'BMS ने सभी श्रमिकों पर श्रम कानून सार्वभौमिक रुप से लागू करने की मांग की, पुरी राष्ट्रीय अधिवेशन में 4 प्रस्ताव पारित'
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होम भारत ओडिशा

‘BMS ने सभी श्रमिकों पर श्रम कानून सार्वभौमिक रुप से लागू करने की मांग की, पुरी राष्ट्रीय अधिवेशन में 4 प्रस्ताव पारित’

पारित प्रस्ताव में भारतीय मजदूर संघ ने श्रम कानूनों के सार्वभौमीकरण पर जोर देते हुए कहा कि सभी श्रमिकों को जीवन-यापन योग्य वेतन और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक नई श्रम नीति घोषित की जानी चाहिए।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद — edited by Lalit Fulara
Feb 10, 2026, 02:51 pm IST
in ओडिशा

भुवनेश्वर। भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने सभी श्रमिकों पर बिना किसी अपवाद के श्रम कानूनों को लागू किए जाने की मांग की है। यह मांग ओडिशा के पुरी में आयोजित भारतीय मजदूर संघ के तीन दिवसीय त्रैवार्षिक राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान पारित चार प्रमुख प्रस्तावों में शामिल है। संघ ने कहा है कि सभी प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे जाएंगे।

सभी श्रमिकों पर श्रम कानून सार्वभौमिक रुप से लागू करने की मांग
पारित प्रस्ताव में भारतीय मजदूर संघ ने श्रम कानूनों के सार्वभौमीकरण पर जोर देते हुए कहा कि सभी श्रमिकों को जीवन-यापन योग्य वेतन और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक नई श्रम नीति घोषित की जानी चाहिए। संघ ने बताया कि 6 से 8 फरवरी 2026 के बीच पुरी में आयोजित अखिल भारतीय अधिवेशन में ‘अंत्योदय’ को संगठन का लक्ष्य घोषित किया गया है और सशक्त भारत के पुनर्निर्माण के लिए सभी प्रयासों को उसी दिशा में केंद्रित करने का संकल्प लिया गया है।

इस संदर्भ में केंद्र और राज्य सरकारों से श्रम संहिताओं तथा अन्य श्रम कानूनों में आवश्यक संशोधन करने और श्रम लाभों के सार्वभौमीकरण पर बीएमएस के साथ तत्काल परामर्श शुरू करने की मांग की गई है।

आंगनबाड़ी कर्मियों को कर्मचारी घोषित कर उन्हें वेतन सामाजिक सुरक्षा का लाभ दिया जाए
सम्मेलन में पारित एक अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव में भारतीय मजदूर संघ ने आंगनबाड़ी कर्मियों को औपचारिक रूप से सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने तथा उन्हें वेतन और सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान करने की मांग की है। प्रस्ताव में कहा गया है कि पोषण, बाल विकास, मातृ स्वास्थ्य और सामुदायिक कल्याण से जुड़ी विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत कार्यरत आंगनबाड़ी कर्मियों और सरकार के बीच स्पष्ट रूप से नियोक्ता–कर्मचारी का संबंध स्थापित है। संगठन ने आंगनबाड़ी कर्मियों को ‘स्वयंसेवक’ मानने की धारणा को खारिज करते हुए उन्हें आवश्यक सार्वजनिक सेवाएं प्रदान करने वाले अग्रिम पंक्ति के कर्मी बताया।

प्रस्ताव में कहा गया है कि आंगनबाड़ी कर्मी वैधानिक पदों पर कार्यरत हैं, इसलिए वे वेतन भुगतान अधिनियम, 1936 और ग्रेच्युटी अधिनियम, 1972 के अंतर्गत लाभ पाने की पात्र हैं। बीएमएस ने भारतीय श्रम सम्मेलन के 45वें सत्र की सिफारिशों का भी उल्लेख किया, जिसमें आंगनबाड़ी कर्मियों को न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा प्रदान किए जाने की अनुशंसा की गई थी। अधिकांशतः महिलाओं से जुड़ी आंगनबाड़ी कर्मियों की लंबे समय से चली आ रही आर्थिक असुरक्षा और शोषण को रेखांकित करते हुए, संगठन ने सरकार से उन्हें शीघ्र कर्मचारी का दर्जा देने और न्यूनतम वेतन, भविष्य निधि, पेंशन, स्वास्थ्य बीमा तथा ग्रेच्युटी सहित सभी लागू श्रम लाभ प्रदान करने की मांग की है।

बीएमएस ने अपने प्रस्ताव में जोर देकर कहा कि जब तक करोड़ों जमीनी स्तर की महिला कर्मी, सार्वजनिक सेवा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका के बावजूद, औपचारिक श्रम व्यवस्था से बाहर रहेंगी, तब तक वास्तविक सामाजिक न्याय की प्राप्ति संभव नहीं है।

त्रिपक्षीय तंत्र को पुनर्जीवित कर उसे प्रभावी, व्यवहारिक और नियमित बनाने की मांग
भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) द्वारा पारित एक और प्रस्ताव में सरकार, नियोक्ता और श्रमिक संगठनों को शामिल करने वाले त्रिपक्षीय तंत्र के तत्काल पुनर्जीवित कर उसे सुदृढ़ीकरण करने की मांग की गई है। संगठन ने रेखांकित किया कि त्रिपक्षीय व्यवस्था ने ऐतिहासिक रूप से औद्योगिक शांति बनाए रखने, विवादों के समाधान और संतुलित श्रम नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रस्ताव में चिंता व्यक्त की गई है कि हाल के वर्षों में त्रिपक्षीय मंच अनियमित, अप्रभावी और लगभग उपेक्षित हो गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप औद्योगिक संबंध कमजोर हुए हैं और निर्णय-निर्माण प्रक्रियाओं में श्रमिकों की भागीदारी घट गई है।

प्रस्ताव में मांग की गई है कि त्रिपक्षीय संवाद को नियमित, सार्थक, व्यवहारिक और परिणामोन्मुख बनाया जाए। बीएमएस के अनुसार, सभी पक्षों के बीच संरचित परामर्श और सहयोगात्मक सहभागिता के बिना दीर्घकालिक औद्योगिक शांति संभव नहीं है। संगठन ने चेतावनी दी कि पर्याप्त श्रमिक प्रतिनिधित्व के बिना एकतरफा नीति-निर्माण लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करता है और औद्योगिक अशांति का खतरा बढ़ाता है। बीएमएस ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार त्रिपक्षीय तंत्र को पुनर्जीवित करने के लिए ईमानदार प्रयास नहीं करती है, तो संगठन श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए आंदोलनात्मक कदम उठाने को विवश होगा।

ठेका श्रमिकों के शोषण को समाप्त करने के लिए कानून में हो बदलाव
चौथा प्रस्ताव ठेका श्रमिकों की दुर्दशा पर केंद्रित रहा, जिसमें भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने उनके शोषण को समाप्त करने के लिए व्यापक कानूनी सुधारों की मांग की। संगठन ने मौजूदा ठेका श्रम व्यवस्था को भेदभावपूर्ण और अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि इसका अक्सर दुरुपयोग श्रमिकों को रोजगार सुरक्षा, उचित वेतन और सामाजिक सुरक्षा से वंचित करने के लिए किया जाता है। प्रस्ताव में कहा गया कि ठेका श्रमिकों को कई बार स्थायी और नियमित प्रकृति के कार्यों में भी लगाया जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य लागत में कटौती करना होता है। इसके परिणामस्वरूप श्रमिकों के अधिकारों और गरिमा का व्यवस्थित हनन हो रहा है।

प्रस्ताव में मौजूदा श्रम कानूनों में संशोधन की मांग की गई, ताकि ठेका श्रमिकों के लिए समान काम के लिए समान वेतन, सामाजिक सुरक्षा कवरेज और मनमानी बर्खास्तगी से संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। संगठन ने स्पष्ट किया कि मुख्य गतिविधियों में कार्यरत श्रमिकों को अस्थायी या उपयोग के बाद त्यागे जाने योग्य श्रमबल की तरह नहीं माना जाना चाहिए। प्रस्ताव नमें ठेका प्रणाली के दुरुपयोग को रोकने और उल्लंघनों के लिए मुख्य नियोक्ताओं की जवाबदेही सुनिश्चित करने हेतु कानूनों के सख्त प्रवर्तन की भी मांग की गई है । संगठन ने चेतावनी दी कि ठेका श्रमिकों का अनियंत्रित शोषण विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ती असमानता, असुरक्षा और औद्योगिक अस्थिरता का कारण बन रहा है। यह रेखांकित करते हुए कि रोजगार में निष्पक्षता और स्थिरता के बिना सतत आर्थिक विकास संभव नहीं है, प्रस्ताव में सरकार से श्रम सुधारों और नीतियों के निर्माण में श्रमिक-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया गया है।

Topics: labour lawsभारतीय मजदूर संघBharatiya Mazdoor SanghOdishaPuriश्रम कानूनthree-day triennial national convention
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