हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है, जिन्हें सृष्टि का पालनहार कहा जाता है। हर महीने शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में दो बार एकादशी तिथि आती है। इस प्रकार पूरे वर्ष में कुल 24 एकादशी व्रत होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के पाप नष्ट होते हैं और उसे पुण्य की प्राप्ति होती है। एकादशी व्रत केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। इस दिन उपवास रखने से शरीर को आराम मिलता है और मन शांत रहता है। कहा जाता है कि एकादशी का व्रत मन, शरीर और आत्मा को शुद्ध करता है। इसी कारण से श्रद्धालु इस दिन पूरे नियम और श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। वर्ष 2026 में एकादशी व्रत की तिथियाँ इस प्रकार हैं-
- 14 जनवरी- षटतिला एकादशी
- 29 जनवरी- जया/भामी एकादशी
- 13 फरवरी- विजया एकादशी
- 27 फरवरी- आमलकी एकादशी
- 15 मार्च- पापमोचनी एकादशी
- 28 मार्च- शुक्ल एकादशी
- 26 अप्रैल- वरूथिनी एकादशी
- 27 मई- अपरा एकादशी
- 10 जून-– निर्जला एकादशी
- 24 जुलाई- कामिका एकादशी
- 23 अगस्त- अजा एकादशी
- 21 सितंबर- इंदिरा एकादशी
- 21 अक्टूबर- रमा एकादशी
- 4 नवंबर- उत्पन्ना एकादशी
- 20 नवंबर- पापांकुशा एकादशी
- 19 दिसंबर- मोक्षदा एकादशी
- 30 दिसंबर- पौष पुत्रदा एकादशी
धार्मिक ग्रंथों में भी एकादशी व्रत की महिमा का वर्णन मिलता है। ऐसा विश्वास है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से एकादशी का व्रत करता है, उसके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। यह व्रत मोक्ष प्राप्ति का मार्ग भी प्रशस्त करता है। यही कारण है कि साधु-संत और भक्तजन इस व्रत को बहुत पवित्र मानते हैं। एकादशी के दिन भक्त प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करते हैं और साफ वस्त्र धारण करते हैं। इसके बाद भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लिया जाता है। इस दिन अन्न, चावल और दाल का सेवन वर्जित माना गया है। अधिकतर लोग फलाहार करते हैं या केवल जल ग्रहण करते हैं। कुछ भक्त निर्जला व्रत भी रखते हैं, जिसमें पूरे दिन जल तक नहीं पिया जाता।
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पूजा के लिए घर के मंदिर या किसी साफ स्थान पर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित किया जाता है। दीपक जलाकर चंदन, फूल, तुलसी पत्र, धूप और नैवेद्य अर्पित किया जाता है। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके साथ ही विष्णु सहस्रनाम का पाठ, श्रीमद्भगवद्गीता का अध्ययन और एकादशी व्रत कथा का श्रवण भी किया जाता है। एकादशी के दिन मन को शांत रखना बहुत आवश्यक माना गया है। क्रोध, झूठ, ईर्ष्या और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए। इस दिन अधिक से अधिक समय भगवान के स्मरण में बिताना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि एकादशी पर किया गया दान-पुण्य और पूजा का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक मिलता है। व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि को किया जाता है। द्वादशी के दिन स्नान करने के बाद भगवान विष्णु को भोग लगाया जाता है और ब्राह्मणों या जरूरतमंद लोगों को दान दिया जाता है। इसके बाद ही भोजन ग्रहण करना शुभ माना जाता है। इन सभी एकादशियों का अपना अलग-अलग महत्व है। श्रद्धा और नियमों के साथ किया गया एकादशी व्रत जीवन में सकारात्मकता, शांति और आध्यात्मिक उन्नति लेकर आता है। यही कारण है कि एकादशी व्रत को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और कल्याणकारी माना गया है।

















