भारत सरकार के पैसे से चलने वाला जामिया मिल्लिया इस्लामिया एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है। इसके बावजूद यहां आरक्षण लागू नहीं है। वर्षों से यह मामला न्यायालय में लंबित है। इस बीच यहां के कुछ कट्टरपंथी प्राध्यापक और अधिकारी हिंदू कर्मचारियों के साथ मार-पीट कर रहे हैं, उन्हें जाति-सूचक गालियां दे रहे हैं, उन पर मुसलमान बनने का दबाव डाल रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में ऐसी अनेक घटनाएं हुई हैं। अभी हाल ही में एक हिंदू लिपिक रामफूल मीणा के साथ जो हुआ है, वह बहुत कुछ संकेत कर रहा है।
जामिया के पॉलिटेक्निक विभाग में काम करने वाले मीणा अनुसूचित जाति से संबंध रखते हैं। आरोप के अनुसार मीणा के साथ जामिया के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रियाजुद्दीन ने मारपीट की। यही नहीं, रियाजुद्दीन ने उन्हें लात मारी और जातिसूचक गालियां दीं। उन्होंने मीणा के लिए ‘काफिर’, ‘हरामी’, ‘जंगली’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया। इससे भी जब उनका मन नहीं भरा तो भद्दी-भद्दी गालियां दीं। इससे जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ है।
ऐसे शुरू हुआ विवाद
रामफूल मीणा ने 17 जनवरी को एक लिखित शिकायत सहायक पुलिस आयुक्त, सरिता विहार-सुखदेव विहार को दी है। मीणा ने अपनी शिकायत में लिखा है कि हमला अकेले में नहीं हुआ था और न ही वे ‘फैकल्टी मेंबर’ के खिलाफ शिकायत करने वाले थे। मीणा के अनुसार, यह विवाद तब शुरू हुआ जब जामिया में छात्रों के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों को लेकर रियाज़ुद्दीन के विरुद्ध रजिस्ट्रार के कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई गई। मीणा का कहना है कि इसमें उनका हाथ नहीं था। हालांकि, जब इस मामले से जुड़ा एक वीडियो वायरल हुआ, तो शक के आधार पर उन्हें निशाना बनाया गया।
शिकायत के अनुसार, मीणा के साथ पहली घटना 13 जनवरी, 2026 को दोपहर बाद लगभग 3:00 बजे हुई थी। मीणा ने बताया, “मैं ऑफिस में अपनी डेस्क पर काम कर रहा था, तभी रियाजुद्दीन आए और बिना किसी कारण, अचानक मेरे लिए जाति-सूचक भद्दी बातें करने लगे। वे मुझे, ‘अरे ओ मीणा, कमीना’ कहकर बुलाने लगे। इस पर जब मैंने ऐतराज जताया और तमीज से बात करने को बोला, तब उन्होंने गुस्से में मां-बहन की गालियां देनी शुरू कर दीं।”
मीणा ने आगे कहा, “मैंने इस घटना की लिखित शिकायत जामिया के कुलसचिव को उसी दिन कर दी, लेकिन दुख की बात यह है कि दो दिन तक मेरी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और इस शिकायत की जानकारी रियाजुद्दीन को रजिस्ट्रार ऑफिस से मिल गई।” उन्होंने आगे बताया, “इसके बाद 16 जनवरी की शाम को लगभग 5 बजे रियाजुद्दीन मेरे ऑफिस में आकर फिर से मुझे भद्दी-भद्दी जाति-सूचक गालियां देते हुए कहने लगे, अरे हरामी मीणा! तुम्हारी औकात कैसे हुई कि तुमने मेरे खिलाफ शिकायत की। सा… आदिवासी, जंगली हो करके मुसलमानों के संस्थान में रहकर मेरे खिलाफ शिकायत करने की जुर्रत कैसे की?”
काफिर कहकर किया अपमानित
रियाजुद्दीन ने मीणा को कई लात-घूसे मारे, जिससे उनके चेहरे पर सूजन आ गई और होंठ से खून निकलने लगा। मीणा ने यह भी आरोप लगाया कि उन पर लंबे समय से कन्वर्जन का दबाव बनाया जा रहा था और उन्हें बार-बार ‘काफिर’ कहकर अपमानित किया जाता था। इस मामले में जामिया प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
दरअसल, मारपीट के बाद जब मीणा अपने प्राचार्य मुमताज अहमद खान के साथ रजिस्ट्रार ऑफिस पहुंचे, तो उन्हें भरोसा दिया गया कि आरोपी पर कार्रवाई होगी। लेकिन दो दिन बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई और उल्टे मीणा का स्थानांतरण संस्कृत विभाग में कर दिया गया। अब मीणा ने दिल्ली पुलिस से एससी/एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

















