ईरान ने यूरोपीय संघ (EU) की सेनाओं को ‘आतंकवादी संगठन’ घोषित कर दिया है। यह कदम यूरोपीय संघ के उस फैसले के जवाब में आया है, जिसमें ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को आतंकवादी संगठन करार दिया गया था।
क्या है पूरा मामला
पिछले दिसंबर में ईरान में महंगाई और आर्थिक मुद्दों को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। ये विरोध शुरुआत में आर्थिक थे, लेकिन बाद में हिंसक झड़पों में बदल गए और राजनीतिक मांगें भी उठने लगीं। ईरान की सरकार ने इन हिंसक घटनाओं के लिए अमेरिका और इज़राइल को जिम्मेदार ठहराया। इन विरोधों को दबाने में IRGC की भूमिका रही, जिसके चलते यूरोपीय संघ ने कदम उठाया। IRGC पहले से ही अमेरिका, इज़राइल, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, सऊदी अरब और बहरीन जैसी कई देशों द्वारा आतंकवादी संगठन माना जाता है।
ईरान ने क्या किया?
ईरानी संसद ने EU के सदस्य देशों की सशस्त्र सेनाओं को ‘आतंकवादी संगठन’ घोषित कर दिया। यह एक तरह से यूरोपीय संघ के फैसले का आईना है – उन्होंने IRGC को लिस्ट किया, तो ईरान ने उनकी सेनाओं को लिस्ट कर दिया।
ईरान ने ऐसा क्यों किया?
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि EU का IRGC को आतंकवादी घोषित करना अमेरिका को खुश करने की कोशिश है। वे अमेरिका को EU का “मालिक” कहते हैं। उनका आरोप है कि यह कदम क्षेत्र में युद्ध की आग भड़काने वाला है और सिर्फ एक प्रचार का धौंस (PR stunt) है।
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ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने कहा कि EU अमेरिका को खुश करने के लिए ऐसा कर रहा है, ताकि अमेरिका उनके देशों की संप्रभुता पर हमला न करे– जैसे ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अपने में मिलाने की धमकी दी थी। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने X (ट्विटर) पर लिखा कि ब्रसेल्स क्षेत्र में पूर्ण युद्ध की आग भड़का रहा है। उन्होंने इसे EU की “एक और बड़ी सामरिक गलती” और “प्रचार का धौंस” बताया।
EU की तरफ से क्या हुआ?
EU की विदेश नीति की प्रमुख काजा कलास ने कहा कि विदेश मंत्रियों ने IRGC को आतंकवादी संगठन घोषित करने का “निर्णायक कदम” उठाया है। यह फैसला ईरान में हाल के विरोधों को दबाने के तरीके के जवाब में लिया गया। यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भी इस कदम और ईरान पर नए प्रतिबंधों का स्वागत किया। इन प्रतिबंधों में 15 लोगों और 6 संस्थाओं पर एसेट फ्रीज और ट्रैवल बैन लगाए गए हैं। EU के IRGC वाले फैसले को आने वाले दिनों में औपचारिक रूप से अपनाया जाएगा।
यह पूरा मामला एक तरह की जैसे को तैसा कार्रवाई है, जहां दोनों तरफ से एक-दूसरे की मिलिट्री फोर्सेस को टारगेट किया जा रहा है। ईरान ने पहले भी ऐसे जवाबी कदम उठाए हैं, जैसे अमेरिका के CENTCOM को आतंकवादी घोषित करना।

















