2026 Ekadashi: आज जया एकादशी है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा होती है। मान्यता है कि जया एकादशी के व्रत से पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। शास्त्रों में एकादशी पर चावल न खाने का विधान है। कथावाचक राजन जी महाराज ने अपनी एक कथा में कहा कि एकादशी के दिन चावल खाना तो दूर, स्पर्श करने की भी मनाही है। इस दिन तिलक करके चावल, अक्षत तक नहीं लगाया जाता। उन्होंने अपनी कथा में आगे बताया कि धरती पर एक स्थान ऐसा है जहां एकादशी के दिन भी भगवान को चावल का भोग लगता है। उस स्थान का नाम जगन्नाथ पुरी है। ओडिशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ भगवान को एकादशी के दिन खिचड़ी का भोग लगाया जाता है।
जगन्नाथ मंदिर परिसर के नीचे जेल में बंद एकादशी
राजन जी महाराज अपनी कथा में बताते हैं कि अगर आप कभी जगन्नाथ पुरी मंदिर में दर्शन के लिए जाएं तो मंदिर के पीछे के परिसर में नीचे जेल बनी है। पौराणिक मान्यता है कि उसी जेल में एकादशी बंद है। भगवान विष्णु ने यहां एकादशी माई को उल्टा लटकाया है।
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राजन जी महाराज (Rajan Maharaj Ji) अपनी कथा में कहते हैं कि एकादशी जाकर भगवान जगन्नाथ से बोले कि ‘मैं आ गई हूं। आज आप चावल नहीं खा सकते।’ इस पर भगवान जगन्नाथ बोले – ‘कौन हो तुम?’ एकादशी ने अपना परिचय दिया तो भगवान बोले – ‘तो क्या हुआ।’ एकादशी ने आगे कहां कि आज के दिन जहां मैं रहती हूं, वहां चावल नहीं खाया जाता है। इसके बाद भगवान विष्णु ने एकादशी को जेल में उल्टा लटका दिया।’
इसी कारण पुरी के जगन्नाथ मंदिर में एकादशी के दिन भी भगवान को चावल का भोग लगाया जाता है।यह महाप्रसाद भक्तों में बांटा जाता है। मान्यता है कि ब्रह्मा जी के सामने भगवान जगन्नाथ ने वरदान दिया था कि उनके महाप्रसाद पर एकादशी का नियम लागू नहीं होगा। इसे उल्टी एकादशी की परंपरा भी कहा जाता है। यहां महाप्रसाद को ग्रहण करना ही सबसे बड़ा व्रत माना जाता है।
















