खाड़ी युद्ध के चलते होर्मुज स्ट्रेट को ईरान ने बंद कर रखा है। यहां से दुनिया का 20 फीसदी तेल का निर्यात होता है। लेकिन, अब ये लगभग पूरी तरह से रुक गया है। बीते 10 सप्ताह से बंद होर्मुज स्ट्रेट के प्रबंधन के लिए ईरान ओमान के साथ मिलकर इसके प्रबंधन की योजना बना रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान इस योजना के जरिए व्यापारिक जहाजों से टोल वसूलने और हर जहाज की राष्ट्रीयता की डिटेल मांगने का भी प्रस्ताव है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भारत में बोलते हुए कहा कि यह जलडमरूमध्य सिर्फ ईरान और ओमान का है। उन्होंने कहा, “यह दोनों देशों के क्षेत्रीय पानी में है, बीच में कोई अंतरराष्ट्रीय पानी नहीं है।”
ओमान की चुप्पी और दबाव
अभी तक ओमान ने ईरान के इन प्रस्तावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। ओमान मुसंदम इलाका इस जलडमरूमध्य के ठीक दक्षिण में है, इसलिए वह इस मुद्दे में सीधे प्रभावित है। अमेरिका का कहना है कि किसी भी स्थायी समाधान में ईरान को टोल देने की बात नहीं होनी चाहिए। अमेरिका का दावा है कि ओमान भी इस बारे में वैसी ही सोच रखता है।
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ईरान का नया प्राधिकरण
ईरान ने 5 मई को पर्सियन गल्फ ऑफ स्ट्रेट अथॉरिटी (PGSA) नाम का एक सरकारी अंग बनाया है। इसकी योजना है कि जहाजों को ईमेल से रजिस्टर करना होगा, रूटिंग जानकारी लेनी होगी और पास होने की अनुमति मिलेगी। भुगतान ईरानी रियाल में करना होगा। फीस लगभग एक डॉलर प्रति बैरल रखी गई है। ईरान कहता है कि यह व्यवस्था उसके लिए अच्छी आमदनी का स्रोत बने।
कानूनी और अंतरराष्ट्रीय पहलू
पश्चिमी राजनयिकों का कहना है कि ईरान का यह प्रस्ताव कानून के खिलाफ है क्योंकि इससे जहाजों को चुनिंदा तरीके से पास करने का अधिकार ईरान को मिल जाएगा, जो राष्ट्रीयता के आधार पर भी हो सकता है। साथ ही UN प्रतिबंधों का मुद्दा भी है, क्योंकि पैसे IRGC से जुड़े हो सकते हैं।
ईरान ने 1982 में UNCLOS (समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन) पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन उसे कभी पुष्टि नहीं की। इसलिए ईरान खुद को पारगमन मार्ग नियमों से बंधा नहीं मानता। वह कहता है कि अगर कोई खतरा हो तो वह जहाजों की आवाजाही रोक सकता है। शुरू में ईरान ने दावा किया था कि UAE के इलाके से अमेरिका ने हमले किए थे।
दूसरी तरफ की कोशिशें
फ्रांस और ब्रिटेन एक अलग योजना तैयार कर रहे हैं जो नौवहन की स्वतंत्रता पर आधारित है। इसमें ज्यादातर गल्फ देशों का समर्थन है। ब्रिटेन के अधिकारी और अंतर्राष्ट्रीय मैरिटाइम संगठन के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगेज़ हाल ही में मस्कट गए थे।
चीन की क्या है भूमिका
चीन ईरान के तेल का करीब 45% इसी रास्ते से आयात करता है। ट्रंप ने बीजिंग में दावा किया कि चीन टोल और प्रतिबंधों के खिलाफ है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी यही कहा। लेकिन चीन का कहना है कि वह सिर्फ ब्लॉकेड खत्म होना चाहता है। IRGC ने बताया कि कुछ चीनी टैंकरों को पास किया गया है, हालांकि फीस वाली बात साफ नहीं है।

















