जैसा कि पहले से ही तय था पाकिस्तान की कथित मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता फेल हो गई है। इसे इस बात से समझा जा सकता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान में होने वाली अपनी दूतों की यात्रा रद्द कर दी है। यह यात्रा ईरान के साथ युद्धविराम की बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए रखी गई थी। लेकिन, जैसा ट्रंप को उम्मीद थी कि वो ईरान पर दबाव डाल कर डील करवा लेंगे, वैसा हुआ नहीं।
क्या हुआ?
ट्रंप ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस के जरिए घोषणा की थी कि उनके दूत जैरेड कुश्नर और स्टिव विटकॉफ इस्लामाबाद जाएंगे। वहां ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से अप्रत्यक्ष रूप से बातचीत होनी थी। पाकिस्तानी अधिकारी दोनों पक्षों के बीच संदेश पहुंचाने का काम करते। लेकिन शनिवार शाम को अराघची इस्लामाबाद से रवाना हो गए, और उसके कुछ ही देर बाद ट्रंप ने यात्रा रद्द करने का ऐलान कर दिया।
ट्रंप ने फॉक्स न्यूज पर कहा, “वे जब चाहें हमें फोन कर सकते हैं।” उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में भी लिखा कि उन्होंने अपने प्रतिनिधियों की इस्लामाबाद यात्रा रद्द कर दी है। पाकिस्तान की ओर से इस यात्रा की तैयारी में राजधानी में सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी, लेकिन अब यह बैठक नहीं होगी।
क्या है पूरा मामला
यह घटना उस युद्ध के बीच हुई है जो अमेरिका और इजरायल की तरफ से ईरान पर दो महीने पहले शुरू हुआ था। उसके पहले ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत फेल हो गई थी। युद्ध शुरू होने से पहले 27 फरवरी को जेनेवा में अप्रत्यक्ष बातचीत हुई थी, जो कई घंटे चली लेकिन कोई समझौता नहीं हुआ। उसके अगले दिन ही हमले शुरू हो गए।
अभी एक खुला युद्धविराम चल रहा है, जिसे ट्रंप ने इस हफ्ते अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया था। पाकिस्तान ने इस युद्धविराम के लिए कूटनीतिक कोशिश की थी। ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की। उन्होंने ईरान की कुछ ‘रेड लाइन्स’ यानी सीमाएं बताईं और कहा कि पाकिस्तान की मध्यस्थता में बातचीत तब तक जारी रहेगी जब तक नतीजा नहीं निकलता।
युद्ध का असर
इस युद्ध में अब तक ईरान में कम से कम 3,375 लोग मारे गए हैं। लेबनान में 2,490 से ज्यादा, इजरायल में 23, गल्फ देशों में एक दर्जन से ज्यादा, और अमेरिकी सैनिकों समेत अन्य लोगों की भी जान गई है।
युद्धविराम के बावजूद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लगभग बंद जैसा है, जहां दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल गुजरता है। ईरान ने इस हफ्ते तीन जहाजों पर हमला किया। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर ब्लॉकेड लगा रखा है और छोटी नावों पर माइन्स बिछाने की कोशिश पर ‘शूट एंड किल’ के आदेश दिए हैं। इससे दुनिया भर में तेल, तरल गैस, खाद और दूसरे सामान की सप्लाई प्रभावित हुई है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें युद्ध शुरू होने से करीब 50 प्रतिशत ऊपर हैं।

















