Papmochani Ekadashi: 15 मार्च को है पापमोचिनी एकादशी व्रत, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि जानिये
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Papmochani Ekadashi: 15 मार्च को है पापमोचिनी एकादशी व्रत, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि जानिये

धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

Written byLalit FularaLalit Fulara
Mar 14, 2026, 09:31 am IST
inधर्म-संस्कृति

Papmochani Ekadashi 2026: 15 मार्च को पापमोचिनी एकादशी है। इस एकादशी के व्रत का बेहद महत्व है। यह एकादशी साल में एक बार आती है। हिंदू धर्म में एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन भगवान विष्णु जी की विधि-विधान से पूजा पाठ किया जाता है। व्रत, मंत्र जाप, चालीसा और कथा पाठ के माध्यम से दिनभर विष्णु भगवान का सुमिरन किया जाता है।

पंचांग के अनुसार, चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी तिथि को पापमोचिनी एकादशी कहा जाता है। इस साल चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 14 मार्च को सुबह 8 बजकर 10 मिनट पर हो रही है। जबकि एकादशी तिथि का समापन 15 मार्च 2026 को सुबह 9 बजकर 16 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए पापमोचनी एकादशी का व्रत 15 मार्च को है।

पापमोचिनी एकादशी के व्रत से मिलती है पापों से मुक्ति
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसी वजह से इसे पापों से मुक्ति दिलाने वाली एकादशी भी कहा जाता है। पापमोचनी एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद घर के मंदिर या पूजा स्थान को साफ करके भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। इस दिन भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी पत्र, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करना चाहिए। भगवान विष्णु के मंत्रों के जाप के साथ उनका पाठ करना इस दिन शुभ माना जाता है। शाम के समय दीपक जलाकर भगवान विष्णु की आरती की जाती है। 16 मार्च को द्वादशी तिथि पर इस व्रत का पारण किया जाता है।

पापमोचनी एकादशी का धार्मिक महत्व और शुभ मुहूर्त
धार्मिक ग्रंथों में पापमोचनी एकादशी को अत्यंत फलदायी बताया गया है। पौराणिक मान्यता है कि इस दिन किया गया व्रत और भगवान विष्णु की पूजा मनुष्य को पापों से मुक्ति दिलाती है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को रखने से व्यक्ति को मानसिक शांति, पुण्य और आध्यात्मिक उन्नति मिलती है। इस दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए।पापमोचिनी एकादशी पूजा का शुभ मुहूर्त सूर्योदय सुबह 06:47 बजे,  ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:11 से 05:59 बजे तक। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:23 से 01:12 बजे तक है। वहीं गोधूलि मुहूर्त शाम में 06:46 से 07:10 बजे तक है।

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Lalit Fulara
Lalit Fulara
उत्तराखंड के अल्मोड़ा ज़िले के सुदूर स्थित छोटे से गाँव 'पटास' में पैदाइश. कला-साहित्य में विशेष रुचि. पहला नॉवेल 'घासी: लाल कैंपस का भगवाधारी' प्रकाशित. विगत 12 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय. करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से हुई और उसके बाद ज़ी न्यूज़, न्यूज़18, राजस्थान पत्रिका, अमर उजाला और इंडियाडॉटकॉम होते हुए वर्तमान में पांचजन्य डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत. पत्रकारिता में एम.ए माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के नोएडा कैंपस से किया है. [Read more]
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