद लोकसभा क्षेत्र में 9 माइक्रो-ऑब्जर्वर्स ने मिलकर CEO को पत्र लिखा और हिंसा व अपर्याप्त सुरक्षा के कारण SIR से हटने का फैसला किया।

















