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भारतीय मजदूर संघ ने बजट को निराशाजनक बताया

भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने यूनियन बजट 2026-27 को सबसे निराशाजनक करार दिया। स्कीम वर्कर्स, ईपीएस-95 पेंशन, ईपीएफ-ईएसआई कवरेज और असंगठित श्रमिकों की उपेक्षा पर गहरा असंतोष। श्रमिक हितों के लिए संघर्ष तेज करने का ऐलान।

Written byपाञ्चजन्यपाञ्चजन्य — edited by कुलदीप सिंह
Feb 2, 2026, 09:04 am IST
in भारत
केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण

केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण

नई दिल्ली। भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने लोकसभा में पेश बजट-2026-27 को सबसे निराशाजनक बजट बताया है। बीएमएस के महामंत्री रवींद्र हिमते की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि लोकसभा में प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026–27 का गहन एवं आलोचनात्मक अध्ययन किया है। यद्यपि यह बजट—जो पहली बार रविवार के दिन प्रस्तुत किया गया—अवसंरचना विस्तार, औद्योगिक विकास और कौशल निर्माण के माध्यम से आर्थिक वृद्धि पर केंद्रित है, लेकिन यह श्रमिकों की आजीविका, वेतन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े बुनियादी मुद्दों को पूरी तरह नजरअंदाज करता है।

बीएमएस कंटेनर निर्माण, मेगा टेक्सटाइल पार्क, खेल सामग्री निर्माण, 200 पारंपरिक औद्योगिक क्लस्टरों के पुनरुद्धार, नए मालभाड़ा व उच्च गति रेल गलियारों, अंतर्देशीय जलमार्गों, वाराणसी एवं पटना में जहाज मरम्मत सुविधाओं, पूर्वी क्षेत्र में औद्योगिक कॉरिडोर तथा पूंजीगत व्यय में वृद्धि जैसे प्रस्तावों का संज्ञान लेता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण, श्रम, कौशल विकास, रक्षा एवं डीआरडीओ के लिए बढ़े आवंटन भी नोट किए गए हैं।

हालाँकि वस्त्र, मत्स्य पालन, एमएसएमई, पर्यटन, स्वास्थ्य, आयुष, पशुपालन तथा रचनात्मक (एवीजीसी) जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर जोर रोजगार सृजन की संभावना दिखाता है, लेकिन सुरक्षा और सम्मानजनक वेतन के बिना रोजगार को समावेशी विकास नहीं कहा जा सकता। बीएमएस श्रम संहिताओं की अधिसूचना तथा बैंकिंग क्षेत्र सुधार और “शिक्षा से रोजगार एवं उद्यम” पर उच्चस्तरीय समितियों के गठन पर भी चिंता व्यक्त करता है, क्योंकि श्रमिक-सुरक्षा के बिना सुधार अस्थिरता और असंगठितकरण को बढ़ावा देंगे।

मूल श्रमिक मुद्दों पर गहरा असंतोष

पूर्व-बजट बैठकों में बार-बार उठाई गई मांगों की अनदेखी पर भारतीय मजदूर संघ गंभीर असंतोष और तीव्र नाराजगी व्यक्त करता है।

स्कीम वर्कर्स:

आंगनवाड़ी, आशा एवं मध्यान्ह भोजन कार्यकर्ताओं के मानदेय में किसी भी प्रकार की वृद्धि न किया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्हें श्रमिक का दर्जा देकर न्यूनतम वेतन एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की मांग को फिर से नजरअंदाज किया गया है, जो जमीनी स्तर पर कार्यरत महिला श्रमिकों के प्रति असंवेदनशीलता दर्शाता है।

ईपीएफ पेंशन (ईपीएस–95):

ईपीएस–95 के अंतर्गत पात्रता मानदंडों तथा न्यूनतम पेंशन—दोनों में कोई वृद्धि घोषित नहीं की गई है। अल्प पेंशन पर जीवन यापन कर रहे सेवानिवृत्त श्रमिकों की यह निरंतर उपेक्षा अस्वीकार्य है। बीएमएस पेंशन में ठोस वृद्धि एवं चिकित्सा सुविधाओं की अपनी मांग को दृढ़ता से दोहराता है।

ईपीएफ एवं ईएसआई कवरेज:

ईपीएफ और ईएसआई के वेतन-सीमा (Wage Ceiling) में वृद्धि न किया जाना अत्यंत चिंताजनक है। इससे बड़ी संख्या में श्रमिक इन महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे से बाहर हो जाएंगे, जिससे सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।

असंगठित क्षेत्र (गिग एवं प्लेटफॉर्म वर्कर्स सहित):

ई-श्रम जैसी पहलों को स्वीकार करते हुए भी, असंगठित क्षेत्र में कार्यरत लगभग 90 प्रतिशत श्रमिकों—जिसमें गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स भी शामिल हैं—के लिए समर्पित एवं पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा कोष का अभाव इस बजट की एक गंभीर विफलता है।

रोजगार एवं नौकरी की सुरक्षा:

कौशल विकास की बात स्वागतयोग्य है, किंतु निजीकरण, संविदाकरण और आउटसोर्सिंग के बढ़ते चलन से नौकरी की सुरक्षा, वेतन स्थिरता और श्रमिक अधिकारों पर गंभीर खतरा उत्पन्न होगा।

सरकारी कर्मचारी:

आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन तथा एनपीएस में सार्थक सुधार पर बजट की चुप्पी से सरकारी कर्मचारियों में व्यापक असंतोष है।
भारतीय मजदूर संघ का स्पष्ट मत है कि केंद्रीय बजट 2026–27 पूंजी और अवसंरचना केंद्रित है, श्रमिक केंद्रित नहीं। यह स्कीम वर्कर्स, ईपीएस–95 पेंशनधारकों, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों एवं सरकारी कर्मचारियों की वेतन, पेंशन, नौकरी की सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने में असफल रहा है।

बीएमएस देश के श्रमिकों के हितों की रक्षा हेतु अपने संघर्ष को और तेज करेगा, ताकि आर्थिक विकास का लाभ सम्मानजनक रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के रूप में हर श्रमिक तक पहुँचे।

Topics: budget 2026-27निराशाजनक बजटdisappointing budgetभारतीय मजदूर संघBharatiya Mazdoor SanghबीएमएसBMSबजट 2026-27
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