'जब वैश्विक मजदूर आंदोलन भटका, तब भारतीय मजदूर संघ ने दिखाई सही राह'
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होम भारत ओडिशा

‘जब वैश्विक मजदूर आंदोलन भटका, तब भारतीय मजदूर संघ ने दिखाई सही राह’

श्रम के सम्मान के लिए भारतीय मजदूर संघ सदैव समर्पित रहा है। स्थापना काल से ही यह संगठन राष्ट्रहित, श्रमिक कल्याण, और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प के साथ कार्य करते हुए श्रमिकों के अधिकार, गरिमा, और सामाजिक न्याय को सुदृढ़ करने में प्रशंसनीय भूमिका निभा रहा है।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद — edited by Lalit Fulara
Feb 9, 2026, 06:09 pm IST
inओडिशा

भुवनेश्वर: भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) केवल एक श्रमिक संगठन नहीं है, बल्कि एक वैचारिक आंदोलन है। जब दुनिया का मजदूर आंदोलन गुमराह हो गया है, तब भारतीय मजदूर संघ ने संगठन के रूप में नहीं, बल्कि वैचारिक आंदोलन के रूप में हमारे देश की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा दी है। यह बात केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने भगवान श्री जगन्नाथ की पावन धरा पुरी में आयोजित भारतीय मजदूर संघ के 21वें अखिल भारतीय त्रैवार्षिक अधिवेशन के दूसरे दिन पहले सत्र में भाग लेते हुए कही।

उन्होंने कहा कि देश और श्रमिक समाज को दिशा देने के लिए मैं भारतीय मजदूर संघ के प्रति आभार व्यक्त करता हूं। श्रमिकों को राष्ट्र निर्माण की मुख्य आधारशिला बताते हुए श्री प्रधान ने कहा कि भारतीय संविधान के आदर्शों के अनुरूप ‘श्रम के सम्मान’ के लिए भारतीय मजदूर संघ सदैव समर्पित रहा है। स्थापना काल से ही यह संगठन राष्ट्रहित, श्रमिक कल्याण, और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प के साथ कार्य करते हुए श्रमिकों के अधिकार, गरिमा, और सामाजिक न्याय को सुदृढ़ करने में प्रशंसनीय भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने कहा कि उनका स्पष्ट मानना है कि श्रम शक्ति को उसके सम्मान व अधिकारों से वंचित कर कोई भी देश आगे नहीं बढ़ सकता। यदि श्रम शक्ति को सम्मानजनक जीवन प्रदान किया जाए, तो देश की अर्थव्यवस्था दोगुनी गति से आगे बढ़ सकती है। इसी दिशा में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने कई वर्षों बाद श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि की है। सरकार मध्यान्ह भोजन योजना में कार्यरत 25 लाख सहायिकाओं, आंगनवाड़ी कर्मियों, और आशा दीदियों के कल्याण के लिए निरंतर प्रयासरत है।

अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अपने सामाजिक जीवन की शुरुआत में भारतीय मजदूर संघ के एक कार्यकर्ता के रूप में कार्य करना उनके लिए सौभाग्य की बात रही है। आज भारतीय मजदूर संघ एक जिम्मेदार सामाजिक आंदोलन के रूप में उभरा है। यह संगठन श्रम को केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला मानते हुए संतुलित और समन्वित विकास का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। श्री प्रधान ने कहा कि श्रम कोड के साथ जिस साहसिकता के साथ भारतीय मजदूर संघ खड़ा हुआ है, उसके लिए मैं सरकार की ओर से मजदूर संघ के प्रति आभार व्यक्त करता हूं।

श्री प्रधान ने बताया कि भारत में कार्यशील आयु वर्ग (वर्किंग एज ग्रुप) में लगभग 90 करोड़ लोग हैं, जिनमें से करीब 50 प्रतिशत वास्तव में कार्यरत हैं। इन 50 करोड़ श्रमिकों को वैचारिक स्पष्टता प्रदान करने में भारतीय मजदूर संघ ने एक ‘कसौटी पत्थर’ की तरह भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के युग में श्रमशक्ति की भागीदारी को 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत किये बिना विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करना संभव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान दुनिया तेजी से बदल रही है। नई तकनीकों का आगमन हो रहा है। इस तकनीकी और ऑटोमेशन के युग में हमें अपनी श्रम शक्ति को स्किल करने की आवश्यकता है। आगामी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, श्री प्रधान ने देश की कार्यशक्ति के निरंतर स्किलिंग, री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में ‘पढ़ाई के साथ रोजगार’ की व्यवस्था की गई है। यह आज संभव है और सरकार इस दिशा में कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत पढ़ाई और कमाई एक साथ किया जा सकता है, जो पहले के समय में संभव नहीं था। लेकिन अब यह हो रहा है। यही राष्ट्रीय शिक्षा नीति की विशेषता है। उन्होंने आह्वान किया कि मजदूर संघ बड़ा सपना देखे और बड़ी योजना बनाये। भारत की श्रम शक्ति को स्किल, री-स्किल और अप-स्किल करे। केवल भारत की उत्पादन को ही पूरा न करे, बल्कि तकनीक के सहारे दुनिया की आवश्यकताओं को भी भारत की श्रम शक्ति पूरा करे। यहां रहकर पूरी दुनिया की आवश्यकताओं को पूरा करें। इस तरह की नवाचार हमें करनी चाहिए। भारतीय मजदूर संघ का यह अधिवेशन इस बारे में विचार करे। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी की कार्यशक्ति को वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार करना आवश्यक है, ताकि वह विश्व कल्याण में अग्रणी भूमिका निभा सके।

Topics: Bharatiya Mazdoor SanghPuriConventionDharmendra Pradhan
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